नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर राहुल गांधी ने की लाइव मीडिया से बातसिंह राशि में सूर्य-बुध की युति से बनेगा बुधादित्य राजयोग, 22 अगस्त से 3 राशियों की चमकेगी किस्मतओडिशा अवैध खनन मामले में कारोबारी रतिकांत राउत गिरफ्तार, ईडी अधिकारी को 20 लाख रिश्वत देने का भी है आरोपआज बंद हो रहा गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट IPO, GMP से मिले 15% संभावित लिस्टिंग गेन के संकेतबबीता सिंह रिपोर्टिंग में पुलिस अफसर बनीं निमिषा सजयन, रोल ने निजी जिंदगी पर डाला गहरा असरनैनीताल में भारी बारिश के बाद नैनीझील के खोले गए गेट, जानिए नौकायन की सुरक्षा स्थिति और प्रशासन के दिशानिर्देशमैके टेस्ट में स्टीव वॉ का रिकॉर्ड तोड़ने की दहलीज पर स्टीव स्मिथ, 50 रन बनाते ही रचा जाएगा नया इतिहासउत्तर भाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे शनि, 9 अक्टूबर के बाद इन 6 राशियों की बदलेगी किस्मतस्विट्जरलैंड के थूसिस में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग, 5 लोग लापता और 8 घायलझारखंड में 22 रद्द परीक्षाओं पर हाईकोर्ट की रोक, JSSC CGL और CDPO अभ्यर्थियों को मिली बड़ी राहत
ओडिशा अवैध खनन मामले में कारोबारी रतिकांत राउत गिरफ्तार, ईडी अधिकारी को 20 लाख रिश्वत देने का भी है आरोपओडिशा
21 अग॰ 2026, 1:14 pm (1 घंटे पहले)· 4

ओडिशा अवैध खनन मामले में कारोबारी रतिकांत राउत गिरफ्तार, ईडी अधिकारी को 20 लाख रिश्वत देने का भी है आरोप

प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा के कारोबारी रतिकांत राउत को अवैध खनन, मनी लॉन्ड्रिंग और 20 लाख रुपये की रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा में अवैध खनन और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए कारोबारी रतिकांत राउत को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में लंबी पूछताछ के बाद यह कदम उठाया। रतिकांत राउत के खिलाफ अवैध तरीके से निकाले गए खनिजों की बिक्री, काले धन को वैध बनाने और केंद्रीय जांच अधिकारियों को रिश्वत देने के गंभीर आरोप हैं। इस गिरफ्तारी के साथ ही राज्य में अवैध खनन और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के सांठगांठ की जांच और तेज हो गई है।

ढेंकनाल की खदानों से मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला

रतिकांत राउत ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के कलाराहांगा इलाके के निवासी हैं। वह ढेंकनाल जिले में बड़े पैमाने पर पत्थर खदान और क्रशर यूनिट का संचालन करते हैं। उनके इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लंबे समय से अवैध रूप से खनिजों का उत्खनन करने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगते रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय को अपनी प्राथमिक जांच के दौरान ढेंकनाल स्थित खदानों से भारी वित्तीय अनियमितताओं के सुराग मिले थे। इन्हीं गड़बड़ियों को आधार बनाते हुए केंद्रीय एजेंसी ने वर्ष 2020 में रतिकांत राउत के विरुद्ध पहला आधिकारिक मुकदमा दर्ज किया था।

ये भी पढ़ें

जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी कारोबारी ने ढेंकनाल की खदानों से गैरकानूनी तरीके से बहुमूल्य खनिज निकाले और उन्हें खुले बाजार में बेचकर भारी रकम हासिल की। इसके बाद इस अवैध कमाई को छुपाने और वित्तीय तंत्र के माध्यम से वैध धन के रूप में बदलने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न तरीकों का सहारा लिया गया। वित्तीय लेन-देन की गहन समीक्षा के बाद एजेंसी ने पाया कि इस अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया था, जिसका हिसाब-किताब सरकारी खातों से गायब था।

ईडी के तत्कालीन उप निदेशक को 20 लाख रिश्वत देने का आरोप

इस पूरे प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू जांच एजेंसी के भीतर फैले भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। रतिकांत राउत की हालिया गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि ओडिशा में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई एक पुरानी कार्रवाई से जुड़ी है। सीबीआई ने उस समय बड़ा कदम उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय के तत्कालीन उप निदेशक चिंतन रघुवंशी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। चिंतन रघुवंशी पर आरोप था कि उन्होंने मामले को रफा-दफा करने और जांच को धीमा करने के बदले कारोबारी रतिकांत राउत से 20 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार की थी।

प्रवर्तन निदेशालय के अपने ही पूर्व अधिकारी से जुड़ा यह रिश्वतकांड सामने आने के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया। एजेंसी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि 20 लाख रुपये के इस लेनदेन में कौन-कौन से माध्यम इस्तेमाल किए गए थे और क्या इस सांठगांठ में अन्य लोग भी शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि रिश्वत की इस घटना ने अवैध खनन माफिया को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले भ्रष्ट तरीकों को उजागर कर दिया है।

स्थानीय अदालत में पेशी और आगे की कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तारी के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने रतिकांत राउत को स्थानीय अदालत में प्रस्तुत किया। जांच अधिकारियों ने अदालत से आरोपी कारोबारी की हिरासत मांगी है, ताकि उससे विस्तृत पूछताछ की जा सके। कस्टडी रिमांड मिलने के बाद एजेंसी रतिकांत राउत के विभिन्न बैंक खातों, अचल संपत्तियों और व्यावसायिक साझेदारों के वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच करेगी।

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में आरोपी के सहयोगियों और बैंक लेन-देन से जुड़े अन्य व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है। यह मामला ओडिशा में अवैध खनन के जरिए खड़े किए गए काले धन के साम्राज्य को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। न्यायलय में रिमांड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूछताछ में कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य उजागर होने की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

ईडी ने ओडिशा में किस कारोबारी को गिरफ्तार किया है?
प्रवर्तन निदेशालय ने भुवनेश्वर निवासी और ढेंकनाल में पत्थर खदान चलाने वाले कारोबारी रतिकांत राउत को गिरफ्तार किया है।
रतिकांत राउत पर क्या मुख्य आरोप हैं?
उन पर ढेंकनाल में अवैध खनन, खनिजों की बिक्री से मिले पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग और ईडी के एक अधिकारी को रिश्वत देने के आरोप हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने रतिकांत राउत के खिलाफ पहला मामला कब दर्ज किया था?
ढेंकनाल स्थित पत्थर खदान और क्रशर कारोबार में वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिलने के बाद ईडी ने वर्ष 2020 में पहला मामला दर्ज किया था।
रिश्वतकांड में ईडी के किस पूर्व अधिकारी का नाम शामिल है?
सीबीआई ने ईडी के तत्कालीन उप निदेशक चिंतन रघुवंशी को रतिकांत राउत से 20 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
रतिकांत राउत को किस स्थान से गिरफ्तार किया गया?
रतिकांत राउत को भुवनेश्वर स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 मिनट पहले

यह मामला सिर्फ अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून लागू करने वाली केंद्रीय जांच एजेंसी के भीतर तक फैले गंभीर भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जब एक आरोपी केंद्रीय अधिकारी को ही 20 लाख रुपये की रिश्वत देने के आरोप में घिर जाता है, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। आगे की जांच में यह देखना अहम होगा कि क्या इस वित्तीय नेटवर्क में अन्य अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के और सबूत मिलते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·58 मिनट पहले

यह प्रकरण कॉर्पोरेट वित्तीय अपराधों और संस्थागत भ्रष्टाचार के खतरनाक गठजोड़ को बेनकाब करता है। जब जांच एजेंसियों के भीतर ही सांठगांठ मिलने लगे, तो मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल ट्रेल की फॉरेंसिक जांच बेहद जटिल हो जाती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वित्तीय लेन-देन के डिजिटल सबूत और बैंक ट्रेल्स इस सिंडिकेट के अन्य चेहरों को बेनकाब करने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR