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पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए बलिया के चंदन कुमार ने भुजे के ठेले से बनाई अपनी अलग पहचानसक्सेस स्टोरी
17 जुल॰ 2026, 11:25 am (104 दिन पहले)· 3

पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए बलिया के चंदन कुमार ने भुजे के ठेले से बनाई अपनी अलग पहचान

बलिया कलेक्ट्रेट के बाहर हर सुबह लगने वाले एक ठेले पर चंदन कुमार पिछले करीब 15 सालों से भुजा बेच रहे हैं, जो उनके पिता की तीन दशक पुरानी विरासत है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर रोज सुबह एक मामूली सा दिखने वाला ठेला सज जाता है। पहली नजर में यह किसी आम फेरी वाले का ठेला ही लगता है, लेकिन इसके पीछे तीन दशक की मेहनत और एक पूरे परिवार के संघर्ष की कहानी छिपी हुई है। इसी ठेले पर करीब 15 साल से चंदन कुमार भुजा बेच रहे हैं और उनके लिए यह सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि पिता की सौंपी अमानत और परिवार की पहचान है, जिसे उन्होंने आज तक बड़ी शिद्दत से संभाल रखा है।

पिता की उंगली थामकर 12 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर

चंदन कुमार बताते हैं कि वह महज 12 साल की उम्र में अपने पिता के साथ इसी ठेले पर भुजा बेचने लगे थे। स्कूल की पढ़ाई और ठेले पर पिता का हाथ बंटाना, दोनों साथ-साथ चलते रहे। इसी दौर में चंदन ने जिंदगी का वह सबक सीख लिया जिसका कोई विकल्प नहीं होता, यानी मेहनत। पिता ने उन्हें भुजा बनाने की बारीक तकनीकें सिखाईं और आज चंदन इसी हुनर को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। पिता अब उनके साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी सिखाई मेहनत, समझ और संस्कार हर सुबह इसी ठेले के जरिए फिर से जिंदा हो उठते हैं।

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गर्म नमक में भुनता भुजा और उसका देसी स्वाद

चंदन कई तरह के भुजे तैयार करते हैं और इनकी खासियत है इनका देसी और लाजवाब स्वाद। वह भुजे को गर्म नमक में भूनते हैं। भुना हुआ चना, मूंगफली, चूड़ा, मक्का, लाई, मटर, मक्का से बने चिप्स और भीगा हुआ चना, इन सबको मिलाकर तैयार भुजे पर ऊपर से नींबू, काला नमक और चटपटी चटनी डाली जाती है, जो इसके स्वाद को दोगुना कर देती है। यही स्वाद है जो ग्राहकों को बार-बार इस ठेले तक खींच लाता है और शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब यहां भीड़ न लगे। भुजा खाने वालों की यहां अक्सर लाइन लग जाती है।

अफसरों से लेकर वकीलों और फरियादियों तक के चहेते

चंदन के हाथ का भुजा सिर्फ आम राहगीरों तक सीमित नहीं है, इसका स्वाद जिला प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचता है। कलेक्ट्रेट परिसर में काम करने वाले कर्मचारी, वकील, व्यापारी, आने-जाने वाले राहगीर और अपने काम से यहां पहुंचने वाले फरियादी, सभी इनके नियमित ग्राहकों में शामिल हैं। बलिया में भुजे की बात हो और चंदन का नाम न लिया जाए, यह मुमकिन ही नहीं है।

महंगाई बढ़ी, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता से समझौता नहीं

चंदन कहते हैं कि वक्त गुजरता गया और महंगाई भी बढ़ती गई, लेकिन उन्होंने कभी गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया। वह करीब 25 रुपए में 100 ग्राम स्वादिष्ट भुजा तैयार कर ग्राहकों को परोसते हैं। उनके मुताबिक ग्राहक का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। जो एक बार इनके स्वाद का कायल हो जाता है, वह दोबारा जरूर लौटता है और यही भरोसा उनकी कमाई का सबसे मजबूत सहारा बन गया है।

एक छोटे ठेले से चल रहा है छह-सात लोगों का परिवार

इसी छोटे से ठेले की कमाई से चंदन आज अपने छह से सात सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। वह अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और परिवार के भविष्य को संवारने के लिए लगातार मेहनत में जुटे हैं। उनका मानना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, इंसान की नीयत और ईमानदारी ही उसकी असली सफलता की कुंजी है।

हार न मानने के जज्बे की मिसाल

चंदन की यह कहानी सिर्फ एक भुजा बेचने वाले शख्स तक सीमित नहीं है, यह उस जज्बे की कहानी है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता। यह उन युवाओं के लिए भी एक संदेश है जो छोटे कामों को छोटा समझते हैं या एक असफलता मिलते ही हिम्मत हार जाते हैं। अगर मेहनत सच्ची हो, ग्राहकों का भरोसा और इरादे मजबूत हों, तो एक साधारण सा ठेला भी सम्मान, पहचान और छोटी से बड़ी सफलता की कहानी में बदल सकता है।

सवाल-जवाब

चंदन कुमार बलिया कलेक्ट्रेट पर कब से भुजा बेच रहे हैं?
वह करीब 15 साल से इसी ठेले पर भुजा बेच रहे हैं।
चंदन ने भुजा बेचना कब शुरू किया था?
वह महज 12 साल की उम्र में अपने पिता के साथ ठेले पर भुजा बेचने लगे थे।
चंदन के भुजे में कौन-कौन सी चीजें मिलाई जाती हैं?
इसमें भुना चना, मूंगफली, चूड़ा, मक्का, लाई, मटर, मक्का वाले चिप्स और भीगा हुआ चना डाला जाता है, ऊपर से नींबू, काला नमक और चटपटी चटनी।
चंदन के भुजे की कीमत क्या है?
करीब 25 रुपए में 100 ग्राम स्वादिष्ट भुजा मिलता है।
चंदन के भुजे के नियमित ग्राहक कौन हैं?
कलेक्ट्रेट परिसर के कर्मचारी, वकील, व्यापारी, राहगीर और फरियादी उनके नियमित ग्राहक हैं।
चंदन इस ठेले की कमाई से कितने लोगों का परिवार चलाते हैं?
वह इसी छोटे ठेले की कमाई से छह से सात सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
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