ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यह निर्णय क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इसका सीधा उद्देश्य अमेरिका द्वारा पश्चिम एशिया में किए जा रहे कथित हस्तक्षेप को रोकना है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से अब किसी भी जहाज को गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी दखलंदाजी पूरी तरह से बंद नहीं कर देता।
अमेरिका और सहयोगियों को कड़ी चेतावनी
होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के साथ ही IRGC नौसेना ने एक कड़ा संदेश भी जारी किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस समुद्री मार्ग के बंद होने को ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई का बहाना बनाया जाता है, तो इसके परिणाम घातक होंगे। IRGC ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के हमले का जवाब बहुत ही आक्रामक तरीके से दिया जाएगा और क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और उसके सहयोगियों के अतिरिक्त सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरान का यह रुख साफ करता है कि वे अब क्षेत्र की स्थिति बिगड़ने के लिए अमेरिका, इजरायल और उन देशों को सीधे जिम्मेदार मानेंगे, जिन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन के लिए अपने बेस उपलब्ध कराए हैं।
तनाव कम करने के राजनयिक प्रयास और मौजूदा स्थिति
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को कम करने की कोशिशें चल रही हैं। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मस्कट में ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल-बुसैदी के साथ विस्तृत चर्चा की थी। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अलावा होर्मुज स्ट्रेट की समुद्री सुरक्षा और पूरे क्षेत्र में जारी हलचल पर मुख्य रूप से बात की गई थी। अराघची ने सार्वजनिक रूप से जानकारी दी थी कि तेहरान और मस्कट के बीच विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सके। बावजूद इन प्रयासों के, होर्मुज स्ट्रेट पर लगाए गए इस प्रतिबंध ने पूरे क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति को एक बार फिर से गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है।











