अब भारत में ऐसा कोई सामान नहीं बिक पाएगा जिसे बनाने में जबरन मजदूरी कराई गई हो। केंद्र सरकार ने विदेश व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए यह अहम फैसला लिया है, जिसके तहत जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जा सकेगी। यह कदम ऐसे वक्त पर उठाया गया है जब अमेरिका भारत समेत कई देशों में जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों की जांच में जुटा हुआ है। जानकारों का मानना है कि यह फैसला भारत के व्यापारिक नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर लाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT ने नीति में एक नया प्रावधान जोड़ा है। इस व्यवस्था के मुताबिक अगर किसी जांच में यह साफ हो जाता है कि कोई उत्पाद पूरी तरह या फिर आंशिक रूप से जबरन मजदूरी के जरिए बनाया गया है, तो सरकार के पास उसके आयात पर रोक लगाने का अधिकार होगा। हालांकि अभी तक किसी एक खास देश या किसी एक विशेष प्रोडक्ट पर तुरंत प्रभाव से पाबंदी नहीं लगाई गई है।
30 दिन बाद जमीन पर उतरेगा नया नियम
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना कहती है कि यह नया प्रावधान राजपत्र में प्रकाशित होने के 30 दिन बाद अमल में आएगा। इसके बाद DGFT जांच के नतीजों को आधार बनाकर, जरूरत महसूस होने पर, किसी भी उत्पाद के आयात पर पाबंदी लगाने वाली अलग अधिसूचना जारी कर सकेगा। यानी रोक सीधे नहीं, बल्कि जांच के बाद केस-दर-केस लगाई जाएगी।
किन सामानों पर लटकेगी तलवार
फिलहाल सरकार ने किसी उत्पाद का नाम उजागर नहीं किया है। लेकिन दुनिया भर में कपास और टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरियां, सोलर पैनल से जुड़े उत्पाद, सी-फूड, धातु और दूसरे औद्योगिक सामान ऐसे क्षेत्र गिने जाते हैं जहां जबरन मजदूरी को लेकर अक्सर जांच होती रही है। ऐसे में आगे चलकर जांच के आधार पर इन्हीं श्रेणियों के कुछ उत्पाद इस नियम की जद में आ सकते हैं।
अमेरिकी जांच के बीच आया कदम
बीते कुछ महीनों में अमेरिका ने भारत सहित कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को लेकर जांच शुरू की है। अमेरिका का आरोप है कि कई देशों ने ऐसे उत्पादों पर कोई असरदार रोक नहीं लगाई है। ऐसे माहौल में भारत का यह कदम इस बात का संकेत है कि वह वैश्विक श्रम मानकों को अपनाने और अपनी व्यापार व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
भारत को क्या मिलेगा फायदा
इस फैसले से भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साख और मजबूत होगी। साथ ही आने वाले समय में अमेरिका और दूसरे देशों के साथ होने वाली व्यापार वार्ताओं में भारत का पलड़ा भारी रह सकता है। सरकार की असली मंशा यही है कि भारतीय बाजार में सिर्फ वही उत्पाद दाखिल हों, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन करते हुए बनाया गया हो। इससे उपभोक्ताओं तक साफ-सुथरी आपूर्ति श्रृंखला वाला सामान पहुंचेगा।










