पहली बरसात ने खोल दी पूर्वी चंपारण के नए बांध की पोल, सिकरहना नदी किनारे दहशत में ग्रामीणबिहार
1 घंटे पहले· 2

पहली बरसात ने खोल दी पूर्वी चंपारण के नए बांध की पोल, सिकरहना नदी किनारे दहशत में ग्रामीण

पूर्वी चंपारण के सुगौली प्रखंड में सिकरहना नदी पर बना नया बांध महज तीन-चार दिन की बारिश में जगह-जगह से दरक गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने करोड़ों रुपये की लागत वाले इस निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया है।

पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली प्रखंड से एक चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। यहां लालपरसा धुमनी टोला में सिकरहना नदी के किनारे बनाए गए बांध ने महज तीन-चार दिन की लगातार बारिश में ही अपनी मजबूती खो दी है। बांध के कई हिस्सों में दरारें उभर आई हैं और कुछ जगहों पर मिट्टी धंसने लगी है, जिससे बारिश का मौसम पूरी तरह शुरू होने से पहले ही इस बांध की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

ग्रामीणों की बांध की हालत देखकर आंखें फटी रह गई हैं। उनका आरोप है कि इस बांध के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन काम की गुणवत्ता जमीन पर कहीं नजर नहीं आती। ग्रामीणों के मुताबिक बांध देखने में किसी मजबूत संरचना जैसा कम और एक पगडंडी जैसा ज्यादा लगता है। निर्माण के दौरान न तो इसकी चौड़ाई पर्याप्त रखी गई और न ही ऊंचाई को जरूरत के हिसाब से बढ़ाया गया, यही वजह है कि पहली ही बारिश ने इसकी पोल खोल दी।

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आठ साल की पीड़ा के बाद टूटी उम्मीद

स्थानीय ग्रामीण प्रदीप कुमार और मेघन सहनी ने इलाके के लोगों का दर्द बयां किया। उनके अनुसार यह इलाका पिछले आठ वर्षों से हर साल बाढ़ की भीषण तबाही झेल रहा है। इस बार जब नया बांध बनना शुरू हुआ, तो लोगों में उम्मीद जगी थी कि आखिरकार उनकी फसलें और घर सुरक्षित रह पाएंगे। लेकिन बांध की मौजूदा हालत ने वह उम्मीद फिर से चिंता में बदल दी है और पूरे इलाके में एक बार फिर बाढ़ का खौफ लौट आया है।

नेपाल की बारिश से बढ़ता जलस्तर

दूसरी तरफ नेपाल और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण सिकरहना नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा है। स्थिति यह हो गई है कि नदी का पानी अब बांध के निर्माण में लगाई गई पायलिंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने लगा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर बारिश का यही सिलसिला आगे भी जारी रहा, तो इस बार बाढ़ की विभीषिका से बच पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

फसल और घर बचाने की चिंता, हर तरफ दहशत

किसानों के चेहरे पर अपनी मेहनत से उगाई फसल और अपने आशियाने को खोने का डर साफ झलक रहा है। इलाके में एक तरह की दहशत का माहौल बन गया है, क्योंकि पिछले सालों की बाढ़ की तबाही अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। बांध की मौजूदा हालत ने उनकी चिंता को और गहरा कर दिया है।

प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल, तत्काल मरम्मत की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन के काम करने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि विभाग को समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए था। सवाल यह भी है कि आखिर बाढ़ आने से ठीक पहले ही आनन-फानन में निर्माण कार्य क्यों शुरू किया जाता है और समय रहते पुख्ता तैयारी क्यों नहीं की जाती। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बांध की मरम्मत तुरंत कराई जाए ताकि आगे कोई बड़ी अनहोनी न हो।

सवाल-जवाब

यह बांध कहां बना है?
यह बांध पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली प्रखंड के लालपरसा धुमनी टोला में सिकरहना नदी पर बनाया गया है।
बांध में दिक्कत कब सामने आई?
लगातार तीन-चार दिनों की बारिश के बाद ही बांध के कई हिस्सों में दरारें और मिट्टी धंसने की शिकायतें सामने आईं।
ग्रामीणों का मुख्य आरोप क्या है?
ग्रामीणों का आरोप है कि इस बांध पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई।
बांध की चौड़ाई और ऊंचाई को लेकर क्या शिकायत है?
ग्रामीणों का कहना है कि बांध की चौड़ाई और ऊंचाई पर्याप्त नहीं रखी गई, जिससे यह पगडंडी जैसा दिखता है।
इलाके के लोग कितने समय से बाढ़ झेल रहे हैं?
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक यह इलाका पिछले आठ वर्षों से हर साल भीषण बाढ़ की तबाही झेल रहा है।
नदी का जलस्तर क्यों बढ़ रहा है?
नेपाल और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण सिकरहना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों की क्या मांग है?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बांध की मरम्मत तुरंत कराई जाए ताकि कोई बड़ी अनहोनी न हो।

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