खेतों में पानी को लेकर भड़के भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, अधिकारी को फोन पर दी चेतावनीव्हाइट हाउस में 24 साल की बेनी रे हारमनी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, ट्रंप की मीडिया टीम में संभालेंगी पदवैश्विक अनिश्चितता के दौर में घरेलू क्षमता और शोध निवेश बढ़ाए भारत, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुझाया रोडमैपशिवाजी पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन पर कॉकरोच जनता पार्टी के 500 कार्यकर्ताओं पर मुंबई पुलिस की कार्रवाईमेटा के म्यूज एआई का नया खुलासा: दोस्तों और परिवार के हर सदस्य की तैयार हो रही है निजी प्रोफाइलपश्चिम चंपारण के 25 वर्षीय आर्यन ने बत्तख पालन को बनाया मुनाफे का मॉडल, साल भर में 50 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबारगुजरात में आरक्षण पर छिड़ा सियासी घमासान, शंकरसिंह वाघेला और बीजेपी नेता यज्ञेश दवे आमने-सामनेराजस्थान में पंचायती राज चुनाव का ऐलान, कोटा समेत चार जिलों में दिसंबर के बाद होगा मतदानआंबेडकर और मोदी पर टिप्पणी को लेकर रामदास अठावले ने अभिजीत दिपके को दी चेतावनी, माफी की मांगबिहार के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में करीब 10 हजार असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली की तैयारी, नए नियमों पर मंथन
बिहार के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में करीब 10 हजार असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली की तैयारी, नए नियमों पर मंथनकरियर
3 अक्तू॰ 2026, 9:43 pm (42 मिनट पहले)· 0

बिहार के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में करीब 10 हजार असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली की तैयारी, नए नियमों पर मंथन

बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 10,000 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की संभावना बन रही है, जिसके लिए उम्र सीमा, परीक्षा प्रारूप और पात्रता नियमों की समीक्षा हेतु विशेष समिति गठित की गई है।

बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए आने वाले महीने बेहद अहम साबित हो सकते हैं। राज्य भर के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े पदों के साथ-साथ हाल ही में स्थापित किए गए नए डिग्री कॉलेजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी चल रही है। अनुमान के मुताबिक, आगामी चरण में लगभग 10 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर बहाली निकाली जा सकती है। रिक्तियों की इस भारी संख्या के साथ-साथ पूरी चयन प्रक्रिया और पात्रता शर्तों में भी व्यापक सुधार लाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

समिति को सौंपा गया नियमों की समीक्षा का जिम्मा

अभ्यर्थी काफी समय से आयु सीमा में छूट, शैक्षणिक प्रदर्शन सूचकांक यानी एपीआई व्यवस्था और चयन परीक्षा के प्रारूप में बदलाव की मांग उठा रहे थे। इन मांगों और चिंताओं को संज्ञान में लेते हुए सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिसमें वरिष्ठ शिक्षाविदों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। पटना विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर और इस पूरी प्रक्रिया पर बारीक नजर रखने वाले मेंटर डॉ. अखिलेश कुमार ने साझा किया कि यह समिति अभ्यर्थियों के सुझावों और व्यवस्थागत जरूरतों का अध्ययन कर रही है।

ये भी पढ़ें

90 दिनों की समयसीमा और नवंबर में ड्राफ्ट रिपोर्ट की उम्मीद

इस गठित समिति को अपनी विस्तृत सिफारिशें और रिपोर्ट सौंपने के लिए 90 दिनों की स्पष्ट समयसीमा दी गई है। निर्धारित समयसीमा नवंबर में पूरी हो जाएगी। इस अवधि के समाप्त होने के पश्चात समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार भर्ती नियमावली और प्रक्रिया का अंतिम आधिकारिक ड्राफ्ट तैयार कर सकती है। ड्राफ्ट को मंजूरी मिलने के बाद ही नई नियमावली लागू होगी और औपचारिक विज्ञापन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो सकेगा। इसी कारण राज्य के प्रतियोगी छात्र आगामी महीनों को नीतिगत स्तर पर निर्णायक मान रहे हैं।

गैर-नेट और गैर-पीएचडी छात्रों के लिए बीईटी की नई उम्मीद

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ बिहार राज्य पात्रता परीक्षा यानी बीईटी के संभावित आयोजन को लेकर देखा जा रहा है। पूर्व में इस परीक्षा के आयोजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब इसकी संभावना काफी मजबूत बताई जा रही है। यदि बीईटी का आयोजन किया जाता है, तो बिहार के विश्वविद्यालयों से स्नातकोत्तर करने वाले ऐसे उम्मीदवारों को सीधा लाभ मिल सकता है जिनके पास फिलहाल नेट या पीएचडी की डिग्री नहीं है। यदि वे बीईटी उत्तीर्ण कर लेते हैं, तो उन्हें नियमित सहायक प्राध्यापक भर्ती में बैठने का अवसर मिल सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम पात्रता शर्तें सरकार की अंतिम नियमावली से ही स्पष्ट होंगी, लेकिन इस कदम से उन हजारों युवाओं की बाधा दूर हो सकती है जो नेट या पीएचडी के अभाव में आवेदन से वंचित रह जाते थे।

एपीआई प्रणाली को लेकर विरोध के स्वर

दूसरी तरफ, भर्ती प्रक्रिया में एपीआई स्कोर के निर्धारण को लेकर अभ्यर्थियों के एक वर्ग में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। कई प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि सीधी भर्ती में एपीआई व्यवस्था लागू नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे कई योग्य अभ्यर्थी केवल अंकों की गणना के चलते पिछड़ जाते हैं। इस मांग को लेकर समय-समय पर विरोध और प्रदर्शन भी देखे गए हैं। अब देखना होगा कि समिति इस विवादित विषय पर क्या संतुलन साधती है और अंतिम नियमावली में अंकों के मूल्यांकन का क्या तरीका तय किया जाता है।

पाठ्यक्रम आधारित तैयारी और अध्ययन रणनीति की सलाह

आगामी भर्ती को लेकर मेंटर डॉ. अखिलेश कुमार ने अभ्यर्थियों को आगाह किया है कि वे औपचारिक विज्ञापन आने की प्रतीक्षा में बहुमूल्य समय न गंवाएं। उन्होंने सलाह दी है कि उम्मीदवार अभी से अपने स्नातकोत्तर विषय के पूरे पाठ्यक्रम और यूजीसी-नेट के सिलेबस को केंद्र में रखकर व्यवस्थित अध्ययन शुरू कर दें। तैयारी के दौरान केवल सतही अध्ययन सामग्री के बजाय संबंधित विषय की मानक और प्रमाणिक संदर्भ पुस्तकों का अध्ययन करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, विषय के विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्राध्यापकों से मार्गदर्शन लेकर सही अध्ययन सामग्री का चयन करना परीक्षा में सफलता की संभावना को कई गुना बढ़ा सकता है।

वैकेंसी से पहले की गई मेहनत बनेगी सबसे बड़ा संबल

असिस्टेंट प्रोफेसर की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, मूल्यांकन, परिणाम और साक्षात्कार के विभिन्न चरणों को पूरा होने में कई महीनों का लंबा समय लगता है। इसलिए परीक्षा की औपचारिक घोषणा से पहले का यह समय उम्मीदवारों के लिए सबसे मजबूत अवसर साबित हो सकता है। यदि अभ्यर्थी अभी से अपने विषय की बुनियादी समझ और अवधारणाओं को मजबूत कर लेते हैं, तो विज्ञापन जारी होने के बाद वे नोट्स जुटाने या रणनीति बनाने के तनाव से बच जाएंगे। उस समय उनका पूरा ध्यान केवल निरंतर पुनरावृत्ति, प्रश्न अभ्यास और मॉक टेस्ट पर केंद्रित रह सकेगा, जिससे वे अंतिम मेरिट सूची में मजबूत जगह बना पाएंगे।

सवाल-जवाब

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर के कितने पदों पर बहाली की संभावना है?
राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में लगभग 10 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर बहाली की संभावना जताई गई है।
भर्ती नियमों की समीक्षा के लिए गठित समिति को कितना समय दिया गया है?
समिति को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है, जो नवंबर में पूरा होगा।
क्या नेट या पीएचडी के बिना भी उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे?
यदि सरकार बिहार एलिजिबिलिटी टेस्ट (बीईटी) का आयोजन करती है और उम्मीदवार उसे पास कर लेते हैं, तो वे आवेदन के पात्र हो सकते हैं, हालांकि अंतिम निर्णय नई नियमावली पर निर्भर करेगा।
अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया के किस नियम का मुख्य रूप से विरोध कर रहे हैं?
अभ्यर्थियों का एक वर्ग भर्ती प्रक्रिया में शैक्षणिक प्रदर्शन सूचकांक यानी एपीआई व्यवस्था लागू किए जाने का विरोध कर रहा है।
विशेषज्ञों ने उम्मीदवारों को तैयारी के लिए क्या रणनीति अपनाने की सलाह दी है?
उम्मीदवारों को विज्ञापन का इंतजार किए बिना अपने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और यूजीसी-नेट के सिलेबस को आधार बनाकर मानक संदर्भ पुस्तकों से अध्ययन शुरू करने की सलाह दी गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp