भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा मुक्त व्यापार समझौता आज, 15 जुलाई से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस करार के बाद ब्रिटेन का लगभग पूरा बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुल गया है, वहीं भारतीय ग्राहकों के लिए भी कुछ चुनिंदा ब्रिटिश उत्पाद पहले से सस्ते हो जाएंगे। यानी यह समझौता दोनों देशों के कारोबारियों और आम खरीदारों, दोनों के लिए मायने रखता है।
समझौते के लागू होने से ठीक पहले नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे 'गोल्ड स्टैंडर्ड' और अपनी तरह का पहला व्यापार समझौता बताया। यह CETA मोदी सरकार की ओर से लागू किया गया छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले सरकार मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ और ओमान के साथ इस तरह के करार कर चुकी है।
स्कॉच व्हिस्की पर सबसे बड़ी राहत
भारत आने वाले ब्रिटिश उत्पादों में सबसे ज्यादा फायदा स्कॉच व्हिस्की को होने जा रहा है। समझौते के तहत ब्रिटिश व्हिस्की पर लगने वाला आयात शुल्क तुरंत प्रभाव से 150% से घटकर 75% रह गया है। इतना ही नहीं, अगले दस साल में यह शुल्क धीरे-धीरे और घटकर 40% तक आ जाएगा। यही वजह है कि व्हिस्की के शौकीनों के लिए यह करार किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है।
व्हिस्की के अलावा दूसरी प्रीमियम शराब पर भी राहत मिली है। इनमें साइडर, मीड, साके, ब्रांडी, बर्बन, रम, जिन, वोदका, लिकर और टकीला जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन पर लगने वाला 150% का सामान्य शुल्क पहले साल में घटकर 110% और दसवें साल तक 75% रह जाएगा। हालांकि यह छूट एक न्यूनतम आयात मूल्य से ऊपर के उत्पादों पर ही मिलेगी, जो आम तौर पर करीब 5 डॉलर प्रति लीटर के आसपास है।
महंगी ब्रिटिश कारें अब पहुंच में
समझौते का बड़ा असर लग्जरी गाड़ियों पर भी दिखेगा। पूरी तरह से तैयार होकर आने वाली (कंप्लीटली बिल्ट यूनिट) महंगी ब्रिटिश कारों पर अभी तक 110% तक का भारी शुल्क लगता था। नए नियमों के तहत यह शुल्क पहले साल में घटकर 30% और पांच साल बाद सिर्फ 10% रह जाएगा, लेकिन यह छूट एक कोटा व्यवस्था के तहत मिलेगी। यह नियम 3,000cc और उससे ऊपर के पेट्रोल मॉडल तथा 2,500cc से ऊपर के डीजल मॉडल पर लागू होगा।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन, मैक्लारेन और लैंड रोवर जैसे लग्जरी ब्रांड को मिलने वाला है। जगुआर लैंड रोवर इंडिया ने तो इसका फायदा ग्राहकों तक पहुंचाना भी शुरू कर दिया है। कंपनी ने रेंज रोवर SV की एक्स-शोरूम कीमत में 75 लाख रुपये की कटौती कर दी है, जिससे इसकी कीमत 4.25 करोड़ रुपये से घटकर 3.5 करोड़ रुपये रह गई है।
और क्या-क्या होगा सस्ता
व्हिस्की और कारों के अलावा ब्रिटिश चॉकलेट, मीठे बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, कॉस्मेटिक और दूसरे उपभोक्ता उत्पादों पर भी शुल्क कम होगा, जिससे ये सामान भारतीय बाजार में सस्ते मिल सकते हैं।
दूसरी ओर, सरकार ने घरेलू उद्योग और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ श्रेणियों को शुल्क छूट से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटा अनाज (मिलेट), दालें, खाद्य तेल, तिलहन, ताजे सेब, अखरोट, वे और मॉडिफाइड वे, ब्लू-वेन्ड चीज, कुछ खास बीज श्रेणियां, सोने की छड़ें और स्मार्टफोन शामिल हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए खुला ब्रिटेन का बाजार
CETA के तहत ब्रिटेन पहले ही दिन से भारत की 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क खत्म कर देगा। समझौते के आंकड़ों के मुताबिक इससे प्रोसेस्ड फूड पर 70% तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5%, इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पुर्जों पर 18%, चमड़ा और जूतों पर 16%, कपड़ा और परिधान पर 12% और रसायन तथा दवाओं पर 8% तक का शुल्क हट जाएगा।
कपड़ा और परिधान क्षेत्र को अब 12% के बजाय शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे वह अंतर खत्म हो जाएगा जो अब तक भारतीय निर्यातकों को बांग्लादेश, पाकिस्तान और कंबोडिया के मुकाबले पीछे रखता था, क्योंकि इन देशों को पहले से ही ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंच हासिल थी। इसका सीधा फायदा तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, भदोही और मुरादाबाद जैसे मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों को मिलेगा, जहां मांग बढ़ने की उम्मीद है।
दवा और मेडिकल उपकरणों को बढ़त
दवा क्षेत्र को भी शून्य शुल्क पहुंच मिली है। भारत दुनिया भर में 23.31 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात करता है, जबकि ब्रिटेन हर साल करीब 30 अरब डॉलर की दवाएं आयात करता है। शुल्क हटने के बाद भारतीय जेनेरिक दवाएं यूरोप में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी, जो भारत का सबसे बड़ा दवा निर्यात बाजार है।
इसके साथ ही सर्जिकल उपकरण, डायग्नोस्टिक उपकरण, ECG मशीन और X-ray सिस्टम जैसे मेडिकल उपकरणों को भी शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा।
चमड़ा, कृषि और भारतीय गाड़ियां
चमड़ा और जूता निर्यातकों को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने वाला है। ब्रिटेन 8.5 अरब डॉलर के चमड़े और जूतों का आयात करता है, जबकि भारत का मौजूदा निर्यात सिर्फ 440 मिलियन डॉलर का है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़त की काफी गुंजाइश है।
कृषि और प्रोसेस्ड फूड के मामले में ब्रिटेन आज भी भारतीय चाय, आम, अंगूर, मसालों और प्रोसेस्ड फूड के लिए एक प्रीमियम बाजार बना हुआ है। सरकार को उम्मीद है कि अगले तीन साल में ब्रिटेन को होने वाला कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात 50% से ज्यादा बढ़ेगा, जिसका सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों को मिलेगा।
ब्रिटेन ने भारतीय इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री कारों पर भी रियायत दी है। CETA के तहत ब्रिटेन में यात्री कारों पर लगने वाला सामान्य शुल्क 10% है।










