उत्तराखंड की राजनीति और मनोरंजन जगत में इन दिनों एक मंच पर हुई तनातनी को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। कुंजापुरी देवी मेले के दौरान मचे बवाल के बाद अब उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बड़ा बयान देते हुए माफी मांगने की सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जिसके चलते उन्हें किसी से माफी मांगनी पड़े। इस ताजा रुख ने उस दावे को भी चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि मंत्री ने फोन करके गायक से खेद जताया था।
माफी के दावों पर सुबोध उनियाल की दो टूक
सुबोध उनियाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके माफी मांगने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्हें आयोजन स्थल पर आने से बचना चाहिए था या कम से कम दर्शकों और आयोजकों को इस बारे में पहले ही बता देना चाहिए था। मंत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब किसी प्रसिद्ध कलाकार को आमंत्रित किया जाता है, तो जनता और श्रोता उनसे बेहतरीन प्रस्तुति की उम्मीद रखते हैं।
कुंजापुरी देवी मेले की वह घटना
यह पूरा विवाद 18 अक्टूबर को टिहरी गढ़वाल के प्रसिद्ध कुंजापुरी देवी मेले के दौरान सामने आया था। जब दलेर मेहंदी मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे, तभी मंत्री सुबोध उनियाल ने बीच कार्यक्रम में टोकते हुए हस्तक्षेप किया था। उस वक्त आरोप लगाए गए थे कि गायक ने कथित तौर पर नशे की हालत में प्रस्तुति दी और वे गानों पर सिर्फ लिप-सिंक कर रहे थे। इस घटना के कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी थीं।
मीका सिंह की ओर से आया था बयान
इस पूरे घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद मशहूर गायक मीका सिंह अपने बड़े भाई के समर्थन में आगे आए थे। मीका सिंह की टीम ने दावा किया था कि सुबोध उनियाल ने फोन करके दलेर मेहंदी से माफी मांग ली है। साथ ही यह भी सफाई दी गई थी कि दलेर मेहंदी शराब नहीं पीते और उस दौरान उनकी तबीयत वाक़ई काफी नासाज़ थी। इस दावे के बाद मामला शांत होता दिख रहा था, लेकिन मंत्री के ताज़ा बयान ने एक बार फिर से इस विवाद को हवा दे दी है।
मुख्यमंत्री की मध्यस्थता और आगे का घटनाक्रम
मीका सिंह के अनुसार इस विवाद के बढ़ने पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था। मुख्यमंत्री ने दोनों कलाकारों से बातचीत कर मंत्री की ओर से खेद जताया था और दोनों भाइयों को उत्तराखंड आने का आधिकारिक निमंत्रण भी दिया था। हालांकि इन तमाम कोशिशों के बावजूद सुबोध उनियाल का यह ताजा तेवर यह साबित करता है कि मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का दौर जारी है।


















