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उत्तर प्रदेश से लेकर कश्मीर तक बाढ़ का तांडव, नदियां उफान पर और जनजीवन अस्त-व्यस्तभारत
23 अग॰ 2026, 11:59 pm (2 घंटे पहले)· 1

उत्तर प्रदेश से लेकर कश्मीर तक बाढ़ का तांडव, नदियां उफान पर और जनजीवन अस्त-व्यस्त

देश के कई राज्यों में भारी मानसूनी बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में नदियां उफान पर हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य चलाने पड़ रहे हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में बादलों की सक्रियता से हालात गंभीर बने हुए हैं और पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक जलप्रलय जैसा मंज़र देखने को मिल रहा है। मानसूनी बारिश की वजह से कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और उनका पानी रिहायशी इलाकों में घुस रहा है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाके कट रहे हैं और बाढ़ के पानी ने हर तरफ तबाही मचा रखी है।

बलिया में गंगा नदी में समाई विशाल टंकी

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। यहां बाढ़ के पानी के कटाव के कारण 20 फीट से अधिक ऊंची पानी की एक पूरी टंकी नदी में समा गई। वहीं मध्य प्रदेश के रीवा में हालात इतने बिगड़ गए कि बाढ़ का पानी आवासीय सोसायटी के अंदर तक भर गया। घरों के भूतल पूरी तरह डूब जाने के कारण लोगों को मजबूरन अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों पर शरण लेनी पड़ी। इस संकट से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों को गले तक पानी में उतरकर बचाव अभियान चलाना पड़ा और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

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मोहाली में पानी के तेज बहाव में फंसा पिकअप वाहन

पंजाब के मोहाली में भी बाढ़ की भयंकर स्थिति सामने आई है। पानी के तेज बहाव के बीच एक पिकअप वाहन फंस गया जिसमें एक भैंस भी सवार थी। जलस्तर अचानक बढ़ने की वजह से यह वाहन रास्ते में ही अटक गया था। हालांकि समय रहते स्थानीय स्तर पर प्रयास किए गए और चालक तथा भैंस दोनों को सुरक्षित निकाल लिया गया। इसके बाद रस्सियों की मदद से पानी के तेज प्रवाह के बीच से पिकअप वाहन को भी बाहर खींच लिया गया।

उत्तराखंड के देहरादून में टपकेश्वर महादेव मंदिर के पास डूबे घाट

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भारी बारिश के चलते प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी कर रखा है। लगातार हो रही वर्षा के कारण तमसा नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर के आसपास का क्षेत्र भारी तबाही की चपेट में है। मंदिर का एक हिस्सा और वहां बने घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। पहाड़ों से पानी इतनी तेजी से नीचे आ रहा है कि पूरा इलाका डूब क्षेत्र में बदल गया है। नदी का यह खतरनाक रूप लोगों में भय पैदा कर रहा है।

तमसा नदी के उफान से पार्किंग में खड़ी गाड़ियां क्षतिग्रस्त

तमसा नदी के प्रलयकारी रूप के कारण पास की पार्किंग में खड़ी कई गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मंदिर का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और बाढ़ का पानी विशालकाय हनुमान मूर्ति के पास तक पहुंच चुका है। हालात को देखते हुए पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित किया गया है और लोगों को नदी के निचले तथा तटीय इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। नदी के किनारों पर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और लगातार मुनादी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर के अखनूर में चिनाब नदी से बचाए गए तीन युवक

जम्मू-कश्मीर के अखनूर क्षेत्र में चिनाब नदी में फंसे तीन लोगों को घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बचा लिया गया। शनिवार की रात चांदियां घाट पर तीन लड़के नदी के पत्थरों के किनारे बैठे हुए थे, तभी अचानक जलस्तर बढ़ गया और वे पानी की तेज धार के बीच फंस गए। स्थानीय लोगों से सूचना मिलने पर अखनूर पुलिस हरकत में आई और भारतीय तथा एसडीआरएफ की टीमों के साथ मिलकर रस्सियों के सहारे तीनों युवकों को सकुशल बाहर निकाल लिया। इससे पहले ओडिशा के मयूरभंज में भी ऐसा ही मामला सामने आया था जब बाढ़ के पानी में ऑटो बह गया था और स्थानीय नागरिकों ने सूझबूझ दिखाते हुए यात्रियों की जान बचाई थी।

सवाल-जवाब

बलिया में गंगा नदी के उफान से क्या नुकसान हुआ है?
बलिया में गंगा नदी के कटाव के कारण 20 फीट से अधिक ऊंची पानी की टंकी नदी में समा गई।
देहरादून में कौन सी नदी खतरे के निशान के पास बह रही है?
देहरादून में लगातार बारिश के चलते तमसा नदी का जलस्तर डेंजर लेवल पर बना हुआ है।
अखनूर में चिनाब नदी में फंसे लोगों को कैसे बचाया गया?
अखनूर पुलिस, भारतीय सेना और एसडीआरएफ की टीम ने दो घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रस्सियों की मदद से तीन लड़कों को सुरक्षित बाहर निकाला।
रीवा में बाढ़ के कारण लोगों को कहां रहना पड़ा?
रीवा में घरों के ग्राउंड फ्लोर पानी में डूब जाने के कारण लोगों को पहली मंजिल पर शरण लेनी पड़ी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·19 मिनट पहले

उत्तर प्रदेश से लेकर कश्मीर तक बाढ़ और मानसूनी तबाही ने न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त किया है, बल्कि देश के कृषि, परिवहन और स्थानीय व्यापार जैसे वित्तीय क्षेत्रों पर भी भारी आर्थिक दबाव डालना शुरू कर दिया है। नदियों के उफान और जलप्रलय जैसे हालात से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँच रहा है। यदि यह स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई, तो कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बड़ा वित्तीय संकट पैदा हो सकता है, जिससे रिकवरी में लंबा समय लगेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 मिनट पहले

यह आपदा केवल फौरी राहत कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आपदा प्रबंधन तंत्र की संरचनात्मक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब बाढ़ जैसी मौसमी घटनाएं हर साल बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को इस स्तर पर क्षति पहुँचाती हैं, तो यह स्पष्ट है कि हमारी नीतिगत प्राथमिकताएं दीर्घकालिक जलवायु लचीलेपन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) के बजाय केवल प्रतिक्रियावादी (रिएक्टिव) उपायों तक सीमित हैं। नीति निर्माताओं को अब ड्रेनेज सिस्टम और तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह आपदा सिर्फ प्राकृतिक नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रणालियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। बलिया से लेकर अखनूर तक प्रशासन को जिस तरह रेस्क्यू में जुटना पड़ा है, उससे साफ है कि संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में समय रहते आपराधिक या लापरवाही से किए गए अवैध निर्माण और कमजोर बुनियादी ढांचे की यदि जांच हो, तो भविष्य में जनहानि रोकी जा सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

बलिया में 20 फीट ऊंची टंकी का नदी में समा जाना और देहरादून के टपकेश्वर मंदिर क्षेत्र में मची तबाही महज प्राकृतिक प्रकोप नहीं, बल्कि हमारे कमजोर बुनियादी ढांचे और अनियोजित विकास की पोल खोलती है। तटीय और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण तथा लचर इंजीनियरिंग पर यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हर साल आने वाली यह आपदा और विकराल रूप लेगी।

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