सैन फ्रांसिस्को की सड़कों पर एक बार फिर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और ओपनएआई, एंथ्रोपिक तथा गूगल डीपमाइंड के दफ्तरों तक मार्च निकाला। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उन एआई मॉडल्स के विकास को रोकना है जो अत्यधिक शक्तिशाली माने जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक तकनीक की सुरक्षा और उसके प्रभावों को लेकर बेहतर नियम नहीं बन जाते, तब तक नए प्रयोगों पर रोक लगाई जानी चाहिए।
प्रदर्शन का दायरा और उद्देश्य
शनिवार को आयोजित इस रैली का नेतृत्व 'स्टॉप द एआई रेस' नामक संगठन ने किया। पहले यह आंदोलन केवल एआई की सुरक्षा मानकों तक सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा काफी बढ़ गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण होने वाली संभावित बेरोजगारी, पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, सैन फ्रांसिस्को में आवास की बढ़ती लागत और दिग्गज तकनीकी कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे भी शामिल किए गए हैं।
मांगें और भविष्य की रणनीति
इस मार्च के आयोजक और पूर्व एआई रिसर्चर माइकल त्राज़ी ने बताया कि उनका समूह चाहता है कि प्रमुख कंपनियां नए फ्रंटियर एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करना बंद करें। हालांकि, मौजूदा सिस्टम को चालू रखने पर उन्हें आपत्ति नहीं है। प्रदर्शनकारियों का आग्रह है कि अनुसंधान का ध्यान एआई सुरक्षा और अलाइनमेंट पर केंद्रित किया जाए। इसके अलावा, कुछ प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय और राज्य स्तर पर अधिक सख्त नियमों को लागू करने की भी वकालत की है।
त्राज़ी का नजरिया
माइकल त्राज़ी के अनुसार, मार्च महीने में आयोजित उनके पहले प्रदर्शन की तुलना में इस बार उनके उद्देश्यों और रणनीति में बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका ध्यान केवल कंपनियों के सीईओ को समझाने पर था, लेकिन अब वे इस मुद्दे को राजनीतिक महत्व दिलाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि कंपनियों के शीर्ष अधिकारी अब इन बातों पर ध्यान देने लगे हैं, जिसके संकेत कुछ ब्लॉग पोस्ट और बातचीत से मिले हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करना यह दिखाने के लिए जरूरी है कि आम लोग एआई के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
समर्थन और आगामी योजनाएं
गौरतलब है कि मार्च में आयोजित हुए पिछले प्रदर्शन में लगभग 200 लोग शामिल हुए थे, जिन्होंने एंथ्रोपिक, ओपनएआई और एक्सएआई के कार्यालयों के बीच मार्च किया था। तब से यह समूह लगातार सक्रिय है। त्राज़ी ने इस सफर में मिले समर्थन पर खुशी जताई, विशेष रूप से नेशनल यूनियन ऑफ हेल्थकेयर वर्कर्स (NUHW) द्वारा इस विरोध को दिए गए समर्थन और सोशल मीडिया पर इसे साझा करने का उन्होंने उल्लेख किया। इसके साथ ही, एआई एक्शन और क्विटजीपीटी जैसे समूहों का सहयोग भी उन्हें काफी मददगार लगा। हालांकि, ओपनएआई, एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड की ओर से इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। आयोजकों का इरादा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रंटियर एआई के विकास पर रोक लगवाने और विधायकों से सख्त निगरानी कानूनों को अपनाने की अपील जारी रखने का है।
एआई सुरक्षा पर बढ़ती वैश्विक चिंता
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एआई की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मई में ओपनएआई ने चैटजीपीटी में नई सुरक्षा सुविधाएं जोड़ीं ताकि बातचीत के दौरान आत्म-नुकसान और हिंसा के संकेतों को पहचाना जा सके। इसके अलावा, जून में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एंथ्रोपिक को साइबर सुरक्षा जोखिमों के कारण क्लॉड फेबल 5 और क्लॉड मिथोस 5 मॉडल्स का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया था। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल ने भी आगाह किया है कि एआई का विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि वैज्ञानिक 'विनाशकारी परिणामों' की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर सकते।











