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कानपुर से कैलाश मानसरोवर गए तीन लोग लापता, नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ के बीच टूटा संपर्कउत्तर प्रदेश
29 अग॰ 2026, 11:42 pm (1 घंटे पहले)· 3

कानपुर से कैलाश मानसरोवर गए तीन लोग लापता, नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ के बीच टूटा संपर्क

कानपुर का एक परिवार कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल और तिब्बत सीमा के पास लापता हो गया है। प्राकृतिक आपदा के बीच पिछले चार दिनों से कोई संपर्क न होने पर परिजनों ने प्रशासन से गुहार लगाई है।

कानपुर से नेपाल और तिब्बत की सीमा की तरफ कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर निकले एक ही परिवार के तीन सदस्य रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। इस क्षेत्र में भीषण बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बीच इन यात्रियों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। गत 25 अगस्त की शाम से इन तीनों का कोई अतापता नहीं चल पाया है। घटना को बीते हुए करीब चार दिन से अधिक का वक्त बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद घर के लोगों को उनकी कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं मिल सकी है, जिसके चलते कानपुर में रह रहे उनके रिश्तेदारों और परिवारजनों के भीतर गहरी चिंता और भय का माहौल बना हुआ है।

कौन-कौन लोग हैं लापता

लापता होने वाले यात्रियों में अमेरिका में निवास करने वाले पंकज मिश्रा, उनकी पत्नी की बहन रागनी मिश्रा और परिवार की अन्य सदस्य पूनम मिश्रा शामिल हैं। ये तीनों लोग एक साथ कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर नेपाल गए हुए थे। नेपाल और तिब्बत की सीमा के बेहद करीब पहुंचने के बाद इनका बाहरी दुनिया से संपर्क अचानक टूट गया। इस गंभीर स्थिति के सामने आने के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपनों के सकुशल घर लौटने की आस लगाए बैठे हैं। पीड़ित परिवार ने देश के प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित महकमों से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी पुरजोर मांग है कि सीमावर्ती और आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव एजेंसियों को सक्रिय किया जाए ताकि जल्द से जल्द इन तीनों का पता लगाया जा सके।

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इस तरह शुरू हुई थी यात्रा

कानपुर के पीरोड इलाके के रहने वाले प्रवीन द्विवेदी ने मीडिया को पूरी जानकारी देते हुए बताया कि उनके जीजा पंकज मिश्रा, बड़ी बहन रागनी मिश्रा और पूनम मिश्रा ने इस यात्रा की योजना बनाई थी। परिवार के मुताबिक इस पूरी यात्रा का सिलसिला गत 18 अगस्त से शुरू हुआ था। तय कार्यक्रम के अनुसार तीनों लोग 19 अगस्त को देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे और उसके अगले ही दिन यानी 20 अगस्त को नेपाल की राजधानी काठमांडू जा पहुंचे। नेपाल पहुंचने पर उन्होंने सबसे पहले ऐतिहासिक पशुपतिनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन किए और आशीर्वाद लिया, जिसके बाद उन्होंने आगे की कैलाश मानसरोवर यात्रा का कठिन मार्ग शुरू किया। परिजनों के अनुसार इस पूरी यात्रा के दौरान उन्हें लगभग तीन दिनों तक पैदल चलना था और करीब 52 किलोमीटर का लंबा पैदल सफर तय करना था।

आखिरी बार कब हुई थी बात

प्रवीन द्विवेदी ने आगे बताया कि 25 अगस्त की शाम को करीब 4:30 बजे उनकी इन तीनों यात्रियों से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हुई थी। उस वीडियो कॉल के दौरान उन लोगों ने बताया था कि वे वर्तमान में तिब्बत बॉर्डर को पार कर रहे हैं। उस वक्त तक परिवार के किसी भी सदस्य को किसी भी तरह की अनहोनी या खतरे का कोई अंदेशा नहीं था। हालांकि इस बातचीत के महज कुछ ही घंटों बाद हालात पूरी तरह उलट गए। उसी रात करीब 8 बजे जब परिवार की तरफ से दोबारा उनके नंबर पर संपर्क साधने की कोशिश की गई तो फोन की घंटी नहीं बजी और कॉल कनेक्ट नहीं हो सकी। इसके बाद लगातार फोन मिलाने का सिलसिला जारी रहा और अन्य संभावित माध्यमों से भी संपर्क साधने के प्रयास किए गए, लेकिन कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। उस आखिरी वीडियो कॉल के बाद से परिवार के किसी भी सदस्य को अपनों की आवाज सुनने को नहीं मिली है।

आपदा के बाद बढ़ी परिजनों की धड़कनें

जिस इलाके से होकर यह दल गुजर रहा था, वहां से बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की खबरें सामने आने के बाद से कानपुर में बैठे परिजनों की बेचैनी कई गुना बढ़ चुकी है। नेपाल और उससे सटे सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई महत्वपूर्ण रास्तों पर आवागमन और टेलीकॉम संपर्क पूरी तरह ठप होने की बात सामने आ रही है। परिजनों का कहना है कि जब से संपर्क टूटा है, तब से उनका हर एक गुजरता दिन बेहद भारी और तनावपूर्ण साबित हो रहा है। मोबाइल फोन की स्क्रीन पर लगातार नजरें गड़ाई रहती हैं कि शायद किसी तरह दूसरी तरफ से कोई खबर या आवाज मिल जाए, लेकिन चार दिन बीत जाने के बावजूद सन्नाटा पसरा हुआ है।

प्रशासन से लगाई गई मदद की गुहार

परिजनों ने संबंधित सरकारी अधिकारियों और उच्च स्तर पर संपर्क कर सीमावर्ती क्षेत्रों में फंसे तीनों भारतीय नागरिकों की तलाश जल्द से जल्द शुरू करने का अनुरोध किया है। परिवार के लोगों के मुताबिक प्रशासनिक तंत्र की तरफ से उन्हें केवल यह आश्वासन दिया गया है कि जैसे ही इस संबंध में कोई भी आधिकारिक सूचना हाथ लगेगी, उन्हें तुरंत सूचित कर दिया जाएगा। इस बीच तमाम संबन्धित एजेंसियों की सहायता से सीमावर्ती इलाकों में बातचीत के रास्ते खोजने और इन यात्रियों का सुराग लगाने की जुगत जारी है। चिंतित परिवार ने सरकार से त्वरित और ठोस कदम उठाने की गुहार लगाई है।

सवाल-जवाब

कानपुर से कितने लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे?
कानपुर से एक ही परिवार के तीन सदस्य कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
लापता हुए सदस्यों के नाम क्या हैं?
लापता लोगों में पंकज मिश्रा, रागनी मिश्रा और पूनम मिश्रा शामिल हैं।
परिजनों से आखिरी बार संपर्क कब हुआ था?
परिजनों से आखिरी बार 25 अगस्त की शाम करीब 4:30 बजे वीडियो कॉल पर बात हुई थी।
यात्री किस सीमा को पार कर रहे थे जब संपर्क टूटा?
आखिरी बातचीत के दौरान यात्रियों ने बताया था कि वे तिब्बत बॉर्डर पार कर रहे हैं।
यात्रा की शुरुआत कब हुई थी?
यात्रा का सिलसिला 18 अगस्त से शुरू हुआ था और वे 20 अगस्त को काठमांडू पहुंचे थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·6 मिनट पहले

कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ और भूस्खलन के बीच कानपुर के एक परिवार के लापता होने की यह घटना सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्र की वास्तविकताओं को उजागर करती है। आपदा प्रभावित पर्वतीय इलाकों में संचार व्यवस्था का ठप होना और नेटवर्क का अभाव राहत एवं बचाव कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनता है। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों की खोज के लिए जिला प्रशासन और राज्य सरकार को तुरंत विदेश मंत्रालय तथा भारतीय दूतावास के माध्यम से कूटनीतिक और प्रशासनिक समन्वय तेज करना चाहिए ताकि सीमा पार चल रहे राहत अभियानों से सटीक जानकारी मिल सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 मिनट पहले

इस मामले में प्रशासनिक समन्वय के साथ-साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत त्वरित क्रॉस-बॉर्डर ट्रेसिंग प्रोटोकॉल एक्टिवेट करना अनिवार्य हो गया है। चूंकि अंतिम संपर्क तिब्बत बॉर्डर पार करते समय हुआ था, इसलिए भारतीय मिशन के जरिए स्थानीय चीनी और नेपाली अधिकारियों से संपर्क साधकर रेस्क्यू दलों की आवाजाही को गति देनी होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में सैटेलाइट फोन ट्रैकिंग और स्थानीय टूर ऑपरेटर्स के जरिए इनपुट जुटाना अब सबसे प्रभावी कदम होगा ताकि फंसे हुए नागरिकों का वास्तविक ठिकाना जल्द से जल्द पता चल सके।

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