सितंबर महीने की 11 तारीख को रात के समय चंद्रमा सिंह राशि की यात्रा समाप्त कर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा के इस गोचर के साथ ही मिथुन राशि में विराजमान मंगल की चतुर्थ दृष्टि चंद्रमा पर सीधी पड़ेगी। अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले मंगल और जल तत्व के प्रतीक चंद्रमा का यह मेल ज्योतिषीय दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका सीधा असर राशिचक्र की जल तत्व से जुड़ी तीन राशियों यानी कर्क, वृश्चिक और मीन पर देखने को मिलेगा। इन तीनों ही राशियों के जातकों को इस अवधि के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि मंगल की यह दृष्टि मानसिक अशांति, अनावश्यक क्रोध और चिड़चिड़ेपन को बढ़ावा दे सकती है। किसी भी बड़े और महत्वपूर्ण फैसले को लेने के लिए 13 सितंबर तक का समय टाल देना इन लोगों के हित में रहेगा।
कर्क राशि पर रहेगा ग्रहों के गोचर का प्रभाव
कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष सावधानी बरतने का है क्योंकि चंद्रमा इस राशि के अपने स्वामी हैं और मंगल की चतुर्थ दृष्टि सीधे उन पर पड़ रही है। इसके साथ ही, वर्तमान समय में मंगल ग्रह इस राशि के त्रिक भावों में शामिल द्वादश भाव में गोचर कर रहे हैं। इस ग्रह स्थिति के कारण धन से जुड़े मामलों में जरा सी भी लापरवाही भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। मन में बेवजह की आशंकाएं और चिंताएं घर कर सकती हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ना तय है। परिजनों के साथ संवाद करते समय अपने गुस्से पर काबू रखना बेहद जरूरी है, अन्यथा आपसी रिश्तों में खटास आ सकती है। इस राशि से जुड़े व्यापारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे 13 सितंबर तक किसी भी प्रकार का बड़ा वित्तीय या व्यावसायिक निर्णय लेने से बचें। इस कठिन समय में मानसिक शांति के लिए शिव चालीसा का पाठ करना एक कारगर उपाय साबित हो सकता है।
वृश्चिक राशि के जातकों को रखना होगा वाणी पर संयम
वृश्चिक राशि के लोगों के लिए चंद्रमा पर मंगल की दृष्टि घरेलू जीवन और सामाजिक दायरे में आपसी मतभेद या विवाद की स्थिति पैदा कर सकती है। ऐसे में यह बेहद आवश्यक है कि आप अपनी वाणी का प्रयोग बहुत सोच-समझकर और नियंत्रण के साथ करें। यदि आप किसी यात्रा पर जा रहे हैं तो अपने कीमती सामान और आभूषणों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। किसी भी गलत या नकारात्मक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति की संगति आपके लिए भारी नुकसान का सबब बन सकती है और समाज में आपके मान-सम्मान को भी आघात पहुंचा सकती है। इसके अलावा, छिपे हुए शत्रुओं या गुप्त विरोधियों से भी सतर्क रहने की सख्त जरूरत है। हालांकि, इन तमाम चुनौतियों के बीच चंद्रमा की विशिष्ट स्थिति के कारण नौकरीपेशा वर्ग से जुड़े कुछ लोगों को कार्यक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने की भी पूरी संभावना है। इस समयावधि के दौरान नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
मीन राशि के जातकों को गुस्से और भावनाओं पर करना होगा नियंत्रण
मीन राशि के जातकों पर ग्रहों के इस गोचर का सीधा असर उनके स्वभाव पर पड़ेगा, जिससे अत्यधिक गुस्सा और चिड़चिड़ापन उनके ऊपर हावी हो सकता है। अपने मन की स्थिति को संतुलित रखने और खुद पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए योग और ध्यान का नियमित सहारा लेना फायदेमंद होगा। भावनाओं के वेग में आकर या आवेश में कोई भी निर्णय लेने से पूरी तरह बचें, अन्यथा भविष्य में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन को लेकर भी इस दौरान पूरी सतर्कता बरतनी होगी; अपने विचार अपने जीवनसाथी पर जबरन न थोपें, क्योंकि इससे दूरियां बढ़ने या अलगाव की स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी मीन राशि के लोगों को अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखना चाहिए। इस गोचर के प्रतिकूल प्रभावों से बचने के लिए शिवलिंग पर नियमित रूप से जल अर्पित करना एक उत्तम धार्मिक उपाय बताया गया है।


















