मानसून की पहली फुहारें देश भर के किसानों के चेहरों पर मुस्कान ले आती हैं, क्योंकि खेती-किसानी की गतिविधियों में तेजी आ जाती है। हालांकि, इसी मौसम में खेतों में दिन-रात काम आने वाली भारी मशीनरी, विशेष रूप से ट्रैक्टरों पर भारी दबाव पड़ता है। लगातार मूसलाधार बारिश, वातावरण में मौजूद अत्यधिक नमी और खेतों में फैली गहरी कीचड़ के कारण ट्रैक्टर के कई संवेदनशील पुर्जों में खराबी आने की आशंका काफी बढ़ जाती है। यदि समय पर उचित देखभाल और सुरक्षात्मक कदम न उठाए जाएं, तो अचानक आई तकनीकी खराबी के चलते ऐन जुताई के समय भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पार्किंग और सुरक्षित शेड का प्रबंध
बरसात के दिनों में सबसे पहला नियम यह है कि वाहन को कभी भी खुले आसमान के नीचे लंबे समय तक न छोड़ें। बारिश का पानी और वायुमंडलीय नमी अगर मशीनरी के आंतरिक तंत्र में प्रवेश कर जाए, तो धातु के कलपुर्जों में तेजी से जंग लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसलिए, उपयोग के बाद ट्रैक्टर को हमेशा किसी ढकी हुई जगह, पक्के शेड या गैरेज में ही खड़ा करना चाहिए। यदि किसी कारणवश पक्के शेड की व्यवस्था उपलब्ध न हो, तो उच्च गुणवत्ता वाले वाटरप्रूफ तिरपाल या प्लास्टिक कवर से पूरे वाहन को ढकना बेहद जरूरी होता है।
हालांकि, वाटरप्रूफ कवर का इस्तेमाल करते समय एक बहुत ही महत्वपूर्ण सावधानी बरतनी चाहिए। गीली स्थिति में या बारिश से तुरंत भीगे हुए ट्रैक्टर पर कभी भी कवर न चढ़ाएं। ऐसा करने से वाहन के भीतर फंसी नमी बाहर नहीं निकल पाती और अंदर ही अंदर वाष्प बनकर पुर्जों पर जमा होने लगती है, जिससे जंग लगने तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने का खतरा दोगुना हो जाता है। अतः हमेशा वाहन के पूरी तरह सूख जाने के पश्चात ही उस पर सुरक्षात्मक आवरण डालें।
इलेक्ट्रिकल सिस्टम, बैटरी और वायरिंग की समयबद्ध जांच
बरसात के पानी और नमी का सबसे पहला और घातक असर वाहन के इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर पड़ता है। नमी के कारण वायरिंग तंत्र में अर्थिंग, स्पार्किंग या करंट लीक होने की समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिससे अचानक स्टार्ट न होने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस जोखिम से बचने के लिए बैटरी के दोनों टर्मिनलों की नियमित अंतराल पर जांच करते रहना अनिवार्य है। यदि टर्मिनलों पर सफेद या हरे रंग का जंग जमा हुआ दिखाई दे, तो उसे तुरंत गर्म पानी और कपड़े की मदद से अच्छी तरह साफ करवाएं।
इसके साथ ही, पूरे वाहन में फैली हुई तारों की कोटिंग को भी ध्यान से देखें। यदि कहीं से तार का प्लास्टिक कवर कटा हुआ, ढीला या घिसा हुआ नजर आए, तो उसे कतई नजरअंदाज न करें। कटी हुई तारों के पानी के संपर्क में आने से शॉर्ट सर्किट होने का भारी अंदेशा रहता है, जिससे पूरे इलेक्ट्रिकल सिस्टम को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। समय रहते इलेक्ट्रिशियन से जांच कराकर तारों पर टेपिंग या मरम्मत करवा लेना ही बुद्धिमानी है।
इंजन स्वास्थ्य और एयर फिल्टर की नियमित सफाई
इंजन को ट्रैक्टर का हृदय माना जाता है, और इसकी सुचारु कार्यप्रणाली एयर फिल्टर की स्वच्छता पर निर्भर करती है। बरसात के मौसम में हवा में नमी की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, जिसके कारण हवा में तैरती मिट्टी और धूल एयर फिल्टर पर चिपक कर गाढ़ा कीचड़ बना लेती है। जब एयर फिल्टर की जाली बंद हो जाती है, तो इंजन को दहन के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजनयुक्त स्वच्छ हवा नहीं मिल पाती।
पर्याप्त हवा न मिलने की वजह से इंजन पर अनावश्यक जोर पड़ता है, जिससे न केवल उसकी कार्यक्षमता और ताकत कम हो जाती है, बल्कि डीजल की खपत में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। इससे किसान के बजट पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। इसलिए, मानसून के दौरान समय-समय पर एयर फिल्टर को निकालकर अच्छी तरह साफ करते रहें। यदि फिल्टर अत्यधिक घिसा हुआ, पुराना या क्षतिग्रस्त प्रतीत हो, तो बिना किसी देरी के नया एयर फिल्टर लगवा लेना चाहिए।
कीचड़ की सफाई, लुब्रिकेशन और ईंधन सुरक्षा
खेतों में काम करने के बाद पहियों, रिम, ब्रेक ड्रम और निचले चेसिस हिस्सों पर मोटी कीचड़ चिपक जाती है। इस मिट्टी को लंबे समय तक जमा न रहने दें, क्योंकि गीली मिट्टी नमी को रोके रखती है और धातु के ढांचे को धीरे-धीरे गलाने लगती है। विशेष रूप से ब्रेक, क्लच और अन्य गतिशील कलपुर्जों के आसपास जमा कीचड़ को पानी के तेज बहाव से धोकर साफ करें। सफाई के बाद वाहन को पूरी तरह सूखने दें और फिर सभी मूविंग जॉइंट्स में मानक ग्रीस या लुब्रिकेंट का छिड़काव करें ताकि घर्षण और जंग से बचाव हो सके।
इसके अलावा, बरसात के दिनों में डीजल टैंक की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ढक्कन के थोड़ा सा भी ढीला रहने पर बारिश का पानी सीधे ईंधन में घुल सकता है। डीजल में पानी या धूल के कण मिलने से फ्यूल इंजेक्टर और पंप खराब हो सकते हैं, जिससे इंजन अचानक बंद पड़ सकता है। इसलिए ईंधन भरवाने के तुरंत बाद टैंक का ढक्कन कसकर बंद करना सुनिश्चित करें।
लंबे ठहराव के दौरान सुरक्षात्मक उपाय
यदि मानसून के दौरान किसी कारणवश ट्रैक्टर का उपयोग कई दिनों या हफ्तों तक नहीं होना है, तो उसे किसी सूखी, समतल और सुरक्षित जगह पर खड़ा करें। लंबी अवधि के ठहराव के दौरान भी समय-समय पर बैटरी और अन्य पुर्जों की स्थिति जांचते रहें। बारिश के मौसम में बरती गई यह छोटी-छोटी सावधानियां मशीनरी की कुल उम्र को बढ़ाती हैं और ऐन मौके पर खेतों में काम के समय होने वाली अनपेक्षित रुकावटों से पूरी तरह निजात दिलाती हैं।



















