घर के आंगन या बालकनी में रखे गमले जब हरी-भरी पत्तियों से भर जाते हैं तो वे देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं, लेकिन कई बार पौधों की टहनियां तो तेजी से बढ़ती रहती हैं पर उनमें महीनों तक एक भी फूल नजर नहीं आता। ऐसी स्थिति अक्सर बागवानी के शौकीनों को परेशान कर देती है। सामान्य तौर पर लोग यह मान लेते हैं कि पौधे को पर्याप्त पानी या पोषण नहीं मिल रहा है, जिसके चलते वे लगातार पानी देने लगते हैं या बिना सोचे-समझे बार-बार खाद डालना शुरू कर देते हैं। हकीकत यह है कि हर बार यह तरीका काम नहीं करता, क्योंकि पौधे की हरी पत्तियों के विकास और उसमें फूल खिलने की बुनियादी जरूरतें एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं।
गमले के आकार से लेकर मिट्टी की बनावट, जड़ों का फैलाव और पोषक तत्वों का सटीक संतुलन फूल खिलने की पूरी प्रक्रिया को तय करता है। अगर आपका पौधा भी तेजी से लंबा और घना हो रहा है लेकिन उसमें फूल की एक भी कली नहीं बन रही, तो आपको पौधे की सतह के नीचे जड़ों और मिट्टी में मौजूद कमियों पर ध्यान देना होगा।
केवल ज्यादा पानी और साधारण खाद से नहीं खिलते फूल
गमलों में लगे पौधों के लिए नियमित तौर पर पानी मिलना बहुत जरूरी होता है, लेकिन सिर्फ पानी के दम पर लंबे समय तक बेहतर फ्लावरिंग की उम्मीद नहीं की जा सकती। शुरुआत में जब नया पौधा गमले में लगाया जाता है, तो वह मिट्टी में पहले से मौजूद जरूरी तत्वों की मदद से आसानी से बढ़ता रहता है। धीरे-धीरे समय बीतने के साथ गमले की सीमित मिट्टी के पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं और मिट्टी कमजोर पड़ जाती है। ऐसी परिस्थिति में पौधा अपनी बची हुई ऊर्जा केवल जीवित रहने, नई टहनियां निकालने और पत्तियों को बढ़ाने में ही लगा देता है।
यही वजह है कि लंबे समय से एक ही गमले में टिके पौधे की मिट्टी का समय-समय पर परीक्षण करना बेहद जरूरी माना जाता है। अगर गमले की ऊपरी मिट्टी बहुत सख्त हो चुकी है या पानी डालते ही वह जड़ों तक पहुंचे बिना किनारे से बह जाता है, तो समझ लेना चाहिए कि मिट्टी अपनी ताकत खो चुकी है और अब पौधे को रीपॉट करने का सही समय आ गया है।
पत्तियों और फूलों के लिए जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन
फूल देने वाले पौधों की अच्छी सेहत के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्वों की सही मात्रा का होना बहुत आवश्यक होता है। बागवानी में इन तीनों तत्वों की भूमिका पूरी तरह अलग-अलग बंटी होती है। नाइट्रोजन मुख्य रूप से पौधे की हरियाली, पत्तियों के आकार और तनों की सामान्य बढ़ोतरी में मदद करता है। इसके विपरीत, फास्फोरस और पोटाश पौधे के आंतरिक विकास, जड़ों की मजबूती और कलियों से फूल बनने की रासायनिक प्रक्रिया को गति देते हैं।
अगर पौधे में केवल ऐसी खाद डाली जाए जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अधिक हो, तो पौधा केवल हरी पत्तियां ही बढ़ाता रहेगा और उसमें फूल कभी नहीं आएंगे। इसलिए बार-बार साधारण पत्ती बढ़ाने वाली खाद डालने के बजाय पौधे की किस्म और जरूरत के आधार पर संतुलित जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए। वर्मीकंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई पुरानी जैविक खाद मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा और जरूरी पोषण को बढ़ाने का सबसे बेहतरीन माध्यम साबित होती है। खाद डालते समय गमले के आकार और पौधे की उम्र का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
जड़ों का जाल और रूट बाउंड की समस्या
अक्सर देखने में आता है कि पौधा ऊपर से पूरी तरह तंदुरुस्त और हरा-भरा दिखाई देता है, लेकिन गमले के भीतर उसकी जड़ों के लिए फैलने की जगह बिल्कुल खत्म हो जाती है। जब पौधे की जड़ें गमले की अंदरूनी सतह पर चारों तरफ गोल-गोल घूमकर पूरी जगह घेर लेती हैं, तो बागवानी की भाषा में इसे रूट बाउंड होना कहा जाता है। इस अवस्था में पौधा नीचे से पूरी तरह जकड़ जाता है।
रूट बाउंड पौधे की मिट्टी बहुत जल्दी सूखने लगती है, क्योंकि गमले में मिट्टी की जगह केवल जड़ों का घना जाल बचता है। ऐसे में नियमित पानी देने के बाद भी पौधा तनाव में रहता है और उसे पोषक तत्व सोखने में भारी परेशानी होती है। यदि पौधा काफी लंबे समय से एक ही बर्तन में लगा है और उसकी जड़ें गमले के ड्रेनेज होल से बाहर निकलने लगी हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि गमला पौधे के लिए छोटा पड़ चुका है।
रीपॉटिंग के दौरान जड़ों की देखभाल और सही गमले का चुनाव
पौधे को पुराने गमले से बाहर निकालते समय उसकी जड़ों का बारीकी से मुआयना करना चाहिए। अगर जड़ें आपस में बहुत ज्यादा उलझकर सख्त गुच्छा बन चुकी हैं, तो खराब, सूखी या बहुत ज्यादा घनी हो चुकी जड़ों की हल्की छंटाई की जा सकती है। छंटाई करते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि मुख्य और स्वस्थ जड़ों को नुकसान न पहुंचे।
जड़ों की हल्की सफाई के बाद पौधे को पुराने गमले से थोड़े बड़े आकार के गमले में लगाना चाहिए। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि जरूरत से ज्यादा बड़ा गमला चुनना भी पौधे के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बहुत बड़े गमले में अतिरिक्त मिट्टी ज्यादा पानी सोख लेती है, जिससे जड़ों के पास लंबे समय तक नमी ठहरी रहती है और जड़ें गलने का खतरा बढ़ जाता है।
नई मिट्टी के लिए बनाएं आदर्श सॉइल मिक्स
जब भी पौधे को नए गमले में लगाएं, तो सिर्फ जमीन की सादी मिट्टी भरने की भूल न करें। एक आदर्श सॉइल मिक्स वही होता है जिसमें उपजाऊ मिट्टी के साथ पर्याप्त जैविक खाद और पानी की बेहतरीन निकासी के लिए उपयुक्त सामग्री मिली हो। घरेलू बागवानी में वर्मीकंपोस्ट के साथ कोकोपीट का मिश्रण सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, क्योंकि यह मिट्टी को भुरभुरा और हल्का बनाए रखता है।
मिट्टी को कीटों और फंगस से सुरक्षित रखने के लिए कई गार्डनर नीम खली का उपयोग भी करते हैं। इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ट्राइकोडर्मा या ह्यूमिक एसिड जैसे उत्पादों का प्रयोग भी किया जाता है। हालांकि इन विशेष उत्पादों को इस्तेमाल करने से पहले पैकेट पर दिए गए दिशा-निर्देशों और सही मात्रा की जांच जरूर कर लेनी चाहिए, क्योंकि हर पौधे को इन सभी चीजों की जरूरत नहीं होती।
रीपॉटिंग के तुरंत बाद खाद देने से बचें
नए गमले में लगाने के बाद पौधे को नए वातावरण और नई मिट्टी में संभलने के लिए थोड़ा समय देना बेहद आवश्यक होता है। चूंकि रीपॉटिंग की प्रक्रिया में जड़ों के साथ छेड़छाड़ होती है, इसलिए तुरंत कोई भी तेज रासायनिक या जैविक खाद नहीं डालनी चाहिए। ऐसा करने से पौधे की जड़ें जल सकती हैं और पौधा झटके में जा सकता है।
शुरुआती दिनों में पौधे की स्थिति पर नजर रखें और जब पौधा नई मिट्टी में अच्छी तरह अपनी पकड़ बना ले और उसमें नई टहनियां या कोपलें फूटने लगें, तभी खाद देना शुरू करें। फूल वाले पौधों में कलियां लाने के लिए फास्फोरस से भरपूर खाद का उपयोग फायदेमंद होता है। बोनमील जैसी जैविक खाद का प्रयोग करने से पहले पौधे की विशेष प्रजाति और खाद की निर्धारित मात्रा की पुष्टि जरूर कर लें।



















