वर्ष का अंतिम चरण यानी 31 दिसंबर तक का समय वृषभ राशि के जातकों के लिए अपनी प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करने का रहने वाला है। पेशेवर मोर्चे पर काम का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन यह दौर आपको अपनी जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने के कई सुनहरे अवसर भी प्रदान करेगा। यदि आपका कोई पुराना या लंबे समय से अटका हुआ कार्य रुका हुआ है, तो उसे पूरा करने के लिए यह समय विशेष प्रयास करने का है। जो जातक व्यापार के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें बाजार के मौजूदा हालात और अपने खर्चों का पूरा हिसाब-किताब रखने के बाद ही किसी नई योजना की शुरुआत करनी चाहिए।
इस दौरान आर्थिक मामलों में पूरी तरह संतुलन बनाकर चलना बेहद जरूरी रहेगा। आपको अपनी आमदनी के साथ-साथ खर्चों पर भी पैनी नजर रखनी होगी। किसी दूसरे के कहने पर बिना सोचे-समझे निवेश करने के बजाय अपनी खुद की पूरी जानकारी जुटाना फायदेमंद रहेगा। पारिवारिक जीवन में किसी विषय को लेकर चर्चा का दौर चल सकता है। वहीं दूसरी ओर, प्रेम संबंधों के मामले में अपने साथी के साथ कुछ वक्त बिताना और अपनी बात खुलकर सामने रखना आपके आपसी रिश्तों को और अधिक मजबूत व बेहतर बना सकता है.
तुला राशि के जातकों के लिए 31 दिसंबर तक का यह पूरा कालखंड अपने कार्यस्थल के कामकाज और निजी जीवन के बीच एक बेहतरीन तालमेल बैठाने का संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों के लिए दफ्तर में जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को अपने द्वारा लिए गए कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर दोबारा से विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इस अवधि में जो कामकाज पहले से ही सुचारू रूप से चल रहे हैं, उन्हें समय पर पूरा करने पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना समझदारी होगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से अपने तमाम खर्चों का सटीक हिसाब रखना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी भी प्रकार की बड़ी खरीदारी करने या फिर नया निवेश करने से पहले अपनी वास्तविक जरूरत और अपने निर्धारित बजट को अच्छी तरह समझ लेना उचित रहेगा। परिवार और प्रेम जीवन में आपसी संवाद का महत्व पूरी तरह से बना रहेगा। यदि कभी किसी बात पर आपसी असहमति की स्थिति उत्पन्न होती भी है, तो उस बात को तूल देकर बढ़ाने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से बैठकर बातचीत के जरिए उसका समाधान निकालना बेहतर रहेगा.
आने वाले इस पूरे समय यानी अक्टूबर से लेकर दिसंबर के बीच के महीनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और इसके साथ ही राहु-केतु की स्थिति का ज्योतिषीय गणनाओं के अंतर्गत विशेष रूप से आकलन किया जाएगा। अलग-अलग ग्रहों के एक राशि से दूसरी राशि में होने वाले राशि परिवर्तन और उनके नक्षत्र बदलाव के मूवमेंट के आधार पर ही तमाम राशियों के लिए भविष्य के फल तय किए जाते हैं और उनकी सटीक गणना की जाती है.
वैदिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान और विस्तार का कारक माना गया है, जबकि न्याय के देवता शनि को कर्म का प्रतीक कहा जाता है। इसके अलावा ऊर्जा के लिए मंगल, व्यापार और बुद्धि के लिए बुध तथा प्रेम, आकर्षण व तमाम सुख-सुविधाओं के लिए शुक्र ग्रह को मुख्य रूप से जोड़ा गया है। इन तमाम प्रमुख ग्रहों की वर्तमान स्थिति और चाल के आधार पर ही मानव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में तमाम तरह के ज्योतिषीय अनुमान और भविष्यवाणियां तय की जाती हैं.


















