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फीफा वर्ल्ड कप से लेकर क्यूबा तक, डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों की पूरी दास्तानअमेरिका
1 घंटे पहले· 2

फीफा वर्ल्ड कप से लेकर क्यूबा तक, डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों की पूरी दास्तान

फीफा वर्ल्ड कप में दखल से लेकर ईरान, नाटो, ब्रिक्स और क्यूबा तक, डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और मनमाने फैसलों का पूरा ब्योरा।

रविकाश गुप्तारविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता 7 मिनट पढ़ें AI के लिए
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली में एक बात बार-बार सामने आती है, पहले सामने वाले पर इतना दबाव बना दो कि वह झुकने पर मजबूर हो जाए। दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के मुखिया होने के बावजूद ट्रंप का अंदाज अक्सर कूटनीतिक शिष्टाचार की हदें लांघता नजर आता है और हनक तथा मनमानी तक जा पहुंचता है। हर दूसरे दिन किसी न किसी देश, संस्था या नेता को धमकी देना मानो उनकी आदत का हिस्सा बन चुका है। अब तक कारोबार और युद्ध को लेकर धमकियां देते रहे ट्रंप ने हाल ही में फीफा वर्ल्ड कप में भी सीधा दखल देकर अपनी बात मनवा ली, जिसका पूरे यूरोप में कड़ा विरोध हो रहा है। यहां हम बता रहे हैं कि ट्रंप ने कब-कब, कहां और किसे अपनी धमकियों के निशाने पर लिया है।

फीफा वर्ल्ड कप में सीधा दखल

सबसे ताजा और चर्चित मामला फीफा वर्ल्ड कप से जुड़ा है। अमेरिका के स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन को राउंड ऑफ-32 के मुकाबले में रेड कार्ड मिला था, जिसमें अमेरिका ने बोस्निया और हर्जेगोविना को 2-0 से हराया था। यह रेड कार्ड मैच के 64वें मिनट में दिखाया गया था। फीफा के नियमों के मुताबिक रेड कार्ड मिलने के बाद खिलाड़ी अगला मैच नहीं खेल सकता, यानी बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ अगले मुकाबले से बाहर बैठना तय था। लेकिन फीफा की अनुशासन समिति ने अचानक अपना ही फैसला पलट दिया और बालोगुन को टूर्नामेंट में आगे भी खेलने की इजाजत दे दी। अब प्रतिबंध टूर्नामेंट खत्म होने के बाद ही लागू होगा, यानी बालोगुन को इसका खामियाजा तभी भुगतना पड़ेगा जब वर्ल्ड कप निपट चुका होगा। बताया जा रहा है कि इस पूरे उलटफेर के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की सीधी भूमिका रही। उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से खुद फोन पर बात की, जिसके बाद यह फैसला पलट गया। यूरोपीय फुटबॉल की सबसे बड़ी संस्था यूईएफए ने इस दखल पर कड़ी आपत्ति जताई है क्योंकि इससे फीफा की अनुशासनात्मक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

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ईरान युद्ध के दौरान विवादित बयान

ईरान युद्ध के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के बयान बार-बार सुर्खियों में रहे। जब ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई के जनाजे में लाखों लोगों की भीड़ जुटी, तो ट्रंप ने विवादित लहजे में कहा, "हम चाहें तो एक बार में सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन फिर वार्ता के लिए कौन बचेगा?" ईरानी लोगों को खामेनेई के जनाजे में रोता देखकर ट्रंप ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं, इसलिए यह भीड़ और आंसू उनके लिए चौंकाने वाले थे। इसके बाद ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा, "शायद ये नकली आंसू हैं।"

‘आज रात एक सभ्यता की मौत होगी’

ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप ने ईरान के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर देने का ऐलान किया था। उन्होंने सीजफायर के लिए ईरान को साफ डेडलाइन दी थी और चेतावनी दी थी कि अगर ईरान नहीं माना तो उसे बर्बाद कर दिया जाएगा। इसी दौरान ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा कि आज रात एक सभ्यता की मौत होने जा रही है। उन्होंने लिखा, "आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी, जिसे दोबारा कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन संभवतः ऐसा होगा। ईश्वर ईरान के महान लोगों की रक्षा करे!" यह पोस्ट तनाव के उस दौर में आई थी जब ईरान और अमेरिका के बीच सीधी टक्कर की आशंका सबसे ज्यादा बढ़ गई थी।

नाटो को चेतावनी, ग्रीनलैंड का जिक्र

डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो के सहयोगी देशों को भी नहीं बख्शा। ईरान युद्ध के दौरान उन्होंने साफ कहा, "नाटो हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वे तब भी नहीं होंगे।" इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "ग्रीनलैंड याद रखो!" इससे पहले भी ट्रंप यूरोपीय देशों को यह कह चुके हैं कि अगर उन्होंने अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च नहीं किया, तो अमेरिका उनकी रक्षा नहीं करेगा। उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि ऐसी सूरत में वे रूस को उनके साथ जो चाहे करने की खुली छूट दे देंगे, यानी यूरोप की सुरक्षा को लेकर वे किसी तरह की गारंटी नहीं देंगे।

क्यूबा को अल्टीमेटम

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को भी धमकाया है। उन्होंने साफ तौर पर क्यूबा से जल्द समझौता करने की बात कही है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने ऐलान किया कि अब क्यूबा को कोई तेल या पैसा नहीं मिलेगा। उन्होंने लिखा कि क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और वित्तीय मदद पर निर्भर रहा है, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। ट्रंप ने क्यूबा के नेताओं को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अभी वक्त है, इससे पहले कि देर हो जाए, समझौता कर लो।

ब्रिक्स और भारत पर टैरिफ की मार

दूसरी बार सत्ता संभालते ही डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापारिक मोर्चे पर भी बड़ी हलचल मचा दी थी। उन्होंने ब्रिक्स देशों को खुली धमकी दी कि अगर इसमें शामिल देश अमेरिका के खिलाफ कोई नीति लाते हैं, तो उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने भारत और चीन समेत कुल 11 देशों पर भारी टैरिफ लगा दिया। भारत को लेकर उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से भारत दुनिया के सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में गिना जाता है और वहां व्यापार करना बेहद मुश्किल है। इसके अलावा उन्होंने मेक्सिको और कनाडा पर भी टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिससे उत्तरी अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में भी तनाव बढ़ गया।

किम जोंग उन को ‘लिटिल रॉकेट मैन’ बुलाया

डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन के बीच का विवाद भी इतिहास में दर्ज है। यह मामला साल 2017 का है, जब ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में थे। उन्होंने उत्तर कोरिया को इतिहास की सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसने अमेरिका को डराने की कोशिश की, तो उसे ऐसे "फायर एंड फ्यूरी" यानी आग और गुस्से का सामना करना पड़ेगा, जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक मंचों से किम जोंग उन को ‘लिटिल रॉकेट मैन’ भी पुकारा था, जिसने उस वक्त दोनों देशों के बीच तनाव को और हवा दे दी थी।

H-1B वीजा पर मनमानी, अदालत ने पलटा फैसला

अमेरिका के भीतर घरेलू मोर्चे पर भी डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी कम नहीं रही। एच-1बी वीजा को लेकर उनके एक फैसले पर खूब किरकिरी हुई। दरअसल, उन्होंने नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर एक लाख डॉलर, यानी करीब 85 लाख रुपये का भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप के इस फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया। अदालत ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक करार देते हुए इसे एक "अवैध टैक्स" बताया। इस तरह उनके इस मनमाने फैसले पर अमेरिकी अदालत ने ब्रेक लगा दिया, जिससे विदेशी पेशेवरों और उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों दोनों को राहत मिली।

बर्थ राइट सिटिजनशिप पर भी झटका

बर्थ राइट सिटिजनशिप के मामले में भी डोनाल्ड ट्रंप ने मनमाना रुख अपनाया था। लेकिन अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने के व्यापक सिद्धांत को बरकरार रखा। कोर्ट ने ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जो लोग अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी तौर पर रह रहे हैं, उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता यानी जन्मजात नागरिकता नहीं मिलेगी। जजों ने साफ फैसला सुनाया कि देश में पैदा होने वाला कोई भी व्यक्ति, कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर, अमेरिका का नागरिक माना जाएगा, यानी ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश अमल में नहीं आ सका।

तीसरी दुनिया के देशों पर पाबंदी की धमकी

नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड के दो सैनिकों पर गोलीबारी की घटना हुई थी। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस हमले को एक अफगान नागरिक ने अंजाम दिया था। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि वे तीसरी दुनिया के देशों से लोगों को अमेरिका में आने नहीं देंगे, यानी इस एक हमले के बाद उनकी आव्रजन नीति और सख्त हो गई।

इसका आप पर असर

  • भारत में: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ से भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों के लिए अमेरिकी बाजार में माल बेचना महंगा और मुश्किल हो सकता है।
  • एच-1बी वीजा वालों के लिए: एक लाख डॉलर के प्रस्तावित शुल्क को अदालत ने रद्द कर दिया है, इसलिए फिलहाल अमेरिका जाने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों पर यह भारी शुल्क लागू नहीं होगा।
  • फुटबॉल फैंस के लिए: फीफा वर्ल्ड कप में हुए इस विवाद से टूर्नामेंट के फैसलों की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

सवाल-जवाब

फीफा वर्ल्ड कप में फोलारिन बालोगुन को रेड कार्ड क्यों मिला था?
बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मैच के 64वें मिनट में बालोगुन को रेड कार्ड दिखाया गया था, जिसे बाद में फीफा की अनुशासन समिति ने पलट दिया।
फीफा का फैसला किसने बदलवाया?
बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात कर यह फैसला पलटवा दिया, जिस पर यूईएफए ने कड़ी आपत्ति जताई है।
ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या धमकी दी थी?
ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान सीजफायर के लिए तय डेडलाइन नहीं मानता तो उसे तबाह कर दिया जाएगा, और सोशल मीडिया पर लिखा कि आज रात एक सभ्यता की मौत होने जा रही है।
ट्रंप ने नाटो को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि नाटो जरूरत के वक्त काम नहीं आया और भविष्य में भी मदद नहीं करेगा, साथ ही 'ग्रीनलैंड याद रखो' जैसी चेतावनी भी दी।
क्यूबा को अमेरिका से क्या धमकी मिली?
ट्रंप ने ऐलान किया कि क्यूबा को अब कोई तेल या पैसा नहीं मिलेगा और उसे जल्द अमेरिका से समझौता करने की चेतावनी दी।
भारत पर कितना और क्यों टैरिफ लगाया गया?
ट्रंप ने भारत समेत 11 देशों पर भारी टैरिफ लगाया और कहा कि भारत परंपरागत रूप से सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में शामिल है।
एच-1बी वीजा पर लगे शुल्क का क्या हुआ?
अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने एक लाख डॉलर के प्रस्तावित शुल्क को असंवैधानिक और अवैध टैक्स बताते हुए रद्द कर दिया।
बर्थ राइट सिटिजनशिप पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उस आदेश को खारिज कर दिया जो गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चों की जन्मजात नागरिकता खत्म करना चाहता था।
रविकाश गुप्ता
लेखक के बारे मेंरविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताभारत समाचार, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार, क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट न्यूज़, स्टार्टअप, आर्थिक रुझान, डिजिटल एसेट्स, निवेश अंतर्दृष्टि

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत की ख़बरों, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार और क्रिप्टोकरेंसी को कवर करते हैं। वे आर्थिक रुझानों, क्रिप्टो घटनाक्रमों और दुनियाभर की बड़ी बाज़ार-हलचल वाली घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं।

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत-केंद्रित रिपोर्टिंग और बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार व क्रिप्टोकरेंसी की वैश्विक कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, आर्थिक घटनाक्रम, कॉर्पोरेट मामले, शेयर बाज़ार, ब्लॉकचेन नवाचार और आधुनिक वित्तीय तंत्र को आकार देने वाले डिजिटल एसेट रुझान कवर करते हैं। स्पष्टता, विश्लेषण और समय पर रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ रविकाश वैश्विक आर्थिक बदलावों, उभरती तकनीकों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और बदलते क्रिप्टो परिदृश्य की अंतर्दृष्टि देते हैं। उनका काम व्यापक आर्थिक रुझानों को वास्तविक बाज़ार असर से जोड़ता है और पाठकों को पारंपरिक वित्त व डिजिटल एसेट्स की तेज़ी से बदलती दुनिया — दोनों समझने में मदद करता है।

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