परप्लेक्सिटी ने ओपन-सोर्स तकनीक का लाभ उठाते हुए एक ऐसा एआई मॉडल तैयार किया है जो लगभग Claude Opus 4.8 जैसी परफॉरमेंस देने में सक्षम है। यह नया सिस्टम एक-तिहाई लागत में काम पूरा कर लेता है। कंपनी ने GLM 5.2 के पोस्ट-ट्रेनिंग वर्जन का रिसर्च प्रिव्यू जारी किया है, जिसे विशेष रूप से इसके कंप्यूटर एजेंट हार्नेस के भीतर संचालन के लिए बनाया गया है।
चीनी तकनीक का नया अवतार
GLM 5.2 मूल रूप से बीजिंग स्थित जेड डॉट एआई (Z.ai) की लैब का मॉडल है, जो लगभग 744 बिलियन पैरामीटर्स का उपयोग करता है। यह मॉडल जनवरी 2025 से अमेरिकी संस्थाओं की प्रतिबंधित सूची में शामिल है। जून में एमआईटी लाइसेंस के तहत जारी किए गए इस मॉडल को मौजूदा समय में लॉन्ग-हॉरिजॉन कोडिंग बेंचमार्क में सबसे शक्तिशाली मॉडलों में गिना जाता है। इसका ओपन-वेट्स स्ट्रक्चर किसी भी डेवलपर को इसे डाउनलोड करने, उसमें बदलाव करने और व्यावसायिक स्तर पर उपयोग करने की पूरी स्वतंत्रता देता है, जिसका लाभ परप्लेक्सिटी ने बखूबी उठाया है।
फाइन-ट्यूनिंग और एडवाइजर टूल का जादू
फाइन-ट्यूनिंग का सरल अर्थ है एक पहले से प्रशिक्षित एआई को विशिष्ट कार्यों के लिए फिर से तैयार करना। परप्लेक्सिटी ने पोस्ट-ट्रेनिंग के जरिए GLM 5.2 को एक विशेष हुनर सिखाया है, जिसे एडवाइजर टूल कहा जाता है। यह टूल तय करता है कि कोई कार्य मॉडल स्वयं हल कर सकता है या उसे अधिक शक्तिशाली मॉडल के पास भेजना होगा। अधिकांश कार्य कम लागत वाले मॉडल ही संभाल लेते हैं, जिससे इंफरेंस की भारी लागत बच जाती है। परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास के अनुसार, इस मॉडल को जब एडवाइजर के साथ जोड़ा जाता है, तो यह सीधे क्लाउड ओपस 4.8 के ग्रेड पर परफॉर्म करता है।
बचत का गणित और अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर
परप्लेक्सिटी ने अपने आंतरिक दक्षता मेट्रिक्स के जरिए इस नए मॉडल की तुलना की है। परिणाम बताते हैं कि फाइन-ट्यून किया गया मॉडल, सामान्य मॉडल की तुलना में दोगुना महंगा जरूर है, लेकिन यह ओपस 4.8 के मुकाबले 600 प्रतिशत तक सस्ता है। इस सेटअप में परप्लेक्सिटी का कंप्यूटर सिस्टम 19 से अधिक मॉडलों को मैनेज करता है, जहाँ GLM 5.2 डिफ़ॉल्ट के रूप में सस्ते कार्यों को संभालता है। यह पूरा सिस्टम अमेरिका में स्थित एनवीडिया बी200 जीपीयू पर चलता है। इससे पहले कंपनी ने डीपसीक आर1 को भी आर1-1776 में बदलकर अपनी पसंद के अनुसार ढालने का प्रयोग किया था। भविष्य में कंपनी नेमोट्रोन 3 अल्ट्रा के साथ भी ऐसा ही प्रयोग करने की योजना बना रही है, जिसके बेंचमार्क और शोध पत्र आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक किए जाएंगे।










