बॉलीवुड में तारीखों का अपना एक खास इतिहास होता है। कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जो बार-बार किसी न किसी बड़ी फिल्म की वजह से याद की जाती हैं। 1 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है। इस एक तारीख ने तीन अलग-अलग दशकों में तीन बिल्कुल जुदा जॉनर की फिल्मों को सफलता दिलाई। 1994 का जबरदस्त एक्शन-थ्रिलर दौर हो, 2005 का गहरा पॉलिटिकल-क्राइम ड्रामा हो या 2011 की बेबाक एडल्ट-डार्क कॉमेडी, तीनों ने इसी तारीख को थिएटरों में कदम रखा और बॉक्स ऑफिस पर अपने-अपने दौर में सफलता का झंडा गाड़ा।
मोहरा (1994): एक पीढ़ी का सबसे बड़ा ब्लॉकबस्टर
1 जुलाई 1994 को डायरेक्टर राजीव राय की फिल्म 'मोहरा' थिएटरों में उतरी और उस पूरी पीढ़ी की पसंदीदा फिल्म बन गई। उस दशक के युवाओं में इस फिल्म का क्रेज बिल्कुल अलग किस्म का था। अक्षय कुमार ने अमर सक्सेना का और सुनील शेट्टी ने विशाल अग्निहोत्री का किरदार निभाया। दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर जो जानदार ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और दमदार एक्शन पेश किया, उसने थिएटरों में आग लगा दी। रवीना टंडन की ग्लैमरस परफॉर्मेंस और परेश रावल की कल्ट कॉमेडी ने मिलकर फिल्म को एक कंप्लीट पैकेज बना दिया जिसमें हर तरह के दर्शक के लिए कुछ न कुछ था।
विजू शाह का संगीत इस फिल्म की असली ताकत था जिसने 'मोहरा' को अमर कर दिया। 'तू चीज बड़ी है मस्त मस्त' और 'टिप टिप बरसा पानी' जैसे गाने तीन दशक बाद भी हर पार्टी की शान हैं। करीब 3.75 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह एक्शन-थ्रिलर भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगभग 12 करोड़ और दुनिया भर में 22 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर गई। उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म के रूप में 'मोहरा' ने 'ब्लॉकबस्टर' का शानदार दर्जा हासिल किया।
सरकार (2005): जब बाप-बेटे ने मिलकर रचा डार्क ड्रामा
'मोहरा' की रिलीज के ठीक 11 साल बाद, यानी 1 जुलाई 2005 को डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा की 'सरकार' सिनेमाघरों में आई। हॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'द गॉडफादर' पर आधारित यह पॉलिटिकल-क्राइम ड्रामा उस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बनी। इस फिल्म की खासियत यह थी कि मेगास्टार अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन पहली बार किसी फिल्म में इतने सख्त और संजीदा किरदारों में एक साथ नजर आए।
अमिताभ बच्चन ने सुभाष नागरे यानी 'सरकार' का किरदार जिस शांत लेकिन खतरनाक अंदाज में निभाया, उसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। अभिषेक बच्चन ने सरकार के बेटे विष्णु के किरदार में अपने करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक दी। फिल्म का ट्रीटमेंट बेहद डार्क और रियलिस्टिक था जिस वजह से बड़े थिएटरों में इसे कड़ी कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ा, लेकिन मल्टीप्लेक्स और बड़े शहरों में इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। 13 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 24 से 25 करोड़ की कमाई की और 'सेमी हिट' का मजबूत दर्जा पाया।
डेल्ही बेली (2011): इंडियन सिनेमा का सबसे साहसी प्रयोग
1 जुलाई 2011 को आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी 'डेल्ही बेली' थिएटरों में आई और इसने हिंदी सिनेमा में एडल्ट कॉमेडी का एक नया दरवाजा खोला। इमरान खान, वीर दास और कुणाल रॉय कपूर अभिनीत यह फिल्म इंडियन सिनेमा के लिए एक जबरदस्त प्रयोग थी। एक बोल्ड, एडल्ट और डार्क कॉमेडी जो अपने समय से काफी आगे थी, इसने यंग ऑडियंस को थिएटर तक खींचने में कमाल का काम किया।
फिल्म की तेज रफ्तार पेस, इसका दमदार और रियलिस्टिक दिल्ली बैकग्राउंड और 'भाग डीके बोस' जैसे कल्ट गानों ने रिलीज से पहले ही जबरदस्त हाइप बना दी थी। गाली-गलौज और एडल्ट ह्यूमर के बावजूद इसके स्क्रीनप्ले की क्रिटिक्स ने खूब तारीफ की। करीब 24 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस एडल्ट कॉमेडी ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 55 करोड़ से ज्यादा की नेट कमाई और दुनिया भर में 92 करोड़ की कमाई करके 'हिट' का खिताब अपने नाम किया।
एक तारीख, तीन अलग जीत
ये तीनों फिल्में बता देती हैं कि 1 जुलाई का बॉलीवुड के साथ एक खास रिश्ता रहा है। जॉनर, स्टाइल, कास्ट और कहानी के लिहाज से तीनों एकदम अलग हैं, फिर भी तीनों ने इसी एक तारीख पर बॉक्स ऑफिस पर अपनी-अपनी कामयाबी की कहानी लिखी। 90 के दशक का धमाकेदार मसाला एक्शन हो, 2000 के दशक का गंभीर पॉलिटिकल ड्रामा हो या 2010 के दशक की बेबाक एडल्ट कॉमेडी, 1 जुलाई ने हर बार फिल्म मेकर्स को निराश नहीं किया। यह तारीख बॉलीवुड इतिहास में एक भाग्यशाली तारीख के रूप में दर्ज हो चुकी है।













