उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय में शिक्षा विभाग के कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में सक्रिय क्षेत्रीय दल वॉइस ऑफ द पीपल्स पार्टी (वीपीपी) ने मेघालय के शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव विजय कुमार मंत्री को पद से तत्काल हटाने की पुरजोर वकालत की है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि हाल के दिनों में लागू की गई शिक्षा संबंधी नीतियों के कारण राज्यभर के शिक्षकों के बीच भारी अनिश्चितता और असंतोष का माहौल बन गया है।
प्रशासनिक नीतियों और शिक्षकों के कल्याण पर उठे सवाल
पार्टी प्रमुख अर्देंट मिलर बसायावमोइत ने राज्य की प्रशासनिक प्रणाली पर प्रहार करते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग का मौजूदा प्रबंधन स्थानीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील नहीं है। वीपीपी के अनुसार, घाटे वाले अनुदान प्राप्त संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की कल्याणकारी योजनाओं, उनकी सेवा शर्तों और वेतन संरचना के संबंध में लिए गए फैसले शिक्षकों के हितों के विपरीत सिद्ध हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में स्कूलों के युक्तीकरण की प्रक्रिया को भी जिस प्रकार आगे बढ़ाया जा रहा है, उससे आम जनता और स्थानीय शैक्षणिक समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है।
अंकीय दक्षता बनाम स्थानीय सामाजिक वास्तविकताएं
वीपीपी के प्रमुख अर्देंट मिलर बसायावमोइत ने इस बात पर जोर दिया कि मेघालय जैसे विविधतापूर्ण राज्य की शिक्षा व्यवस्था को केवल नौकरशाही के मापदंडों या केवल आंकड़ों की दक्षता से नहीं संचालित किया जा सकता। उन्होंने कहा कि शिक्षा की नीतियों का निर्माण करते समय राज्य की विशिष्ट सामाजिक, भौगोलिक और स्थानीय धरातलीय स्थितियों को ध्यान में रखना अनिवार्य है। केवल कागजी आंकड़ों और प्रशासनिक सुगमता के आधार पर नीतियां बनाने से जमीनी स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता और सुलभता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
नेतृत्व परिवर्तन और जवाबदेह व्यवस्था की मांग
शिक्षा क्षेत्र में उपजी इस स्थिति को सुधारने के लिए वॉइस ऑफ द पीपल्स पार्टी ने विभाग में नेतृत्व परिवर्तन को अति आवश्यक बताया है। पार्टी का मानना है कि शिक्षा विभाग को एक ऐसी प्रशासनिक सोच और नेतृत्व की जरूरत है जो शिक्षकों के साथ पारदर्शी संवाद स्थापित कर सके और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करे। बसायावमोइत के अनुसार, “हमें ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो शिक्षकों की बात सुने, स्थानीय वास्तविकताओं का सम्मान करे और प्रशासनिक सुविधा से ऊपर छात्रों के हितों को रखे।” इसी सिलसिले में वीपीपी ने सरकार से मांग की है कि विजय कुमार मंत्री की जगह किसी ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए जो मेघालय की सामाजिक परिस्थितियों को समझकर जनहित में नीतियां लागू कर सके।




















