जुलाई का यह महीना ज्योतिष जगत में खास माना जा रहा है, क्योंकि 18 जुलाई को चंद्रमा सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। इस गोचर के साथ वह स्थिति भी बदलेगी जिसमें फिलहाल सूर्य, मंगल, शुक्र, शनि और बृहस्पति सहित पांच बड़े ग्रह राहु-केतु की धुरी के बीच फंसे हुए हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक चंद्रमा के इस गोचर से यह घेरा टूटेगा और कई राशियों के लिए राहत भरे योग बनेंगे।
राहु-केतु की धुरी में फंसे ग्रहों का व्यापक असर
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जब कोई ग्रह राहु-केतु के इस घेरे में फंस जाता है तो उसका असर सिर्फ किसी एक व्यक्ति की कुंडली तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका दायरा पूरे देश तक फैल जाता है। ऐसी स्थिति में राजनीति, व्यापार, मौसम और सामाजिक घटनाक्रम तक में बदलाव देखने को मिलता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी प्रभाव परंपरागत ज्योतिषीय आकलन पर आधारित हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक उपलब्ध नहीं है।
ज्योतिषशास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है, जो कुंडली में हमेशा एक-दूसरे से ठीक 180 डिग्री की दूरी पर स्थित रहते हैं। जब कोई अन्य ग्रह इन दोनों के बीच की इसी धुरी में आ जाता है तो ज्योतिषीय गणना में उसे राहु-केतु के मायाजाल में फंसा हुआ माना जाता है, और यही वजह है कि इस बार एक साथ इतने सारे बड़े ग्रहों का इस घेरे में होना खास चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसा संयोग बार-बार नहीं बनता, इसलिए इसे ज्योतिषाचार्य असामान्य और ध्यान देने लायक अवधि मान रहे हैं।
जुलाई में क्यों बन रहे हैं इतने दुर्लभ ग्रह संयोग
इस बार जुलाई का महीना ज्योतिष जगत के लिए बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक साथ कई दुर्लभ ग्रह संयोग बन रहे हैं। 4 जुलाई से 18 जुलाई के बीच सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, यानी सातों प्रमुख ग्रह राहु और केतु के बीच की स्थिति में रहेंगे। इसी दौरान पांच बड़े ग्रह परिवर्तन भी एक साथ होने वाले हैं। इनमें देवगुरु बृहस्पति का अस्त होना, सूर्य का राशि परिवर्तन और शनि का वक्री होना प्रमुख माना जा रहा है। इतने सारे बड़े परिवर्तनों का एक ही पखवाड़े में होना ज्योतिष की दृष्टि से दुर्लभ संयोग है, इसीलिए ज्योतिषाचार्य इस अवधि को खास तौर पर अहम मान रहे हैं। इस पूरे पखवाड़े को लेकर ज्योतिष जगत में लगातार चर्चा हो रही है, क्योंकि सातों प्रमुख ग्रहों का एक साथ इस तरह की स्थिति में आना हर साल नहीं देखा जाता।
जुलाई की बड़ी ग्रह गतिविधियां एक नजर में
जुलाई में बुध पहले ही मिथुन राशि में गोचर कर चुके हैं। इसके अलावा देवगुरु बृहस्पति भी अस्त हो चुके हैं, जबकि सूर्य कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। लेकिन इस महीने का सबसे बड़ा बदलाव अभी बाकी है, वह है शनि का वक्री होना। शनि 27 जुलाई को वक्री होंगे, वहीं बुध 24 जुलाई को मार्गी हो जाएंगे। इस लिहाज से जुलाई का तीसरा और चौथा सप्ताह ज्योतिष की दृष्टि से बेहद अहम रहने वाला है, क्योंकि इसी दौरान ये सभी बड़े परिवर्तन एक के बाद एक सामने आएंगे। एक के बाद एक होने वाले इन बदलावों की वजह से ज्योतिषाचार्य पूरे महीने पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
आखिर कैसे बनता है राहु-केतु का यह घेरा
जब कोई ग्रह राहु-केतु के इस मायाजाल में फंस जाता है तो वह कमजोर पड़ जाता है और संबंधित राशियों को शुभ फल नहीं दे पाता। इसी वजह से कई राशियों को इस दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल सभी 12 राशियों का एक पूर्ण चक्र 360 डिग्री का होता है और इसका आधा चक्र यानी अर्धचक्र 180 डिग्री का बनता है, जिसमें कुल 6 राशियां आती हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार अगर सभी ग्रह इसी आधे चक्र में एक साथ आकर बैठ जाएं तो वे राहु-केतु के बीच फंस जाते हैं।
अभी की स्थिति देखें तो सूर्य कर्क राशि में हैं, मंगल वृषभ राशि में हैं, राहु कुंभ राशि में हैं, केतु सिंह राशि में हैं, शुक्र भी सिंह राशि में मौजूद हैं और शनि मीन राशि में स्थित हैं। इस तरह ये सभी ग्रह राहु-केतु के बीच के इसी घेरे में कैद हैं, और यही स्थिति इस समय ज्योतिषाचार्यों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है। इतने सारे ग्रहों का एक साथ इस अर्धचक्र में आ जाना ही इस पूरी घटना को खास और दुर्लभ बनाता है।
18 जुलाई को चंद्रमा के गोचर से क्या बदलेगा
18 जुलाई को जब चंद्रमा सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा, तब राहु-केतु का यह मायाजाल टूट जाएगा। चंद्रमा के कन्या राशि में आते ही यह ग्रह इस अर्धचक्र से बाहर निकल जाएगा, जिससे बाकी बचे ग्रहों पर बना दबाव भी धीरे-धीरे कम होने लगेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यही वह बिंदु है जहां से कई राशियों के लिए राहत की शुरुआत मानी जा रही है। चंद्रमा का यह गोचर इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह उस पूरी कड़ी को तोड़ने वाला पहला कदम है जिसमें बाकी बड़े ग्रह अभी भी बंधे हुए हैं।
किन राशियों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर खासतौर पर फायदेमंद माना जा रहा है। इस घेरे से बाहर आने पर कर्क राशि के जातकों का तनाव कम होगा और वे अपने काम के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। भावनात्मक रूप से भी इनके फैसले पहले से बेहतर और संतुलित रहेंगे, जिसका असर इनके निजी और पेशेवर, दोनों ही मोर्चों पर दिखाई देगा।
मिथुन राशि वालों के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा। राहु-केतु के भ्रम से बाहर निकलने के बाद इनके फैसले सही दिशा में जाएंगे। जीवन के कई मोर्चों पर चीजें संतुलित होंगी, जिसका सीधा फायदा करियर में मिलेगा। साथ ही निवेश से जुड़े फैसले भी पहले से बेहतर साबित होंगे, क्योंकि दिमाग पर छाया हुआ भ्रम अब धीरे-धीरे छंटने लगेगा।
मीन राशि वालों के लिए भी राहत भरी खबर है। अगर इस दौरान अनुशासन के साथ काम किया गया है तो राहु-केतु का यह मायाजाल टूटने के बाद मीन राशि के जातक खुद को हल्का और बेहतर महसूस करेंगे। कुल मिलाकर 18 जुलाई का यह चंद्र गोचर कर्क, मिथुन और मीन राशि के जातकों के लिए राहत और सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है।





















