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29 सितंबर पंचांग: तृतीया श्राद्ध और संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का संयोग, जानिए आज के शुभ चौघड़िया और राहुकाल का समयराशिफल
29 सित॰ 2026, 6:30 am (10 घंटे पहले)· 0

29 सितंबर पंचांग: तृतीया श्राद्ध और संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का संयोग, जानिए आज के शुभ चौघड़िया और राहुकाल का समय

29 सितंबर मंगलवार को तृतीया श्राद्ध और संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। दिन के शुभ कार्यों और पितृ तर्पण के लिए अभिजित, कुतुप और रौहिण मुहूर्त के साथ वर्जित समय का विवरण देखें।

भाद्रपद और आश्विन मास के संधिकाल में पितृ पक्ष के दौरान तिथियों और व्रतों का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। 29 सितंबर मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन है, क्योंकि इस दिन तृतीया तिथि का श्राद्ध कर्म संपन्न किया जा रहा है और साथ ही विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की उपासना का पर्व संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत भी रखा जा रहा है। पितरों की आत्मिक शांति के लिए किया जाने वाला तर्पण और संकटों के निवारण हेतु किया जाने वाला गणेश पूजन दोनों ही इस दिन के प्रमुख आध्यात्मिक अनुष्ठान हैं। किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा अनुष्ठान या यात्रा की शुरुआत करने से पहले दिन के शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भलीभांति विचार करना ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आवश्यक माना जाता है।

पितृ तर्पण और अपराह्न काल के विशेष मुहूर्त

पितृ पक्ष के अंतर्गत तृतीया तिथि पर दिवंगत पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और तर्पण करने का विधान है। शास्त्रों में श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर के समय को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन कुतुप मुहूर्त दोपहर 01:17 बजे से दोपहर 02:04 बजे तक रहेगा। इसके तुरंत बाद रौहिण मुहूर्त प्रारंभ होगा, जिसकी अवधि दोपहर 02:04 बजे से दोपहर 02:51 बजे तक रहेगी। इसके अलावा श्राद्ध कार्यों के लिए मान्य अपराह्न काल दोपहर 02:51 बजे से शाम 05:13 बजे तक व्याप्त रहेगा। इन निर्धारित समयावधियों में पितरों के नाम से दान पुण्य और तर्पण करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

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दिन के मुख्य शुभ मुहूर्त और पूजा समय

दैनिक पूजा, मंत्र साधना, नए उपक्रमों की योजना और शुभ कार्यों के संपादन के लिए पंचांग में विशिष्ट मुहूर्तों का निर्धारण किया गया है। प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:23 बजे से सुबह 05:12 बजे तक रहेगा, जो ध्यान और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम समय है। प्रातः संध्या का समय सुबह 05:01 बजे से सुबह 06:13 बजे तक निर्धारित है। दिन का सबसे प्रमुख अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:17 बजे से दोपहर 02:04 बजे तक रहेगा, जिसमें अधिकांश मांगलिक कार्य निर्विवाद रूप से संपन्न किए जा सकते हैं। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त रात 07:34 बजे से रात 07:58 बजे तक और सायाह्न सन्ध्या रात 07:34 बजे से रात 08:47 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात रात्रि कालीन साधना और मांगलिक संकल्पों के लिए अमृत काल रात 11:36 बजे से अगले दिन देर रात 01:06 बजे तक प्रभावी रहेगा।

संकष्टी चतुर्थी और चंद्र दर्शन की गणना

संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखकर संध्या काल में भगवान गणेश की विधिवत अर्चना करते हैं। इस व्रत का पारण रात्रि में चंद्रोदय के दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद ही किया जाता है। पंचांग की खगोलीय गणना के अनुसार, इस दिन का चंद्रास्त अगले दिन 30 सितंबर को सुबह 08:28 बजे होगा। व्रती महिलाएं और पुरुष अपने स्थानीय चंद्रोदय के समय भगवान चंद्रदेव की पूजा अर्चना कर व्रत को पूर्ण करते हैं, जिससे जीवन के संकटों और विघ्नों का शमन होता है।

अशुभ समय और वर्जित अवधियां

ज्योतिष गणना के अनुसार प्रत्येक दिन कुछ ऐसी अवधियां होती हैं जिनमें नवीन कार्य, अनुबंध या शुभ कार्यों का आरंभ करना वर्जित माना जाता है। 29 सितंबर को राहुकाल दोपहर 03:00 बजे से शाम 04:30 बजे तक रहेगा, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त यमगण्ड सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 01:40 बजे से दोपहर 03:09 बजे तक रहेगा। दिन में दुर्मुहूर्त सुबह 10:08 बजे से सुबह 10:56 बजे तक रहेगा, जबकि वर्ज्य काल दोपहर 02:34 बजे से शाम 04:04 बजे तक मान्य रहेगा। विशेष रूप से भद्रा का प्रभाव सुबह 06:13 बजे से शाम 05:09 बजे तक रहेगा, जिस दौरान कोई भी मांगलिक या स्थायी कार्य करने से परहेज किया जाता है।

दिशाशूल का विचार और निवारण

मंगलवार के दिन यात्रा के संदर्भ में दिशाशूल उत्तर दिशा में रहता है। परंपरागत मान्यता है कि दिशाशूल की दिशा में यात्रा करने से कार्यों में अप्रत्याशित बाधाएं, विलंब या असफलता का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी अपरिहार्य कारणवश उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान करना अनिवार्य हो, तो ज्योतिष शास्त्र में वर्णित उपायों को अपनाकर यात्रा की जा सकती है, जिससे मार्ग की नकारात्मक ऊर्जा और अवरोधों को न्यूनतम किया जा सके।

सवाल-जवाब

29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध के लिए सबसे शुभ मुहूर्त कौन से हैं?
तृतीया श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त दोपहर 01:17 बजे से 02:04 बजे तक, रौहिण मुहूर्त दोपहर 02:04 बजे से 02:51 बजे तक और अपराह्न काल दोपहर 02:51 बजे से 05:13 बजे तक रहेगा।
दिन का सबसे मुख्य अभिजित मुहूर्त किस समय रहेगा?
मांगलिक और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:17 बजे से लेकर दोपहर 02:04 बजे तक प्रभावी रहेगा।
29 सितंबर को राहुकाल का समय क्या है?
इस दिन राहुकाल दोपहर 03:00 बजे से प्रारंभ होकर शाम 04:30 बजे तक रहेगा, जिसमें नए काम शुरू करने की मनाही होती है।
क्या इस दिन भद्रा का साया रहेगा?
हां, इस दिन भद्रा सुबह 06:13 बजे से शुरू होकर शाम 05:09 बजे तक प्रभावी रहेगी।
मंगलवार को किस दिशा में दिशाशूल माना गया है?
इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहता है, इसलिए उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
चंद्रास्त का समय क्या निर्धारित है?
पंचांग के अनुसार चंद्रास्त अगले दिन यानी 30 सितंबर को सुबह 08:28 बजे होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·8 घंटे पहले

पितृपक्ष और गणेश चतुर्थी का ऐसा संयोग फिल्मों के क्लाइमेक्स जैसा है, जहाँ एक तरफ भावुकता है तो दूसरी तरफ उत्सव।

Aisha Khan@aisha-khan·8 घंटे पहले

संकष्टी चतुर्थी और तृतीया श्राद्ध का एक ही दिन पड़ना सचमुच बड़ा संयोग है। बप्पा के व्रत के साथ पितरों का तर्पण, दिन वाकई काफ़ी व्यस्त रहने वाला है।

Michael Anderson@michael-anderson·8 घंटे पहले

आयशा जी, आपकी बात सही है। पर क्या गणेश चतुर्थी और श्राद्ध का एक ही दिन पड़ना कोई अशुभ संकेत माना जाता है या फिर ये सिर्फ संयोग है?

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·9 घंटे पहले

एक ही दिन श्राद्ध और गणेश चतुर्थी दोनों पड़ने से लोग पूजा के समय को लेकर उलझन में न पड़ जाएं? क्या इसके लिए कोई अलग नियम है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 घंटे पहले

राजेश जी, उलझन कैसी? दोनों काम अलग-अलग पहर में होने हैं, तो समय टकराने का तो सवाल ही नहीं उठता।

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