कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी ओपनएआई ने कानूनी पेशे से जुड़े विशेषज्ञों और विधिक फर्मों की सहायता के लिए एक नया मंच एस्ट्रा फॉर लॉ उतारा है। यह विशेष प्रणाली अदालती मुकदमों के पिछले फैसलों, कानूनी धाराओं की पड़ताल, विस्तृत विधिक कागजात के अध्ययन और औपचारिक ड्राफ्ट तैयार करने जैसे जटिल कार्यों को गति देने के उद्देश्य से बनाई गई है। हालांकि शुरुआत में इसका संपूर्ण लीगल सर्च इंडेक्स अमेरिकी कानूनों और अदालती व्यवस्था पर आधारित रखा गया है, जिसके चलते भारतीय वकीलों को स्थानीय कानूनों के मामले में इसका सीधा लाभ अभी नहीं मिल सकेगा। जानकारों का आकलन है कि आगामी समय में कंपनी इस विधिक प्रणाली का विस्तार भारतीय कानूनी व्यवस्था के अनुरूप भी कर सकती है।
सामान्य इंटरनेट खोज से अलग कानूनी डेटाबेस की व्यवस्था
विधिक क्षेत्र में कार्यरत पेशेवर अब तक बुनियादी जानकारी जुटाने, दस्तावेजों को व्यवस्थित करने अथवा प्रारंभिक प्रारूप तैयार करने के लिए सामान्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों का सहारा लेते रहे हैं। इसके विपरीत, एस्ट्रा फॉर लॉ को सीधे कानूनी प्रक्रियाओं की बारीकियों को ध्यान में रखकर गढ़ा गया है। इस प्लेटफॉर्म में संयुक्त राज्य अमेरिका के कोर्ट फैसलों, विधायी नियमों, प्रशासनिक निर्णयों और अदालती विनियमों का एक विशाल डेटाबेस समाहित किया गया है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसी जटिल कानूनी बिंदु पर काम करते समय अधिवक्ताओं को साधारण वेब खोज पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे सीधे प्रमाणित लीगल सर्च लेयर से परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।
विशाल सर्च इंडेक्स और साझेदारी
इस नई प्रणाली की क्षमता पर जानकारी देते हुए स्पष्ट किया गया है कि एस्ट्रा फॉर लॉ का लीगल सर्च इंडेक्स 23 करोड़ से अधिक पन्नों के कानूनी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की तुरंत पड़ताल करने में सक्षम है। इस संग्रह में नए अदालती आदेश और कानूनी दस्तावेज नियमित रूप से जोड़े जा रहे हैं। कोर्टलिसनर का संचालन करने वाले संगठन फ़्री लॉ प्रोजेक्ट के साथ की गई विशेष साझेदारी के तहत प्रकाशित अमेरिकी प्रेसिडेंशियल केस लॉ का 99.9 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इस शोध तंत्र में एकीकृत कर दिया गया है, जिससे दशकों पुराने ऐतिहासिक अदालती फैसलों तक पहुंच बेहद सहज हो गई है।
दस्तावेजों के विश्लेषण से लेकर कमजोर कड़ियों की पहचान
यह मंच केवल पुराने अदालती फैसले ढूंढने तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी तैयारी के लगभग हर चरण में सहायता प्रदान करता है। इसका उपयोग मुकदमों के आधार तैयार करने, अदालती बहस की संरचना रचने, विधिक अनुबंधों की शर्तें लिखने, प्रस्तुत साक्ष्यों व कागजात का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने तथा विरोधी पक्ष के तर्कों में संभावित कमजोरियों को समय रहते पकड़ने के लिए किया जा सकता है। इससे पहले वकीलों और उनकी शोध टीमों को जिन दस्तावेजों और पुरानी नजीरों को खंगालने में कई दिन या दर्जनों घंटे खर्च करने पड़ते थे, वह प्रारंभिक कानूनी शोध कार्य अब काफी कम समय में पूरा किया जा सकता है।
भारतीय वकीलों के लिए मौजूदा उपयोगिता और सीमाएं
भारतीय न्याय व्यवस्था में कार्यरत अधिवक्ताओं के लिए इस मंच का प्रत्यक्ष लाभ फिलहाल सीमित ही रहने वाला है। इसकी मुख्य वजह यह है कि वर्तमान में यह सेवा पूरी तरह से अमेरिकी अदालती प्रणाली और वहां की कानून व्यवस्था के दायरे में तैयार की गई है। यदि कोई भारतीय वकील देश के उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालयों के पिछले निर्णयों, भारतीय कानूनों अथवा केंद्र व राज्यों के नियमों पर शोध करना चाहे, तो अमेरिकी डेटाबेस पर आधारित यह इंडेक्स उनके काम नहीं आएगा।
उदाहरण के तौर पर, भारतीय दंड संहिता अथवा भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता अथवा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य कानून या फिर विभिन्न राज्यों के स्थानीय कानूनों से जुड़े विषयों पर शोध के लिए इस अमेरिकी संग्रह से मदद नहीं मिल सकती। इसके बावजूद, भारतीय पेशेवर अपने निजी दस्तावेजों को समझने, लंबी बहसों का सार संक्षेप तैयार करने, भाषा को औपचारिक विधिक रूप देने और विचारों को तार्किक क्रम में व्यवस्थित करने जैसे सामान्य सहायक कार्यों के लिए इसकी एआई क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
घरेलू कानूनी डेटा जुड़ने पर बदलेगी तस्वीर
भारत में इस प्रकार की तकनीक की वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आएगी जब स्थानीय अदालती फैसलों और विधानों को इसी तरह व्यवस्थित रूप में एआई मॉडल के साथ जोड़ा जाए। भारत की अदालत प्रणाली, राज्य स्तरीय कानूनों और विभिन्न नियामक संस्थाओं के फैसलों का दायरा अत्यंत विस्तृत है। ऐसे में भारतीय कानूनी बिरादरी के लिए किसी सामान्य भाषा मॉडल की तुलना में भारतीय अदालतों के फैसलों और कानूनों पर प्रशिक्षित एक सुरक्षित व प्रामाणिक लीगल सर्च इंजन कहीं अधिक असरदार और व्यावहारिक साबित होगा।
सलाहकार की भूमिका, अंतिम दायित्व वकील का
कानूनी क्षेत्र में तकनीकी के उपयोग को लेकर यह स्पष्ट रेखा खींचना बेहद आवश्यक है कि कोई भी स्वचालित प्रणाली किसी पंजीकृत वकील का विकल्प नहीं बन सकती। ओपनएआई ने भी यह सावधानी बरतने की सलाह दी है कि इस मॉडल द्वारा प्रस्तुत उत्तरों, उद्धरणों और कानूनी संदर्भों की इंसानी स्तर पर पुनः जांच की जानी चाहिए। यह तकनीक एक दक्ष शोध सहायक की तरह पृष्ठभूमि का काम तेजी से निपटा सकती है, लेकिन मुवक्किल के प्रति जवाबदेही और अदालत में अंतिम निर्णय लेने का दायित्व हमेशा संबंधित अधिवक्ता का ही रहेगा।
तकनीकी कंपनियों के बीच कानूनी क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
विधिक कामकाज के लिए समर्पित कृत्रिम बुद्धिमत्ता बाजार तेजी से विस्तृत हो रहा है और कई दिग्गज कंपनियां इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। एंथ्रोपिक और गूगल जैसी प्रमुख कंपनियां भी वकीलों के अनुकूल टूल्स के विकास में जुटी हैं। थॉमस रायटर्स ने अपने व्यापक कानूनी संग्रह पर आधारित विशेष मॉडल पहले ही पेश किया है। वहीं इस नए मंच के विस्तार के तहत हार्वे और लेगोरा जैसे लीगल टेक प्लेटफॉर्म के साथ सहयोग किया जा रहा है, जबकि रिलैटिविटी, Clio, iManage और DeepJudge जैसे विधिक सॉफ्टवेयर के साथ एकीकरण की सुविधा भी जोड़ी गई है।


















