बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सब्जियों की खेती में खासा विविधता देखने को मिलती है, और इसी कड़ी में परवल की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है. चंपारण के बाजारों में परवल की दो किस्में बिकती हैं, देसी और बाहरी, और दोनों के दाम व स्वाद में साफ फर्क देखने को मिलता है.
पन्नापुर के किसान शंकर प्रसाद की कहानी
पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि प्रखंड के पन्नापुर गांव में रहने वाले किसान शंकर प्रसाद ने लगभग डेढ़ एकड़ जमीन में देसी परवल की खेती की है. मौजूदा समय में वे इस खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. उनका कहना है कि देसी परवल की खेती किसानों के लिए इसलिए भी फायदेमंद साबित होती है, क्योंकि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, चाहे मौसम कोई भी हो. यही वजह है कि वे परवल की खेती को अपनी आमदनी का भरोसेमंद जरिया मानते हैं.
बाहरी परवल से 10 रुपये ज्यादा दाम
शंकर प्रसाद बताते हैं कि चंपारण के बाजारों में देसी परवल हमेशा ही बाहरी परवल से 10 रुपये ज्यादा दाम पर बिकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी बढ़ती मांग है. उनके मुताबिक देसी परवल की मांग सिर्फ पूर्वी चंपारण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिमी चंपारण जिले में भी इसे खूब पसंद किया जाता है. दोनों जिलों के ग्राहक खरीदारी के वक्त देसी परवल को प्राथमिकता देते हैं, जिसके चलते किसानों को इसका अच्छा दाम आसानी से मिल जाता है और उन्हें फसल बेचने के लिए ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती.
स्वाद और बनावट में फर्क
किसान शंकर प्रसाद के अनुसार, देसी परवल की बनावट बाहरी परवल के मुकाबले थोड़ी नर्म होती है, और इसी वजह से इससे बनने वाली सब्जी भी ज्यादा स्वादिष्ट लगती है. शहर के ग्राहक अक्सर बाहरी परवल को देसी परवल समझकर खरीद लेते हैं, जिससे बाद में उन्हें स्वाद और बनावट में साफ फर्क महसूस होता है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं.
देसी परवल को कैसे पहचानें
शंकर प्रसाद कहते हैं कि देसी परवल की पहचान करना असल में मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है. इसका रंग गहरे हरे रंग का होता है, और आकार में यह थोड़ा गोल होता है. इसके उलट बाहरी परवल का आकार थोड़ा लंबा होता है, जो इसे देसी परवल से अलग करने की सबसे आसान पहचान है. अगर ग्राहक बाजार में परवल खरीदते वक्त इसके रंग और आकार पर बारीकी से ध्यान दें, तो वे आसानी से असली देसी परवल पहचान सकते हैं और दुकानदारों के हाथों धोखा खाने से बच सकते हैं.
थोक और खुदरा बाजार में मौजूदा भाव
शंकर प्रसाद के मुताबिक, मौजूदा समय में देसी परवल थोक बाजार में 4000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है. वहीं चंपारण के बाजारों में इसका खुदरा भाव अधिकतम 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रहा है. वे बताते हैं कि देसी परवल की नर्म बनावट की वजह से इससे बनने वाला भुजिया और चोखा भी काफी स्वादिष्ट बनता है, जिसके चलते घरों में इसकी खास मांग बनी रहती है और रसोई में इसे बड़े चाव से पकाया जाता है.

















