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जीनत अमान ने बताया, पुराने दौर में हीरोइनों को सिर्फ गाने-डांस के लिए रखा जाता था फिल्मों मेंबॉलीवुड
6 जुल॰ 2026, 8:15 pm (45 दिन पहले)· 3

जीनत अमान ने बताया, पुराने दौर में हीरोइनों को सिर्फ गाने-डांस के लिए रखा जाता था फिल्मों में

जीनत अमान ने डॉक्यूमेंट्री 'जर्नी इनटू इंडिया' में बताया कि पुराने दौर में करीब 90 फीसदी फिल्मों में एक्ट्रेसेस का काम सिर्फ गाना-डांस करना और हीरो के इर्द-गिर्द नजर आना भर था, लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है.

बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री जीनत अमान अक्सर पुराने दौर की फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े किस्से सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. इस बार उन्होंने बताया कि 70 और 80 के दशक में हिंदी सिनेमा में अभिनेत्रियों के लिए स्क्रिप्ट में जगह कितनी सीमित हुआ करती थी. उनके मुताबिक उस दौर में एक्ट्रेसेस के हिस्से गिनी-चुनी तरह की भूमिकाएं ही आती थीं, हालांकि अब यह स्थिति काफी हद तक बदल चुकी है.

जीनत अमान ने अपने करियर में हर तरह के किरदार निभाए हैं. 70-80 के दशक में वह लगातार चर्चा में रहीं और बोल्ड किरदारों के जरिए उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई. डॉक्यूमेंट्री 'जर्नी इनटू इंडिया' के दौरान हुई बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि लंबे समय तक ज्यादातर अभिनेत्रियों को फिल्मों में सिर्फ दिखावे के लिए ही रखा जाता था.

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90 फीसदी फिल्मों में सीमित भूमिका

'यादों की बारात' से पहचान बनाने वाली जीनत अमान ने कहा कि करीब 90 फीसदी फिल्मों में एक्ट्रेसेस को ऐसे किरदार दिए जाते थे, जिनका कहानी में कोई खास योगदान नहीं होता था. उनके अनुसार उस दौर में हीरोइन का काम सिर्फ गाने गाना, डांस करना और परदे पर हीरो के आसपास नजर आना भर रह जाता था. कहानी का पूरा भार हीरो के किरदार पर टिका होता था और एक्ट्रेस का रोल उसी के इर्द-गिर्द सिमटा रहता था.

अब बदल रही है तस्वीर

जीनत अमान ने आगे कहा कि बॉलीवुड में अब धीरे-धीरे बदलाव नजर आ रहा है. उनके मुताबिक आज की अभिनेत्रियां सिर्फ ग्लैमरस दिखने वाले रोल तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वे दमदार और कहानी को आगे बढ़ाने वाले किरदार मांग रही हैं. उन्होंने बताया कि अब कई अभिनेत्रियां ऐसी फिल्मों में काम करने से साफ मना कर देती हैं, जहां उनके लिए करने को कुछ खास न हो. वे ऐसी भूमिकाएं चाहती हैं, जिनमें उनका बराबर का योगदान हो और जिनमें उनके लिए वाकई कोई काम हो.

जीनत अमान के मुताबिक अच्छी बात यह है कि अब अभिनेत्रियों को ऐसे मौके मिलने भी लगे हैं. उनका मानना है कि भारतीय महिलाओं को पर्दे पर ऐसे किरदार देखने को मिलने चाहिए, जिनसे वे खुद को जोड़ पाएं, न कि सिर्फ सजावट की चीज के तौर पर पेश किए गए किरदार.

मिस इंडिया से बॉलीवुड तक का सफर

जीनत अमान के करियर पर नजर डालें तो उन्होंने साल 1970 में फेमिना मिस इंडिया और मिस एशिया पैसिफिक इंटरनेशनल का खिताब अपने नाम किया था. इसके बाद उन्होंने 1971 में फिल्म 'हलचल' से बॉलीवुड में कदम रखा. हालांकि उन्हें असली पहचान देव आनंद की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' से मिली. इसके बाद उन्होंने 'यादों की बारात', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'अजनबी', 'वारंट', 'चोरी मेरा काम', 'धरम वीर', 'छैला बाबू', 'हम किसी से कम नहीं' और 'द ग्रेट गैम्बलर' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया. इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शुमार करा दिया.

सत्यम शिवम सुंदरम ने बनाया रातोंरात स्टार

'हरे रामा हरे कृष्णा' से इंडस्ट्री में अपनी धाक जमाने वाली जीनत अमान साल 1978 में आई फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' में रूपा का किरदार निभाकर रातोंरात स्टार बन गई थीं. इस फिल्म के बाद वह सिर्फ फिल्ममेकर्स की ही नहीं, बल्कि दर्शकों की भी पसंदीदा अभिनेत्री बन गई थीं.

सवाल-जवाब

जीनत अमान ने किस डॉक्यूमेंट्री में यह बात कही?
जीनत अमान ने यह बात डॉक्यूमेंट्री 'जर्नी इनटू इंडिया' के दौरान हुई बातचीत में कही थी.
जीनत अमान के मुताबिक पुराने दौर में कितनी फिल्मों में एक्ट्रेसेस का रोल सीमित होता था?
उनके मुताबिक करीब 90 फीसदी फिल्मों में एक्ट्रेसेस को ऐसे किरदार मिलते थे जिनका कहानी में खास योगदान नहीं होता था.
उस दौर में एक्ट्रेसेस का काम मुख्य रूप से क्या रहता था?
जीनत अमान के अनुसार एक्ट्रेसेस का काम सिर्फ गाने गाना, डांस करना और हीरो के आसपास नजर आना भर रह जाता था.
जीनत अमान ने बॉलीवुड में आज के बदलाव को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आज की अभिनेत्रियां दमदार और कहानी को आगे बढ़ाने वाले किरदार मांग रही हैं और खाली-खाली रोल वाली फिल्में ठुकरा रही हैं.
जीनत अमान ने बॉलीवुड करियर की शुरुआत कब और कैसे की?
उन्होंने 1970 में फेमिना मिस इंडिया और मिस एशिया पैसिफिक इंटरनेशनल का खिताब जीता और 1971 में फिल्म 'हलचल' से बॉलीवुड में डेब्यू किया.
जीनत अमान को असली पहचान किस फिल्म से मिली?
उन्हें असली पहचान देव आनंद की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' से मिली.
जीनत अमान को रातोंरात स्टार किस फिल्म ने बनाया?
साल 1978 में आई फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' में रूपा का किरदार निभाकर वह रातोंरात स्टार बन गई थीं.
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