अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ किसी व्यावहारिक हुनर में निपुणता हासिल करना युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने की मजबूत राह खोलता है। सौंदर्य संवारने की कला, आधुनिक ग्रूमिंग और नेल्स को सजाने का काम आज केवल बड़े प्रतिष्ठानों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। बुनियादी साजो-सामान, एक आईना और सीमित जगह के सहारे कोई भी व्यक्ति अपने निजी आवास से ही इस पेशे में पहला कदम रख सकता है। हरियाणा के अंबाला शहर में बीते तेरह वर्षों से पेशेवर सेवाएं दे रहे विशेषज्ञ मिजाज खान ने अब तक सौ से ज्यादा प्रशिक्षुओं को इस विधा में पारंगत बनाया है।
नाई के काम की धारणा से पेशेवर मुकाम तक
अंबाला के बाशिंदे मिजाज खान ने तकरीबन 13 साल पहले ग्रूमिंग और सौंदर्य उद्योग की राह चुनी थी। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रम पूरे किए, कई संस्थानों से विधिवत प्रमाणपत्र बटोरे और बाल संवारने से लेकर चेहरे के श्रृंगार व नेल आर्ट में महारत हासिल की। उनका हमेशा से इरादा था कि वह अपनी स्वतंत्र पहचान वाला सैलून स्थापित करें। इस यात्रा के दौरान उनके पिता का यह नजरिया उनके लिए हमेशा मार्गदर्शक रहा कि काम का दायरा चाहे जो भी हो, उसे बड़े स्तर और गरिमा के साथ अंजाम दिया जाना चाहिए।
शुरुआती दौर में जब उन्होंने इस पेशे को अपनाया, तो कई लोग इसे महज हजामत बनाने का काम मानकर हतोत्साहित करते थे। इसके बावजूद उन्होंने इसे अपना पूर्णकालिक पेशा बनाया और आज वह खुद सेवाएं देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को प्रशिक्षित भी कर रहे हैं। उच्च शिक्षा हासिल कर चुके अनेक युवक-युवतियां भी इस विधा को सीखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर संवार रहे हैं और दूसरे मुल्कों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कम वक्त में सीखने योग्य कौशल: नेल डिजाइनिंग
सौंदर्य तकनीकों में नेल आर्ट एक ऐसा वर्ग है जिसकी मांग में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। मिजाज खान के अनुसार इस विशिष्ट कला का बुनियादी पाठ्यक्रम पंद्रह से बीस दिन के भीतर आसानी से सीखा जा सकता है। प्रशिक्षण पूरा करने के उपरांत विशेष रूप से छात्राएं या महिलाएं घर से ही इसका छोटा सेटअप लगा सकती हैं अथवा इच्छुक लोगों को सिखाने के लिए कक्षाएं आयोजित कर सकती हैं।
इस विधा में शुरुआत करते हुए दैनिक आधार पर 1,000 से 1,500 रुपये तक जुटाने का लक्ष्य साधा जा सकता है। हालांकि यह आंकड़ा इस बात पर निर्भर करता है कि कारीगरी का स्तर कितना बेहतर है और ग्राहकों की संख्या कितनी जुट पाती है।
घरेलू सेटअप और शुरुआती बजट
घरेलू स्तर पर पार्लर की शुरुआत करना महिलाओं के लिए वित्तीय स्वतंत्रता का बेहतरीन माध्यम बन सकता है। इसके लिए लगभग 50 हजार रुपये की प्राथमिक पूंजी से जरूरी उपकरण व सौंदर्य उत्पाद जुटाए जा सकते हैं। इस व्यवस्था के जरिए घर से कार्य करते हुए हर माह 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित की जा सकती है।
यदि कोई व्यक्ति स्थानीय बाजार में वेतनभोगी के रूप में शुरुआत करना चाहता है, तो अंबाला के परिवेश में आरंभिक पगार करीब 15 हजार रुपये मासिक के आसपास मिलती है, जिसमें कार्यकुशलता बढ़ने के साथ निरंतर इजाफा होता है। शादियों के आगामी दौर में सलीके से काम करने वाले कलाकारों की मांग में और उछाल आने की पूरी संभावना रहती है।
वैवाहिक आयोजनों में मेकअप से आमदनी के अवसर
चार से छह माह की अवधि वाला समग्र मेकअप पाठ्यक्रम करने के उपरांत कोई भी नवोदित कलाकार एक चेहरे के श्रृंगार के लिए 5 से 10 हजार रुपये तक का मेहनताना ले सकता है। जब बात दुल्हन के खास श्रृंगार की आती है, तो अनुभव और फिनिशिंग के आधार पर यह शुल्क 5 हजार रुपये से शुरू होकर डेढ़ लाख रुपये तक के आंकड़े को छू सकता है।
विवाह समारोह वाले परिवारों में केवल वधू का श्रृंगार ही आमदनी का साधन नहीं बनता, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य भी तैयार होते हैं। अन्य पारिवारिक सदस्यों के सामान्य श्रृंगार के लिए अमूमन 1,500 रुपये प्रति व्यक्ति तक लिए जाते हैं। यदि एक ही आयोजन में दस से पंद्रह सदस्य सेवाएं लेते हैं, तो कलाकार की एकल दिवस की कमाई काफी ऊंची पहुंच जाती है।
सोलह वर्ष की आयु पूरी करने के बाद किशोर इस विधा का बुनियादी अभ्यास शुरू कर सकते हैं। सामान्य स्कूली या कॉलेज की पढ़ाई जारी रखते हुए हर दिन दो से तीन घंटे का समय निकालकर छह से सात महीने में केश सज्जा और चेहरे के मेकअप के बुनियादी गुर सीखे जा सकते हैं।
विदेशी बाजारों में अवसर और भविष्य की राह
इस हुनर की पहुंच केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है। मिजाज खान के मार्गदर्शन में तैयार हुए युवा आज कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। वहां प्रशिक्षित युवाओं को 1.20 लाख रुपये तक का मासिक पगार पैकेज भी हासिल हो रहा है।
इस क्षेत्र में करियर केवल नौकरी तक सिमटा हुआ नहीं है। पहले किसी स्थापित केंद्र में अनुभव बटोरकर बाद में स्वयं का सैलून, नेल स्टूडियो, घर पर आधारित पार्लर या स्वतंत्र सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। सतत अभ्यास और ग्राहकों के भरोसे के बल पर यह साधारण सी दिखने वाली कला एक विस्तृत उद्यम में तब्दील हो सकती है।





















