वैदिक ज्योतिष में ज्ञान, भाग्य, धर्म और संतान के मुख्य कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति 8 अक्टूबर 2026 को नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। इस दिन गुरु अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर गुरु का यह नक्षत्र गोचर सभी राशियों के लिए एक समान फल देने वाला नहीं रहेगा। विशेष रूप से तीन राशियों के जातकों के लिए यह बदलाव कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस दौरान धन से जुड़ी समस्याएं उभर सकती हैं और आर्थिक लेन-देन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होगी। वित्तीय जोखिम लेने या नए निवेश करने से इस अवधि में परहेज करने की सलाह दी जाती है।
मिथुन राशि के करियर और कारोबार में बाधाएं
गुरु का नक्षत्र परिवर्तन मिथुन राशि के जातकों के पेशेवर जीवन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए कार्यस्थल का माहौल थोड़ा तनावपूर्ण रह सकता है, जहां सहकर्मियों के साथ मतभेद या बहसबाजी की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा लंबे समय से प्रतीक्षित पदोन्नति या प्रमोशन में भी रुकावटें आ सकती हैं। व्यापारियों और कारोबारियों के लिए भी यह चरण बहुत अनुकूल नहीं दिखाई दे रहा है। किसी भी नए व्यावसायिक उपक्रम की शुरुआत करने अथवा बड़ा आर्थिक निवेश करने से बचना चाहिए। इस समय दिया गया उधार फंसने की पूरी आशंका बनी रहेगी, इसलिए किसी को भी कर्ज देने से पहले भलीभांति सोच-विचार कर लें।
सिंह राशि के जातकों को बजट और रिश्तों का रखना होगा ध्यान
सिंह राशि के लोगों के लिए गुरु का यह गोचर मानसिक अशांति और वित्तीय उतार-चढ़ाव लेकर आ सकता है। अप्रत्याशित और अचानक आने वाले खर्चों के कारण मासिक बजट प्रभावित हो सकता है, इसलिए खर्चों पर कड़ा नियंत्रण रखना जरूरी होगा। करियर के मोर्चे पर भी समय थोड़ा संवेदनशील रहेगा और कार्यक्षेत्र में छुपे हुए विरोधियों से पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। शेयर बाजार अथवा किसी भी प्रकार के सट्टेबाजी वाले जोखिम भरे निवेश से पूरी दूरी बनाए रखना ही हितकर रहेगा। इसके साथ ही पारिवारिक जीवन में भी तनाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद या अनबन की स्थिति पैदा हो सकती है।
धनु राशि पर बढ़ेगा पारिवारिक खर्च और स्वास्थ्य का बोझ
धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का नक्षत्र परिवर्तन कई तरह के दबाव उत्पन्न कर सकता है। घर-परिवार से जुड़े अनपेक्षित खर्चों में बढ़ोतरी होने से वित्तीय संकट की स्थिति बन सकती है। करियर के क्षेत्र में भी कई प्रकार की जटिल चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। व्यापारिक मामलों में रुकावटें आ सकती हैं और व्यावसायिक सौदों में धन हानि का खतरा रहेगा। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह समय अनुकूल नहीं माना जा रहा है, इसलिए अपनी शारीरिक सेहत और खान-पान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होगा।
गुरु के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के उपाय
गुरु ग्रह से मिलने वाले अशुभ प्रभावों को शांत करने और राहत पाने के लिए कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय किए जा सकते हैं।
- गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना करें और वृक्ष की जड़ में नियमित रूप से जल अर्पित करें।
- प्रतिदिन अथवा प्रत्येक गुरुवार को नियमपूर्वक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- गुरुवार को जरूरतमंद व्यक्तियों को चने की दाल, हल्दी अथवा पीले फल दान स्वरूप भेंट करें।
- गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करने का प्रयास करें।
- गुरु के शुभ प्रभाव के लिए गुरुवार के दिन 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' या 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का निष्ठापूर्वक जाप करें।



















