बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी होती है जो पर्दे की कहानी से कम दिलचस्प नहीं होती। 22 जून 1990 को रिलीज हुई 'घायल' भी उन्हीं फिल्मों में से एक है, जिसकी स्क्रिप्ट को गिनती के नहीं बल्कि ढेरों प्रोड्यूसरों ने ठुकरा दिया था। आखिरकार जब कोई राजी नहीं हुआ तो हीरो सनी देओल अपने पिता और सुपरस्टार धर्मेंद्र के पास पहुंचे और यहीं से इस फिल्म की किस्मत बदल गई।
कमल हासन के लिए लिखी गई कहानी, बनी सनी देओल की पहचान
'घायल' की स्क्रिप्ट, स्क्रीनप्ले और डायलॉग तीनों राजकुमार संतोषी ने खुद लिखे थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह कहानी शुरुआत में कमल हासन को ध्यान में रखकर तैयार की थी। बतौर डायरेक्टर यह राजकुमार संतोषी की पहली फिल्म थी, हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में वे नए नहीं थे। इससे पहले वे मशहूर निर्देशक गोविंद निहलानी की फिल्म 'अर्ध सत्य' में असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके थे। फिल्म मेकिंग उनके खून में थी, उनके पिता पीएल संतोषी खुद एक जाना-माना नाम थे, वे फिल्म निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक और गीतकार, चारों भूमिकाओं में सक्रिय रह चुके थे।
हर दरवाजे से मिली ना, फिर भी हार नहीं मानी
जब कमल हासन वाला प्लान आगे नहीं बढ़ पाया, तो राजकुमार संतोषी यह कहानी लेकर सनी देओल के पास पहुंचे। सनी देओल को स्क्रिप्ट पसंद आ गई, लेकिन प्रोड्यूसर सुब्बा राव ने इसे बनाने के लिए एक शर्त रख दी, उन्होंने कहा कि सनी देओल अपनी फीस कम करें। सनी देओल इसके लिए तैयार भी हो गए, फिर भी बात नहीं बनी। इसके बाद दोनों ने मिलकर कई और प्रोड्यूसरों के दरवाजे खटखटाए। किसी को कहानी पसंद नहीं आई तो किसी को हीरो पर भरोसा नहीं था। हर बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा था।
सनी देओल ने खुद बताई थी संघर्ष की कहानी
सनी देओल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'घायल' को बनाने के दौरान उन्हें कितनी दिक्कतों से गुजरना पड़ा। उनके मुताबिक, जब राजकुमार संतोषी यह सब्जेक्ट लेकर उनके पास पहुंचे थे, तो उनके साथ आया प्रोड्यूसर बीच में ही भाग गया। सनी देओल ने कहा था कि उन्होंने राजकुमार संतोषी से पूछा था कि साइन तो मुझे करना है, फिर प्रोड्यूसर क्यों भाग गया। इसके बाद दोनों की प्रोड्यूसर की तलाश शुरू हुई और वे ढेर सारे लोगों के पास गए, लेकिन किसी को भी सब्जेक्ट पसंद नहीं आ रहा था। सनी देओल को हैरानी होती थी कि जो कहानी उन्हें खुद इतनी अच्छी लग रही है, वह दूसरों को क्यों नहीं भा रही। आखिर में वे अपने पिता के पास पहुंचे, उन्हें कहानी सुनाई और पिता को यह पसंद आ गई। यहीं से सनी देओल को हौसला मिला और धर्मेंद्र ने कहा कि इसे प्रोड्यूस करो, और इस तरह 'घायल' का निर्माण शुरू हुआ।
धर्मेंद्र के घर से शुरू हुआ मुहूर्त
फिल्म का म्यूजिक बप्पी लहरी ने तैयार किया था और इसका गाना 'सोचना क्या, जो भी होगा देखा जाएगा' उस दौर में खूब पॉप्युलर हुआ था। 'घायल' का मुहूर्त शॉट धर्मेंद्र के पिता केवल किशन सिंह देओल ने दिया था, जबकि फिल्म की लॉन्चिंग के मौके पर सनी देओल की मां प्रकाश कौर भी मौजूद रही थीं। कहा जाता है कि सनी देओल फिल्म में डिंपल कपाड़िया को लेना चाहते थे, लेकिन धर्मेंद्र ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद मीनाक्षी शेषाद्रि को फिल्म में साइन किया गया।
किरदारों की मजबूत टीम
फिल्म में सनी देओल ने अजय मेहरा और अमरीश पुरी ने बलवंत राय का किरदार निभाया था। इनके अलावा राज बब्बर, मौसमी चटर्जी, शफी इनामदार और कुलभूषण खरबंदा जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में अन्नू कपूर का रोल भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने अपनी मौजूदगी का एहसास जरूर करवाया था।
बॉक्सर भाई की तलाश जो बन गई क्लासिक कहानी
'घायल' की कहानी शुरू से आखिर तक दर्शकों को बांधे रखती है। इसमें अजय मेहरा यानी सनी देओल एक बॉक्सर है, जिसका बड़ा भाई अशोक मेहरा यानी राज बब्बर बलवंत राय यानी अमरीश पुरी के लिए काम करता है। बलवंत राय अशोक मेहरा को गायब करवा देता है और अपने भाई की तलाश में निकला अजय मेहरा आखिरकार बलवंत राय तक जा पहुंचता है। एक्शन के साथ-साथ फिल्म में इमोशन का पुट भी भरपूर था, यही वजह रही कि दर्शकों ने इसे दिल से अपनाया।
एक ही दिन 'दिल' से टक्कर, बाजी मार ले गई आमिर खान की फिल्म
मजेदार तथ्य यह है कि 'घायल' 22 जून 1990 को जिस दिन रिलीज हुई थी, उसी दिन आमिर खान की फिल्म 'दिल' भी सिनेमाघरों में उतरी थी। दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर सीधी टक्कर हुई थी, और इस रेस में बाजी 'दिल' के हाथ लगी। 'दिल' उस साल यानी 1990 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी।
ढाई करोड़ की लागत, 20 करोड़ से ज्यादा की कमाई
हालांकि 'दिल' से पिछड़ने के बावजूद 'घायल' ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया। फिल्म का बजट करीब ढाई करोड़ रुपये था, जबकि इसने उस दौर में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली थी। यह 1990 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई। इतना ही नहीं, फिल्म को 2 नेशनल अवॉर्ड और 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे। समय बीतने के साथ 'घायल' एक कल्ट फिल्म में तब्दील हो गई और आज भी इसकी एक मजबूत फैन फॉलोइंग मौजूद है।
सनी देओल-राजकुमार संतोषी की जोड़ी ने बाद में भी रचा इतिहास
'घायल' की कामयाबी के बाद सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी ने आगे चलकर 'दामिनी' और 'घातक' जैसी सुपरहिट फिल्में भी दीं। खास बात यह रही कि इन तीनों ही फिल्मों में अमरीश पुरी ने दमदार भूमिकाएं निभाईं और अपनी छाप छोड़ी।











