टेक दिग्गज मेटा ने 29 अमेरिकी राज्यों द्वारा दायर किए गए एक ऐतिहासिक सोशल मीडिया नुकसान मामले को खत्म करने के लिए 16.7 बिलियन डॉलर तक का भुगतान करने पर सहमति जताई है। यह समझौता बुधवार को अचानक हुआ, ठीक उस समय जब इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी अदालत में दूसरी बार गवाही देने वाले थे। यह पूरा कानूनी मामला इस आरोप पर केंद्रित था कि मेटा ने जानबूझकर अपने ऐप्स को किशोरों के लिए लत लगाने वाला बनाया, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा और कंपनी पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू करने में पूरी तरह विफल रही।
भारी जुर्माना और बढ़ता कानूनी जोखिम
यह समझौता मेटा की कानूनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। जहां यूट्यूब, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसे प्रतिद्वंद्वी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुकदमों को अदालत से बाहर ही सुलझा लिया था, वहीं मेटा ने अदालती सुनवाई का सामना करने का रास्ता चुना था। लेकिन यह फैसला कंपनी पर भारी पड़ा, क्योंकि इसी साल कैलिफ़ोर्निया और न्यू मेक्सिको के राज्य मुकदमों में मेटा को हार का सामना करना पड़ा और लगभग 1 बिलियन डॉलर का जुर्माना भुगतना पड़ा। पिछले हफ्ते ही शुरू हुए पहले संघीय मुकदमे में मेटा पर 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के हर्जाने का जोखिम मंडरा रहा था। अब 16.7 बिलियन डॉलर के इस समझौते से कंपनी ने वित्तीय जोखिम को सीमित किया है, लेकिन उसे सख्त नियम स्वीकार करने पड़े हैं।
समझौते की घोषणा के बाद मेटा ने अपने बयान में कहा कि किशोरों को अपने प्लेटफॉर्म पर एक सुरक्षित और सकारात्मक माहौल देना उसकी पहली प्राथमिकता है। कंपनी ने कहा कि वह राज्य के अटॉर्नी जनरल के साथ मिलकर पूरे उद्योग के लिए नए मानक तय कर रही है। साथ ही मेटा ने यूट्यूब और टिकटॉक जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स से भी ऐसे ही बदलाव लागू करने की अपील की। कैलिफ़ोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह समझौता सोशल मीडिया को बच्चों के लिए कम खतरनाक बनाएगा और परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा।
किशोरों के लिए तय हुई स्क्रीन टाइम सीमा और रात का प्रतिबंध
अदालती मंजूरी मिलने के बाद, इस समझौते के तहत इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कई बड़े बदलाव लागू किए जाएंगे। नए नियमों के अनुसार, इंस्टाग्राम और फेसबुक का इस्तेमाल करने वाले किशोरों के लिए दोनों प्लेटफॉर्म्स पर मिलाकर रोजाना 2 घंटे की समय सीमा तय की जाएगी। इसे बंद करने के लिए माता-पिता की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके अलावा, रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच किशोरों के लिए ऐप्स की पहुंच पूरी तरह से ब्लॉक कर दी जाएगी।
स्कूल के समय ध्यान भटकने से रोकने के लिए सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच नोटिफिकेशन म्यूट रहेंगे। साथ ही लगातार 15 मिनट तक ऐप चलाने पर यूज़र को स्क्रीन टाइम प्रॉम्प्ट मिलेगा, और 60 तथा 90 मिनट का इस्तेमाल पूरा होने पर अतिरिक्त चेतावनी नोटिफिकेशन भेजे जाएंगे। इन उपायों का मकसद लगातार स्क्रॉलिंग की लत को कम करना है।
माता-पिता को मिले अधिक अधिकार और कॉस्मेटिक फ़िल्टर पर बैन
इस समझौते से माता-पिता को अपने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। वे अपने बच्चों के फीड को एल्गोरिदम की जगह क्रोनोलॉजिकल क्रम में सेट कर सकेंगे, जिससे पोस्ट उनके पोस्ट होने के समय के हिसाब से दिखेंगी। इसके साथ ही वे ऑटोप्ले फीचर को बंद कर सकेंगे। किशोरों पर सोशल मीडिया का दबाव कम करने के लिए लाइक्स और रिएक्शन की संख्या डिफ़ॉल्ट रूप से छिपी रहेगी।
मानसिक स्वास्थ्य और बॉडी इमेज से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मेटा ने किशोरों के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी और अत्यधिक मेकअप वाले फ़िल्टर को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन फ़िल्टरों की यह कहकर आलोचना की थी कि ये किशोरों में अवास्तविक सुंदरता के पैमाने तय करते हैं और उनके आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाते हैं।
29 राज्यों के आरोप और गोपनीयता का उल्लंघन
29 अमेरिकी राज्यों के समूह ने आरोप लगाया था कि मेटा ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा एकत्र करके संघीय बाल गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन किया है। कैलिफ़ोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी समेत चार राज्यों ने आरोप लगाया कि मेटा ने माता-पिता को भ्रामक बयान देकर गुमराह किया और ऐसे फीचर्स डिजाइन किए जिनसे किशोरों को ऐप्स की लत लग जाए। हालांकि मेटा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था।
अदालत में सामने आए सबूत और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
संघीय मुकदमे के दौरान राज्यों ने मेटा के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों की गवाही पेश की। गवाहों ने बताया कि कंपनी के अंदर यूजर एंगेजमेंट और ग्रोथ को बच्चों की सुरक्षा से ऊपर रखा जाता था। अदालत में गवाही देने वाले एक मनोवैज्ञानिक ने बताया कि जो किशोर, विशेष रूप से लड़कियां, सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताती हैं, उनमें अवसाद और अकेलापन अधिक देखा गया है। विशेषज्ञों ने इसे पिछले 15 वर्षों में किशोरों में बढ़ी खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से जोड़ा।
निष्क्रिय साबित हुए सुरक्षा फीचर्स
अदालती कार्यवाही के दौरान इंस्टाग्राम की वेल-बीइंग टीम के कामकाज पर सवाल उठाए गए, जो 2018 से सुरक्षा फीचर्स विकसित कर रही थी। पूर्व डेटा साइंटिस्ट, वर्तमान प्रोडक्ट डिजाइन डायरेक्टर और इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही जज इवोन गोंजालेज रोजर्स और 8 जूरी सदस्यों के सामने दर्ज की गई। सुनवाई में पेश दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि मेटा के पुराने सुरक्षा फीचर्स का उपयोग लगभग न के बराबर था।
मंगलवार को पेश सबूतों के अनुसार, इंस्टाग्राम का टेक ए ब्रेक फीचर, जो यूज़र्स को ब्रेक लेने की याद दिलाता है, उसे लॉन्च के कई महीनों बाद भी 1 प्रतिशत से कम किशोरों ने चालू किया था। दो साल बाद भी इसका इस्तेमाल केवल 1.8 प्रतिशत तक ही पहुंच सका। इसी तरह क्वाइट मोड फीचर का उपयोग भी बेहद कम रहा, जिससे कंपनी के सुरक्षा दावों पर सवाल उठे।
स्वतंत्र ऑडिटर और कड़े निगरानी नियम
वित्तीय भुगतान और ऐप बदलावों के अलावा समझौते में निगरानी के कड़े नियम शामिल हैं। एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त किया जाएगा जो मेटा के कामकाज पर नजर रखेगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी की जानकारी सीधे अटॉर्नी जनरल को देगा। इसके अतिरिक्त मेटा पर अपनी सुरक्षा सुविधाओं के बारे में झूठे या भ्रामक दावे करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।



















