धान की रोपाई के उपरांत खेतों में पनपने वाले खरपतवार फसल की पैदावार के लिए सबसे बड़े खतरा माने जाते हैं। ये अवांछित पौधे मिट्टी में मौजूद नमी, धूप और जरूरी पोषक तत्वों को धान के पौधों से पहले ही सोख लेते हैं, जिससे मुख्य फसल कमजोर हो जाती है और विकास पूरी तरह रुक जाता है। आंकड़ों के अनुसार, यदि इन खरपतवारों का प्रबंधन उचित समय पर न किया जाए, तो किसान को अपनी कुल पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। शाहजहांपुर के प्रगतिशील किसान रनजोद सिंह के अनुसार, फसल की सुरक्षा के लिए रोपाई के शुरुआती 15 से 30 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
खरपतवार के प्रकार और उनसे होने वाली हानि
धान के खेतों में सवां, मोथा और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार सबसे अधिक सक्रिय होते हैं। ये खरपतवार मुख्य फसल के साथ संसाधनों के लिए सीधा मुकाबला करते हैं। जब मिट्टी के नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों का बड़ा हिस्सा ये खरपतवार ग्रहण कर लेते हैं, तो धान के पौधे कुपोषित होकर बौने रह जाते हैं। इसके अतिरिक्त, ये अवांछित पौधे कीड़ों और विभिन्न बीमारियों के लिए पनाहगाह का काम करते हैं, जिससे खेत में संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है और फसल की कुल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
रासायनिक नियंत्रण का सही समय और विधि
खरपतवार नियंत्रण के लिए सही दवा और सही समय का चुनाव करना सफलता की कुंजी है। रोपाई के तुरंत बाद, यानी 3 दिनों के भीतर, रासायनिक छिड़काव करना सबसे प्रभावी माना जाता है। इस अवधि में किसान Pretilachlor 50% EC की 500 ml मात्रा या Butachlor 50% EC की 1 से 1.5 लीटर मात्रा का प्रति एकड़ उपयोग कर सकते हैं। यदि शुरुआती चरण में खरपतवार नाशक का प्रयोग नहीं हो पाया है, तो रोपाई के 20 से 25 दिन बाद बिस्पायरीबैक सोडियम (Bispyribac Sodium 10% SC) का उपयोग एक अचूक विकल्प है। इसके लिए 80 ml दवा को 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए।
छिड़काव के दौरान बरतने वाली सावधानियां
दवा के छिड़काव में थोड़ी सी लापरवाही फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। रनजोद सिंह का सुझाव है कि रोपाई के तुरंत बाद डाले जाने वाले रसायनों के समय खेत में 2 से 3 इंच पानी का जमा होना आवश्यक है और यह जलस्तर कम से कम 4 से 5 दिनों तक बना रहना चाहिए। इसके विपरीत, 20 दिन बाद जब खड़ी फसल में दवा का छिड़काव किया जाए, तो खेत में केवल नमी होनी चाहिए, न कि पानी भरा हुआ। बेहतर परिणाम के लिए हमेशा फ्लैट फैन या फ्लडजेट नोजल का प्रयोग करें ताकि दवा समान रूप से फैले।
बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के टिप्स
दवा का घोल तैयार करने के लिए सदैव स्वच्छ और ताजा पानी का ही उपयोग करें। छिड़काव का कार्य सुबह या शाम के शांत मौसम में करना चाहिए ताकि हवा के साथ दवा बहकर पास की दूसरी फसलों तक न पहुंचे। किसी भी हिस्से पर दोबारा स्प्रे करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे धान की पत्तियों के जलने का खतरा रहता है। रासायनिक तरीकों के साथ-साथ, पूरी तरह उन पर आश्रित न रहते हुए रोपाई के 20 और 40 दिनों के बाद हाथ से निराई-गुड़ाई करना फसल के स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम होता है।











