भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान यूरोप भारतीय ईवी एक्सपोर्ट का सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में देश के इलेक्ट्रिक कार निर्यात में ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है। इस शानदार बढ़ोतरी के पीछे मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बेहतर अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और टिकाऊ मोबिलिटी के मामले में देश का एक सशक्त मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित होना मुख्य वजह माना जा रहा है।
निर्यात आय और वॉल्यूम में भारी इजाफा
समीक्षाधीन तिमाही के दौरान देश से होने वाली इलेक्ट्रिक कारों की निर्यात आय पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 2.22 करोड़ डॉलर से बेहद तेजी से छलांग लगाकर सीधे 36.9 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई। वहीं अगर गाड़ियों के कुल शिपमेंट वॉल्यूम की बात करें तो यह आंकड़ा 1,309 यूनिट्स से कई गुना बढ़कर 10,802 यूनिट्स तक जा पहुंचा। यह उल्लेखनीय प्रगति वैश्विक बाजार में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी मजबूती का साफ प्रमाण पेश करती है।
स्पेन बना भारत की इलेक्ट्रिक कारों का सबसे बड़ा गढ़
यूरोपीय देशों में स्पेन भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए सबसे बड़ा और अहम बाजार साबित हुआ है। इस अवधि के दौरान स्पेन को होने वाला निर्यात बढ़कर 14.64 करोड़ डॉलर यानी 146.4 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। अकेले स्पेन ने इस कैटेगरी में भारत के कुल निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया। आंकड़ों के अनुसार इस तिमाही में स्पेन को कुल 4,007 इलेक्ट्रिक वाहन भेजे गए, जिससे यह देश वैल्यू और वॉल्यूम दोनों ही मामलों में सबसे बड़ा गंतव्य बन गया।
ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में भी बढ़ी मांग
यूरोप के ही ब्रिटेन ने भी भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात में गहरी रुचि दिखाई है और यह देश दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। ब्रिटेन ने इस दौरान 7.87 करोड़ डॉलर यानी 78.7 मिलियन डॉलर का आयात किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यहां शिपमेंट न के बराबर था। इस दौरान एक्सपोर्ट वॉल्यूम सिर्फ एक गाड़ी से बढ़कर सीधे 2,646 गाड़ियों पर पहुंच गया, जो यूरोप के सबसे विकसित ईवी बाजारों में भारतीय कारों की गहरी पैठ को दर्शाता है। इसके अलावा जर्मनी में एक्सपोर्ट 2.51 करोड़ डॉलर, नॉर्वे में 2.11 करोड़ डॉलर और डेनमार्क में 2.1 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया। बेल्जियम ने 1.29 करोड़ डॉलर, नीदरलैंड ने 1.2 करोड़ डॉलर, ग्रीस ने 38 लाख डॉलर, इटली ने 27 लाख डॉलर, स्वीडन ने 21 लाख डॉलर और पोलैंड ने 16 लाख डॉलर की भारतीय इलेक्ट्रिक कारें मंगाईं।
एशिया-पैसिफिक और लैटिन अमेरिका तक पहुंचा दायरा
यूरोपीय बाजारों के साथ-साथ भारत ने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भी अपने इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात का दायरा काफी बढ़ाया है। जापान ने इस तिमाही में 1.34 करोड़ डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें इम्पोर्ट कीं। इसके अलावा इजराइल ने 28 लाख डॉलर, ऑस्ट्रेलिया ने 27 लाख डॉलर, सिंगापुर ने 1.7 करोड़ डॉलर नहीं बल्कि 17 लाख डॉलर, ताइवान ने 13 लाख डॉलर और दक्षिण कोरिया को भी शिपमेंट भेजे गए। पारंपरिक रूप से पड़ोसी बाजार रहे नेपाल ने भी 81 लाख डॉलर का आयात किया। हालांकि उन्नत यूरोपीय बाजारों की तरफ यह बड़ा बदलाव भारतीय ईवी निर्यात की बदलती तस्वीर को बयां करता है। दूसरी ओर, लैटिन अमेरिकी देशों में भी नए व्यापारिक अवसर खुले हैं, जहां ब्राजील ने 24 लाख डॉलर, कोलंबिया ने 10 लाख डॉलर, चिली ने 4 लाख डॉलर और कोस्टा रिका ने 5 लाख डॉलर के भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों का आयात किया है।



















