नेपाल के ऊपरी पर्वतीय इलाकों में हुई भीषण तबाही और मुसलाधार बारिश के बाद भारत के सीमावर्ती मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। नेपाल की नदियों से छोड़े गए अत्यधिक पानी के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के कुल 16 जिलों में स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी का जलस्तर अचानक खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बाद स्थिति को संभालने के लिए वाल्मीकिनगर बैराज के 36 फाटकों को खोल दिया गया है। निचले और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। अगले 24 घंटे नदी के जलप्रवाह और बढ़ते जलस्तर की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जा रहे हैं, जिसके चलते पूरे प्रशासनिक अमले को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
गंडक नदी में आया उफान, तटीय क्षेत्रों से लोगों की निकासी शुरू
पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भारी तबाही के बाद मैदानी इलाकों में पानी का बहाव तेजी से बढ़ा है। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित गंडक नदी पर बने बैराज से बड़ी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए जाने से नदी के तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने की आशंका प्रबल हो गई है। आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नदी के किनारों पर बसे गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया है। राहत और बचाव कार्य के लिए आपदा मोचन बलों को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर की हर मिनट निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से त्वरित निपटा जा सके।
केंद्र और राज्यों का साझा समन्वय, पीएम और गृह मंत्री अलर्ट
आपदा की इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सतर्कता के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से टेलीफोन पर बात की। उन्होंने दोनों राज्यों में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरों की विस्तृत समीक्षा की। गृह मंत्री अमित शाह ने नेपाल में आई बाढ़ की तबाही को अत्यंत हृदयविदारक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस संकट की घड़ी में बिहार और उत्तर प्रदेश को हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों मुख्यमंत्रियों से राज्य स्तर पर की जा रही तैयारियों की जानकारी ली और राहत कार्यों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री स्तर पर आपात बैठकें और धरातल पर मॉनिटरिंग
केंद्रीय निर्देशों के बाद दोनों राज्यों की सरकारें पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक की और स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से महराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक तथा नारायणी नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर रखने के आदेश जारी किए हैं। राज्य सरकारों से स्पष्ट निर्देश मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में खुद पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और नदी तटों की निगरानी कर रहे हैं।
बिहार के इन 9 जिलों में अत्यधिक सतर्कता का निर्देश
नेपाल से आने वाले भारी जलप्रवाह को देखते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने कुल 9 जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में प्रशासनिक मशीनरी को 24 घंटे तैयार रहने को कहा गया है। हाई अलर्ट वाले जिलों की सूची निम्नलिखित है
- पश्चिमी चंपारण: जहाँ गंडक बैराज के 36 गेट खोले गए हैं और तटीय इलाकों को खाली कराया जा रहा है।
- पूर्वी चंपारण: नदी के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है।
- गोपालगंज: गंडक नदी के प्रवाह से तटीय पंचायतों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
- मुजफ्फरपुर: बागमती और गंडक के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
- सीवान: बाढ़ की किसी भी आशंका से निपटने के लिए राहत शिविरों की तैयारी की जा रही है।
- सारण: नदी किनारे रहने वाली आबादी को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की अपील की गई है।
- शिवहर: छोटे और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
- सीतामढ़ी: नेपाल सीमा से सटे होने के कारण प्रशासनिक चौकसी बढ़ा दी गई है।
- वैशाली: गंगा और गंडक के संगम के निकट होने से निचले इलाकों में अलर्ट घोषित है।
उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में बाढ़ प्रबंधन की सख्त तैयारी
उत्तर प्रदेश में भी गंडक और नारायणी नदियों के उफान का सीधा असर देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने नेपाल सीमा से लगे और नदियों के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले 7 जिलों में अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में शामिल हैं
- महराजगंज: नेपाल सीमा से सटा होने के कारण नारायणी और गंडक नदी के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
- कुशीनगर: गंडक नदी के जल स्तर में वृद्धि को देखते हुए विशेष निगरानी दस्ते तैनात किए गए हैं।
- पीलीभीत: सीमावर्ती नदियों में जलप्रवाह की गति की लगातार जांच की जा रही है।
- श्रावस्ती: पहाड़ी नदियों के उफान के खतरे को देखते हुए तटवर्ती ग्रामीणों को सतर्क किया गया है।
- बलरामपुर: राप्ती और अन्य सहायक नदियों में संभावित उफान के प्रति अलर्ट जारी है।
- सिद्धार्थनगर: जल भराव की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन तैयार है।
- गोरखपुर: राप्ती और रोहिन नदियों के जलस्तर पर नियंत्रण कक्ष से नजर रखी जा रही है।
नेपाल से भारत तक जल प्रवाह का भौगोलिक तंत्र
हिमालयी क्षेत्र में होने वाली भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा का सीधा प्रभाव भारत के मैदानी राज्यों पर पड़ता है। नेपाल का भोटेकोशी नदी तंत्र आगे चलकर त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ता है। त्रिशूली नदी देवघाट के समीप काली गंडकी नदी में मिलती है, जहाँ से इस संयुक्त धारा को नारायणी नदी के नाम से जाना जाता है। यही नारायणी नदी जब भारतीय सीमा में प्रवेश करती है, तो इसे गंडक नदी कहा जाता है। यही वजह है कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में जब भी जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो उसका सीधा और तीव्र प्रभाव भारत में गंडक नदी के जलप्रवाह पर दिखाई देता है।
नेपाल में तबाही और लापता यात्रियों का विवरण
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ताज़ा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस जल प्रलय में कुल 750 यात्री लापता हैं। लापता लोगों में 291 विदेशी नागरिक तथा 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों के इस आंकड़े में 133 भारतीय नागरिक और 37 गैर-निवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियां सभी लापता लोगों का सुराग लगाने में जुटी हुई हैं।





















