राष्ट्रीय राजधानी और उससे सटे प्रमुख उपनगरों में अपना खुद का मकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के बजट पर भारी दबाव बन गया है। दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में आवासीय फ्लैटों तथा मकानों की कीमतें पिछले एक वर्ष में तेजी से ऊपर गई हैं। चालू वित्तवर्ष की जुलाई से सितंबर वाली तिमाही में दिल्ली-एनसीआर के आवासीय बाजार में संपत्तियों के औसत दाम बीते वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुके हैं।
एनसीआर में प्रति वर्ग फुट 1,000 रुपये से ज्यादा का इजाफा
रियल एस्टेट सलाहकार फर्म एनारॉक के ताजा विश्लेषण के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में दिल्ली-एनसीआर के रिहायशी बाजार में संपत्तियों की औसत दर 9,980 रुपये प्रति वर्ग फुट दर्ज की गई है। पिछले वित्तवर्ष की इसी समान तिमाही के दौरान यही दर 8,900 रुपये प्रति वर्ग फुट पर थी। इस प्रकार मात्र एक वर्ष के अंतराल में ही खरीदारों के लिए प्रति वर्ग फुट दर में 1,080 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हो चुकी है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि निर्माण सामग्री के महंगे होने और अधिकांश बिल्डरों द्वारा प्रीमियम व लग्जरी श्रेणियों के प्रोजेक्ट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से कीमतों में यह तेजी आई है।
देश के शीर्ष सात शहरों में भी संपत्तियां हुईं महंगी
कीमतों में वृद्धि का यह सिलसिला केवल राजधानी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी दरों में लगातार उछाल दिख रहा है। देश के सात शीर्ष शहरों में रिहायशी संपत्तियों की औसत दर सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गई है, जो पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में 9,105 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। हालांकि, अन्य सभी महानगरों की तुलना में दिल्ली-एनसीआर ने कीमतों में 12 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ सबसे तेज रफ्तार दर्ज की है।
एनारॉक के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के बाद के दौर में सभी प्रमुख केंद्रों पर आवास की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है। जमीन के महंगे सौदों के साथ-साथ सीमेंट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्रियों की लागत बढ़ने से डेवलपर्स के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा विकल्प नहीं बचा। अध्ययन में शामिल सात प्रमुख केंद्रों में बेंगलुरु, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता शामिल हैं, जहां आवासीय बाजार में यह तेजी साफ नजर आ रही है।
किफायती मकानों की मौजूदा 45 लाख की सीमा में बदलाव की तैयारी
रियल एस्टेट डेवलपर्स के शीर्ष संगठन क्रेडाई ने स्पष्ट किया है कि निर्माण लागत में आए भारी उछाल के बाद अब पुरानी मूल्य सीमा में किफायती मकान बना पाना व्यावहारिक नहीं रह गया है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि किफायती श्रेणी के तहत आने वाले मकानों की परिभाषा को संशोधित किया जाए और इसकी कीमत सीमा बढ़ाई जाए। वर्तमान नियमों के तहत 45 लाख रुपये तक के मकान को किफायती या अफॉर्डेबल माना जाता है। क्रेडाई ने उम्मीद जताई है कि आगामी 6 महीने के भीतर केंद्र सरकार इस परिभाषा और मूल्य सीमा में संशोधन कर सकती है, जिससे इस सेक्टर में नए प्रोजेक्ट्स को दोबारा गति मिल सके।






















