पंजाबी फिल्मों से निकलकर बॉलीवुड तक अपनी अलग जगह बना चुकीं अभिनेत्री शहनाज गिल अब अपनी निजी जिंदगी की प्रेम कहानी को लेकर चर्चा में हैं। रियलिटी शो बिग बॉस 13 से घर-घर में पहचानी गईं शहनाज ने हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म इश्कनामा के प्रचार के दौरान अपनी जिंदगी, प्रेम कहानी और एक कलाकार के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को लेकर खुलकर बात की।
मासूमियत और मेहनत से बनाई पहचान
शहनाज गिल ने अपनी बेबाक अदा, मासूम अंदाज और लगातार मेहनत के दम पर लाखों दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है। बिग बॉस 13 में नजर आने के बाद वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं और अब वह फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटी हैं। इस बीच उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में अपनी निजी जिंदगी और आने वाले प्रोजेक्ट को लेकर कई अहम बातें साझा कीं।
अपनी ही कहानी पर फिल्म का सवाल
बातचीत के दौरान शहनाज से पूछा गया कि अगर उनकी अपनी जिंदगी की कोई प्रेम कहानी यानी अपना इश्कनामा हो, तो उसका टाइटल क्या होगा। इस पर अभिनेत्री ने कोई नाम बताने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब सही समय आएगा, तब वह खुद अपनी कहानी का टाइटल दुनिया के सामने रखेंगी। शहनाज का कहना है कि उनकी जिंदगी पर अगर कभी फिल्म बनाई गई, तो वह कहानी बेहद दिलचस्प साबित होगी। उन्होंने कहा, "जब मेरी जिंदगी पर फिल्म बनेगी तो मुझे लगता है कि वह बहुत दिलचस्प होगी, और जब ऐसा होगा, तब मैं उसका टाइटल भी बताऊंगी।"
किरदार को लेकर जिम्मेदारी का एहसास
इश्कनामा में अपने किरदार को लेकर शहनाज गिल ने कहा कि जब किसी सच्ची घटना पर आधारित कहानी को पर्दे पर उतारा जाता है, तो कलाकार के तौर पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब किसी सच्ची कहानी पर फिल्म बनाई जाती है तो जिम्मेदारी लेना बहुत जरूरी होता है। मैंने अपनी तरफ से इस जिम्मेदारी को पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश की है। मुझे विश्वास है कि मेरे किरदार को लोग जरूर पसंद करेंगे।" इस बयान से साफ है कि शहनाज ने इस किरदार को निभाते समय काफी गंभीरता और मेहनत दिखाई है।
1981 से 1988 तक फैली प्रेम कहानी
इश्कनामा को एक सच्ची प्रेम कहानी से प्रेरित बताया जा रहा है। फिल्म में निम्मा और नसीमा नाम के दो किरदारों के रिश्ते को दिखाया गया है। यह एक पीरियड रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसकी कहानी साल 1981 से 1988 के बीच के दौर पर आधारित है। कहानी की पृष्ठभूमि भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास के इलाकों में रची गई है, जहां उस दौर के हालात और रिश्तों की उलझनों को पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है।











