भारतीय मनोरंजन जगत में रामायण की गाथा को समय-समय पर विभिन्न अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने जीवंत किया है। जब भी पर्दे पर भगवान राम और माता सीता के रूप में किसी नए चेहरे के आने की चर्चा होती है, तो दर्शकों के जेहन में उन कलाकारों की यादें ताजा हो जाती हैं जिन्होंने दशकों पहले इन पात्रों को अपनी अभिनय कला से अमर बना दिया था। मूक फिल्मों के शुरुआती दिनों से लेकर आधुनिक तकनीक वाले बड़े बजट के सिनेमा तक, राम और सीता का किरदार निभाना हर अभिनेता के लिए एक बड़ी चुनौती और सौभाग्य की बात रही है।
लंगा दहन और अन्ना सालुंके का अनूठा इतिहास
भारतीय सिनेमा में रामायण आधारित फिल्मों का श्रीगणेश वर्ष 1917 में आई फिल्म ‘लंका दहन’ से माना जाता है। उस दौर में अभिनय के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रियता बेहद सीमित थी और इसे सामाजिक रूप से उचित नहीं समझा जाता था। इस बड़ी बाधा के चलते फिल्म निर्माता को एक ऐसा रास्ता निकालना पड़ा जिससे कहानी आगे बढ़ सके। नतीजतन, अभिनेता अन्ना सालुंके ने इस फिल्म में भगवान राम और माता सीता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिकाओं को एक साथ निभाया था। इस प्रकार वे भारतीय सिनेमा के इतिहास में राम का किरदार पर्दे पर उतारने वाले सबसे शुरुआती अभिनेताओं में शुमार हो गए।
स्वर्ण युग में प्रेम अदीब और शोभना समर्थ की जोड़ी
हिंदी सिनेमा के शुरुआती कालखंड में जब पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों का दौर परवान चढ़ रहा था, तब प्रेम अदीब और शोभना समर्थ की जोड़ी ने राम और सीता के रूप में अपार प्रसिद्धि प्राप्त की। इन दोनों कलाकारों ने वर्ष 1942 में प्रदर्शित फिल्म ‘भारत मिलाप’ और वर्ष 1943 में आई चर्चित फिल्म ‘राम राज्य’ में क्रमशः भगवान राम और माता सीता के रूप में स्क्रीन साझा की। उस समय इन फिल्मों को देखने के लिए सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती थी और जनता इन दोनों कलाकारों को असल भगवान की तरह सम्मान देने लगी थी।
महिपाल और अनीता गुहा का संपूर्ण रामायण सफर
दशक बीतने के साथ सिनेमा का दायरा और बड़ा हुआ तथा तकनीक में भी सुधार देखने को मिला। इसी कड़ी में वर्ष 1961 में बड़े पर्दे पर ‘संपूर्ण रामायण’ नाम से एक नई फिल्म आई। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं के लिए महिपाल को भगवान राम के रूप में और अनीता गुहा को माता सीता के रूप में चुना गया। दोनों कलाकारों ने अपनी सहज अभिनय शैली से इन पौराणिक चरित्रों में जान फूंक दी और फिल्म को दर्शकों की तरफ से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
टेलीविजन का स्वर्णकाल और अरुण गोविल-दीपिका चिखलिया
जब भी भारतीय टेलीविजन के इतिहास का जिक्र होता है, तो रामानंद सागर द्वारा निर्देशित धारावाहिक ‘रामायण’ (1987) का नाम सबसे ऊपर आता है। इस धारावाहिक ने लोकप्रियता के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए और घर-घर में तहलका मचा दिया। इस शो में अरुण गोविल ने भगवान राम और दीपिका चिखलिया ने माता सीता की भूमिका निभाकर ऐसा इतिहास रचा कि आज भी लोग उन्हें उन्हीं रूपों में याद करते हैं। उस दौर में जब यह शो प्रसारित होता था, तो गलियां सूनी हो जाती थीं और लोग इन कलाकारों को श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे।
गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी की ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री
टेलीविजन के बदलते दौर में वर्ष 2008 से 2009 के बीच एक बार फिर छोटे परदे पर रामायण की पुनरावृत्ति हुई। इस नए संस्करण में गुरमीत चौधरी ने भगवान राम का किरदार निभाया जबकि देबिना बनर्जी ने माता सीता की भूमिका अदा की। इस युवा जोड़ी को दर्शकों ने काफी सराहा और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया। इस धारावाहिक की शूटिंग के दौरान ही दोनों कलाकारों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने असल जीवन में भी एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला करते हुए विवाह कर लिया।
सिया के राम और आशीष शर्मा-मद्राक्षी मुंडे का नया दृष्टिकोण
टेलीविजन पर वर्ष 2015 से 2016 के दौरान प्रसारित हुआ शो ‘सिया के राम’ इस पौराणिक गाथा को एक बिल्कुल नए और अनूठे दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता है। इस धारावाहिक की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें पूरी कहानी को पारंपरिक पुरुष दृष्टिकोण के बजाय माता सीता के नजरिए से पर्दे पर उतारा गया था। इसमें आशीष शर्मा ने भगवान राम की भूमिका निभाई और मद्राक्षी मुंडे ने माता सीता का किरदार अदा किया। इस प्रस्तुति को इसकी पटकथा और मुख्य कलाकारों के दमदार अभिनय के कारण दर्शकों से अलग पहचान मिली।
प्रभास और कृति सेनन की आधुनिक आदिपुरुष
हाल के वर्षों में रामायण की कहानी को बड़े पर्दे पर उतारने का सबसे बड़ा प्रयास वर्ष 2023 में रिलीज हुई फिल्म ‘आदिपुरुष’ के जरिए किया गया। ओम राउत के निर्देशन में बनी इस भव्य फिल्म में प्रभास ने राघव यानी भगवान राम की भूमिका निभाई, जबकि कृति सेनन ने जानकी यानी माता सीता के किरदार को जीवंत किया। यह फिल्म अपनी विशाल स्टार कास्ट और आधुनिक वीएफएक्स के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय तक चर्चाओं और बहसों का केंद्र बनी रही।


















