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चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, सरेंडर रोकने के लिए जमा करने होंगे 5 करोड़ रुपयेबॉलीवुड
8 सित॰ 2026, 11:58 pm (49 दिन पहले)· 2

चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, सरेंडर रोकने के लिए जमा करने होंगे 5 करोड़ रुपये

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 7 चेक बाउंस मामलों में सजा बरकरार रखने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को 5 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पर सरेंडर से छूट दी है।

अभिनेता और हास्य कलाकार राजपाल यादव तथा उनकी पत्नी को चेक बाउंस से जुड़े कई कानूनी मामलों में देश की शीर्ष अदालत से बड़ी अंतरिम राहत प्राप्त हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सात अलग-अलग मामलों में उनकी सजा बरकरार रखे जाने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई स्वीकार कर ली। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को 5 करोड़ रुपये जमा करने की पूर्व शर्त पर आत्मसमर्पण (सरेंडर) से तत्काल राहत प्रदान की है।

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ का निर्देश और शर्त

इस कानूनी मामले की सुनवाई भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में गठित तीन जजों की विशेष पीठ ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। सर्वोच्च अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अपना औपचारिक जवाब प्रस्तुत करने के लिए 15 सितंबर तक का समय तय किया है।

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अदालत के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, सरेंडर से मिली छूट की यह व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी जब याचिकाकर्ता निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक धनराशि जमा कर देंगे। राजपाल यादव और उनकी पत्नी को बुधवार तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये की तय राशि अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। यदि यह राशि समय पर जमा नहीं की जाती है, तो उन्हें मिली यह राहत लागू नहीं रहेगी।

दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले की पृष्ठभूमि

राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसे बीते 10 जुलाई को सुनाया गया था। हाईकोर्ट ने 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' के तहत दर्ज चेक बाउंस के सात मामलों में अभिनेता की दोषसिद्धि और सजा को सही ठहराया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आंशिक राहत देते हुए प्रत्येक मामले में दी गई छह महीने की साधारण कैद की सजा को घटाकर तीन महीने कर दिया था।

सजा की अवधि कम करने के साथ ही हाईकोर्ट ने वित्तीय दंड में भी संशोधन किया था। अदालत ने हर एक मामले में आरोपित जुर्माने की राशि को 1.60 करोड़ रुपये से घटाकर 1.05 करोड़ रुपये कर दिया था। इसके अतिरिक्त न्यायपीठ ने यह भी निर्देश जारी किया था कि सभी सात मामलों की मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में शिकायतकर्ता कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को अभिनेता द्वारा पूर्व में किए गए भुगतानों को भी संज्ञान में लिया था।

सहमति समझौते और सुरक्षा चेक पर याचिकाकर्ताओं का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत एसएलपी में याचिकाकर्ताओं के तर्क दिए गए कि हाईकोर्ट सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुए बाद के एक महत्वपूर्ण सहमति समझौते पर विचार करने में विफल रहा। याचिका में कहा गया कि पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते के तहत पहले सौंपे गए सिक्योरिटी चेक वापस लौटाए जाने थे और उनके स्थान पर नए चेक जारी किए जाने का प्रावधान किया गया था।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जब पुराने चेक के स्थान पर नए चेक जारी करने की सहमति बन चुकी थी, तब पुराने सुरक्षा चेक के आधार पर कानूनी कार्यवाही को उस रूप में आगे बढ़ाना उचित नहीं था। इसी विसंगति और हाईकोर्ट के निष्कर्षों को चुनौती देते हुए राजपाल यादव ने शीर्ष अदालत का रुख किया, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने 5 करोड़ रुपये की जमा शर्त के साथ सरेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को क्या राहत दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को बुधवार तक 5 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पर सरेंडर करने से अंतरिम छूट दी है।
इस मामले की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन शामिल थे?
सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को अपने फैसले में क्या आदेश दिया था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 चेक बाउंस मामलों में सजा बरकरार रखी थी, लेकिन कैद की अवधि 6 महीने से घटाकर 3 महीने और प्रति मामला जुर्माना 1.60 करोड़ रुपये से घटाकर 1.05 करोड़ रुपये कर दिया था।
राजपाल यादव की याचिका में क्या मुख्य तर्क दिया गया है?
याचिका में तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट दोनों पक्षों के बीच हुए बाद के उस सहमति समझौते पर विचार करने में विफल रहा, जिसके तहत पुराने सिक्योरिटी चेक वापस होने थे और नए चेक जारी होने थे।
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