बिहार का इकलौता वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) इन दिनों पर्यटकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। हालांकि मॉनसून के आने के साथ ही वन विभाग ने यहां गंडक नदी और जंगल में होने वाली सफारी को अस्थायी रूप से रोक दिया है, फिर भी प्रकृति प्रेमियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। सैलानी लगातार यहां के घने जंगलों और प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं। इस रिजर्व के प्रति लोगों का लगाव इतना अधिक बढ़ चुका है कि यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है।
लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पर्यटकों के बीच वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की लोकप्रियता में हर साल इजाफा हो रहा है। वर्ष 2023-2024 के सत्र में कुल 3,22,071 सैलानी यहां आए थे, जिनमें से 1,67,521 लोगों ने शुल्क देकर प्रवेश लिया, जबकि 1,54,550 पर्यटक निःशुल्क भ्रमण पर थे। यह सिलसिला अगले साल और भी तेज हो गया। वर्ष 2024-2025 में कुल 4,80,680 पर्यटक यहां पहुंचे, जिनमें 1,50,000 सशुल्क और 3,30,680 निःशुल्क यात्री थे।
वर्ष दर वर्ष बढ़ता क्रेज
बिहार के कश्मीर के नाम से मशहूर इस रिजर्व में वर्ष 2025-2026 के दौरान 6,09,159 सैलानियों ने विभिन्न रेंजों का दौरा किया। इसमें 1,53,601 सशुल्क और 4,55,558 निःशुल्क पर्यटक शामिल रहे। वहीं, वर्तमान सत्र यानी वर्ष 2026-2027 के अप्रैल और मई महीनों के भीतर ही 69,618 लोग यहां पहुंच चुके हैं। इनमें से 20,166 सैलानियों ने शुल्क भुगतान किया जबकि 49,452 ने बिना शुल्क के भ्रमण किया। पिछले तीन वर्षों के कुल आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 14,81,528 पर्यटक इस रिजर्व की शोभा देख चुके हैं।
सफारी का बढ़ता आकर्षण
पर्यटकों की कुल संख्या के साथ ही सफारी का आनंद लेने वालों की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021-2022 में 11,538 लोगों ने सफारी की, जो वर्ष 2022-2023 में बढ़कर 17,198 हो गई। इसके बाद वर्ष 2023-2024 में 23,550, वर्ष 2024-2025 में 29,196 और वर्ष 2025-2026 में 33,224 लोगों ने जंगल सफारी का लुत्फ उठाया। वर्ष 2026-2027 के अप्रैल से जून महीने तक भी 14,040 सैलानियों ने सफारी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार पर्यटन का एक मुख्य केंद्र बन चुका है।











