अलवर जिले के सरिस्का वन क्षेत्र से सटे इंदोक गांव में एक रिहायशी मकान के भीतर अचानक उस समय अफरातफरी मच गई, जब परिजनों ने अपने सोने के बिस्तर यानी चारपाई पर एक अत्यधिक विषैले सांप को चढ़ते हुए देखा। यह जीव भारत के सबसे जहरीले सर्पों में शुमार कॉमन करैत था। चारपाई पर रेंगते इस खतरनाक जीव पर जैसे ही घर के सदस्यों की नजर पड़ी, पूरे परिवार के होश उड़ गए और घर में दहशत का माहौल बन गया। खतरे की गंभीरता को समझते हुए परिजनों ने कोई लापरवाही नहीं बरती और तुरंत वन्यजीव रेस्क्यू टीम से संपर्क साधा।
बिस्तर पर चढ़ते ही परिजनों की पड़ी नजर
इंदोक गांव में स्थित इस मकान में उस वक्त परिवार के कई लोग मौजूद थे। रोजमर्रा की तरह कमरे में रखी चारपाई के पास जब परिजन पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि एक काला चमकदार सांप आहिस्ता-आहिस्ता पायों के सहारे ऊपर चढ़ रहा था। सांप के बेहद नजदीक होने के बावजूद परिजनों ने सूझबूझ दिखाई और उसे छेड़ने अथवा भगाने का खुद से कोई जोखिम नहीं उठाया। उन्होंने फौरन मामले की जानकारी विशेषज्ञ रेस्क्यू दल को दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम बिना किसी देरी के मौके पर पहुंची और चारों तरफ से घेराबंदी करते हुए बेहद सावधानी से सांप को अपने नियंत्रण में ले लिया।
सरिस्का के सुरक्षित जंगल में किया गया मुक्त
सांप को सफलतापूर्वक पकड़ने के बाद रेस्क्यू दल ने उसे एक सुरक्षित डिब्बे में बंद किया। इसके पश्चात टीम ने किसी भी अनहोनी की आशंका को समाप्त करते हुए कॉमन करैत को मानव आबादी से काफी दूर सरिस्का के घने जंगली इलाके में ले जाकर प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। सुरक्षित रेस्क्यू होने से एक ओर जहां ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने चैन की सांस ली, वहीं दूसरी ओर इस दुर्लभ और खतरनाक वन्यजीव का जीवन भी सुरक्षित बच गया।
खामोश शिकारी की तरह रात में निकलता है बाहर
कॉमन करैत को देश के सबसे खतरनाक और घातक विषधरों में गिना जाता है। इस प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद शांत स्वभाव है, क्योंकि यह बिना किसी आहट या हलचल के बिल्कुल खामोशी से इधर-उधर विचरण करता है। इसी शांत प्रवृत्ति के चलते आसपास मौजूद इंसानों को इसके आने-जाने की भनक तक नहीं लग पाती। कॉमन करैत मुख्य रूप से रात्रिचर जीव है, जो दिन के उजाले में धूप या इंसानी नजरों से बचकर बिलों, पत्थरों की दरारों या अंधेरी सुरक्षित जगहों में छिपा रहता है। जैसे ही रात ढलती है, यह भोजन और छोटे जीवों के शिकार की तलाश में बाहर निकलता है।
शारीरिक बनावट और पहचान के तरीके
इस सांप के शारीरिक लक्षणों की बात करें तो इसका शरीर चमकदार गहरा काला या नीले-काले रंग का होता है, जिस पर पतली सफेद धारियों के स्पष्ट जोड़े बने होते हैं। हालांकि रात के सन्नाटे या कम रोशनी में इन धारियों को साफ-साफ पहचानना काफी कठिन हो जाता है। स्वभाव से यह सांप काफी शर्मीला माना जाता है और सामान्य परिस्थितियों में इंसानों से दूरी बनाकर ही रहता है, लेकिन धोखे से दब जाने या छुए जाने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
ग्रामीण इलाकों में सोने से पहले जरूरी सतर्कता
वन क्षेत्रों और ग्रामीण बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को रात के वक्त विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। चूंकि करैत रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है, इसलिए सोने से पहले अपने बिस्तरों, चारपाई, फर्श और कमरों के कोनों की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए। यदि घर में या आसपास ऐसा कोई जीव दिखाई दे, तो उसे मारने अथवा खुद पकड़ने की गलती कतई न करें, बल्कि तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचित करें।





















