सनातन धर्म में कजरी तीज के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हर साल रक्षा बंधन का त्योहार बीतने के ठीक तीन दिन बाद इस व्रत को रखने का विधान है। इस पावन व्रत को मुख्य रूप से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और सुहाग की सलामती के लिए रखा जाता है। कजरी तीज को बड़ी तीज और सातुड़ी तीज के नामों से भी जाना जाता है। इस विशेष दिन पर देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधिवत उपासना की जाती है। पंचांग के अनुसार कजरी तीज का यह पर्व हर साल भाद्रपद महीने में आता है। खास बात यह है कि इस बार कजरी तीज के पावन अवसर पर हेरंब संकष्टी चतुर्थी का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की एक साथ पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख, सौभाग्य औरार समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि इस साल कजरी तीज किस दिन मनाई जाएगी और इसका सही मुहूर्त क्या है।
कजरी तीज की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को रात 9 बजकर 36 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 31 अगस्त को रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि की परंपरा और मान्यता के आधार पर कजरी तीज का व्रत और पूजन मुख्य रूप से 31 अगस्त के दिन ही किया जाएगा। इस पावन पर्व को कजली तीज के नाम से भी पुकारा जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस खास दिन पर रेवती नक्षत्र रात 3 बजकर 24 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि ग्रहों की स्थिति के अनुसार चंद्रमा मीन राशि में विराजमान रहेंगे।
कजरी तीज पूजा की सरल विधि
कजरी तीज के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को विधि-विधान से पूजा संपन्न करनी चाहिए। सबसे पहले भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या मूर्ति की स्थापना करें। इसके बाद सभी देवी-देवताओं का विधिपूर्वक जलाभिषेक करें। पूजा के दौरान भगवान शिव को ताजे पुष्प और फल अर्पित करें तथा उन्हें सफेद चंदन लगाएं। इसके साथ ही माता पार्वती को लाल रंग के पुष्प, सुहाग का संपूर्ण श्रृंगार सामान, फल और सिंदूर अर्पित करें। व्रत और पूजन के दौरान मन में पूर्ण श्रद्धा का भाव रखें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की आरती गाएं।
भगवान शिव और माता पार्वती की आरती
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।



















