बॉलीवुड में अमूमन फिल्मों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए ईद, दिवाली और क्रिसमस जैसे बड़े त्योहारों की तारीखें पहले से ही सुरक्षित कर ली जाती हैं। मेकर्स के बीच इन सरकारी और सार्वजनिक छुट्टियों के दौरान अपनी बड़ी फिल्में रिलीज करने की हमेशा एक होड़ मची रहती है। लेकिन भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी तारीख भी दर्ज है जिसने बिना किसी छुट्टी या त्योहार के ही बॉक्स ऑफिस पर सफलता की एक नई और अनोखी इबारत लिख दी। यह जादुई तारीख है 12 जुलाई। इसी खास दिन पर अलग-अलग वर्षों में सिनेमाघरों में दो ऐसी बेमिसाल कहानियां पेश की गईं, जिन्होंने न केवल दर्शकों की आंखों को नम किया बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी ताबड़तोड़ कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित किए। इन फिल्मों में देश के असली नायकों के असाधारण जीवन संघर्ष को बड़े पर्दे पर उतारा गया था जिसे देखकर दर्शक तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाए थे।
'द फ्लाइंग सिख' की प्रेरक दौड़ और फरहान अख्तर का बेजोड़ अभिनय
वर्ष 2013 की 12 जुलाई को निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा एक ऐसी फिल्म लेकर आए जिसने खेल जगत और सिनेमा प्रेमियों दोनों का दिल गहराई से जीत लिया। इस फिल्म का नाम था 'भाग मिल्खा भाग'। यह फिल्म भारत के महानतम धावकों में से एक मिल्खा सिंह के असाधारण और भावुक जीवन संघर्ष पर आधारित थी। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले बहुमुखी अभिनेता फरहान अख्तर ने इस किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। उनके इस समर्पण ने दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया था।
इस फिल्म में भारत और पाकिस्तान के विभाजन की दर्दनाक त्रासदी को दिखाया गया था, जिसने मिल्खा सिंह के बचपन को पूरी तरह उजाड़ दिया था। इसके बाद उनका सेना में भर्ती होना, अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का उनका अटूट जुनून और रोम से लेकर टोक्यो ओलंपिक तक के सफर को जिस शिद्दत के साथ पर्दे पर उतारा गया, उसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। फिल्म का दमदार संगीत और इसके प्रेरणादायक गीत आज भी देश के जिम और खेल के मैदानों में युवाओं के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बने हुए हैं। समीक्षकों की ओर से इस फिल्म को भरपूर सराहना मिली और इसने दर्शकों के बीच भी गहरा असर छोड़ा। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्मों के लिए एक नया और सफल व्यावसायिक रास्ता तैयार किया। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी जबरदस्त कमाई की और 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करके अपनी सफलता का परचम लहराया।
छह साल बाद ऋतिक रोशन ने दोहराया इतिहास
ठीक छह साल बाद, यानी 12 जुलाई 2019 को बॉक्स ऑफिस पर एक बार फिर वही पुराना इतिहास दोहराया गया। इस बार बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'सुपर 30' के साथ सिनेमाघरों में उतरे। अपनी अत्यधिक आकर्षक और 'ग्रीक गॉड' वाली पारंपरिक छवि को पूरी तरह से त्यागते हुए, ऋतिक रोशन ने इस फिल्म में बिहार के एक बेहद साधारण और गमछा लपेटने वाले गणितज्ञ आनंद कुमार की भूमिका निभाई। उनकी इस कमाल की और बेहद संजीदा एक्टिंग ने दुनिया भर के सिनेमा प्रेमियों को हैरान कर दिया था।
यह कहानी बिहार के उन गरीब बच्चों के संघर्ष की थी जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी प्रतिभा के दम पर IIT की कठिन प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने का सपना देखते हैं। आनंद कुमार के संघर्ष और पूरे भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ उनकी लड़ाई को फिल्म में बहुत ही प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया था। फिल्म का एक लोकप्रिय संवाद 'अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा, जो हकदार होगा वही राजा बनेगा...' दर्शकों के बीच एक कल्ट डायलॉग बन गया और आज भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे बहुत ज्यादा शेयर किया जाता है। इस बेहतरीन फिल्म ने केवल तारीफें ही नहीं बटोरीं, बल्कि कमाई के मामले में भी नए रिकॉर्ड बनाए। दुनिया भर के सिनेमाघरों से इस फिल्म ने 200 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया और इसे एक बड़ी ब्लॉकबस्टर का दर्जा हासिल हुआ।
दोनों ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बीच की अनूठी कड़ियां
अगर हम 'भाग मिल्खा भाग' और 'सुपर 30' का बारीकी से विश्लेषण करें, तो इन दोनों फिल्मों में कई कमाल की समानताएं नजर आती हैं। सबसे पहली बात यह है कि दोनों ही फिल्में हमारे देश के वास्तविक नायकों के वास्तविक जीवन के संघर्षों पर आधारित थीं। इन दोनों ही फिल्मों के मुख्य अभिनेताओं ने अपने अभिनय करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया, जिसे समीक्षकों ने दिल खोलकर सराहा।
इन दोनों फिल्मों की रिलीज के समय कोई बड़ी राष्ट्रीय छुट्टी नहीं थी, फिर भी दर्शकों के सकारात्मक रिस्पॉन्स और बेहतरीन माउथ पब्लिसिटी के दम पर इन्होंने बॉक्स ऑफिस को हिलाकर रख दिया। हालांकि मेकर्स ने अनजाने में ही 12 जुलाई की तारीख का चुनाव अपनी फिल्मों की रिलीज के लिए किया था, लेकिन इतिहास गवाह है कि यह तारीख बॉलीवुड के लिए सफलता की एक पक्की गारंटी बनकर उभरी। इन दो बेहतरीन फिल्मों के रूप में भारतीय सिनेमा को दो ऐसी कालजयी कृतियां मिलीं, जिन्हें आने वाले कई दशकों तक याद किया जाएगा।











