प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा में अवैध खनन और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए कारोबारी रतिकांत राउत को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में लंबी पूछताछ के बाद यह कदम उठाया। रतिकांत राउत के खिलाफ अवैध तरीके से निकाले गए खनिजों की बिक्री, काले धन को वैध बनाने और केंद्रीय जांच अधिकारियों को रिश्वत देने के गंभीर आरोप हैं। इस गिरफ्तारी के साथ ही राज्य में अवैध खनन और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के सांठगांठ की जांच और तेज हो गई है।
ढेंकनाल की खदानों से मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला
रतिकांत राउत ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के कलाराहांगा इलाके के निवासी हैं। वह ढेंकनाल जिले में बड़े पैमाने पर पत्थर खदान और क्रशर यूनिट का संचालन करते हैं। उनके इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लंबे समय से अवैध रूप से खनिजों का उत्खनन करने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगते रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय को अपनी प्राथमिक जांच के दौरान ढेंकनाल स्थित खदानों से भारी वित्तीय अनियमितताओं के सुराग मिले थे। इन्हीं गड़बड़ियों को आधार बनाते हुए केंद्रीय एजेंसी ने वर्ष 2020 में रतिकांत राउत के विरुद्ध पहला आधिकारिक मुकदमा दर्ज किया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी कारोबारी ने ढेंकनाल की खदानों से गैरकानूनी तरीके से बहुमूल्य खनिज निकाले और उन्हें खुले बाजार में बेचकर भारी रकम हासिल की। इसके बाद इस अवैध कमाई को छुपाने और वित्तीय तंत्र के माध्यम से वैध धन के रूप में बदलने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों का सहारा लिया गया। वित्तीय लेन-देन की गहन समीक्षा के बाद एजेंसी ने पाया कि इस अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया था, जिसका हिसाब-किताब सरकारी खातों से गायब था।
ईडी के तत्कालीन उप निदेशक को 20 लाख रिश्वत देने का आरोप
इस पूरे प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू जांच एजेंसी के भीतर फैले भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। रतिकांत राउत की हालिया गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि ओडिशा में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई एक पुरानी कार्रवाई से जुड़ी है। सीबीआई ने उस समय बड़ा कदम उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय के तत्कालीन उप निदेशक चिंतन रघुवंशी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। चिंतन रघुवंशी पर आरोप था कि उन्होंने मामले को रफा-दफा करने और जांच को धीमा करने के बदले कारोबारी रतिकांत राउत से 20 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार की थी।
प्रवर्तन निदेशालय के अपने ही पूर्व अधिकारी से जुड़ा यह रिश्वतकांड सामने आने के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया। एजेंसी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि 20 लाख रुपये के इस लेनदेन में कौन-कौन से माध्यम इस्तेमाल किए गए थे और क्या इस सांठगांठ में अन्य लोग भी शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि रिश्वत की इस घटना ने अवैध खनन माफिया को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले भ्रष्ट तरीकों को उजागर कर दिया है।
स्थानीय अदालत में पेशी और आगे की कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने रतिकांत राउत को स्थानीय अदालत में प्रस्तुत किया। जांच अधिकारियों ने अदालत से आरोपी कारोबारी की हिरासत मांगी है, ताकि उससे विस्तृत पूछताछ की जा सके। कस्टडी रिमांड मिलने के बाद एजेंसी रतिकांत राउत के विभिन्न बैंक खातों, अचल संपत्तियों और व्यावसायिक साझेदारों के वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच करेगी।
अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में आरोपी के सहयोगियों और बैंक लेन-देन से जुड़े अन्य व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है। यह मामला ओडिशा में अवैध खनन के जरिए खड़े किए गए काले धन के साम्राज्य को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। न्यायलय में रिमांड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूछताछ में कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य उजागर होने की संभावना जताई जा रही है।




















