सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई भूमिकाएं वेतन और अवसरों के बड़े द्वार खोल रही हैं। पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के विपरीत अब तकनीकी कंपनियों का पूरा ध्यान व्यावहारिक एआई समाधानों को सीधे ग्राहकों के कार्यक्षेत्र में लागू करने पर टिक गया है। इसी बदलाव की वजह से आईटी उद्योग में फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर यानी एफडीई (FDE) के पद की पूछ काफी बढ़ गई है। यह एआई डेवलपमेंट के विशेषज्ञों का एक खास वर्ग है, जहां काम की शुरुआत करने वाले नए प्रोफेशनल्स को पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के मुकाबले सात गुना तक अधिक सालाना पैकेज दिया जा रहा है। आमतौर पर शुरुआती स्तर पर जहां सामान्य सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को 3 से 4 लाख रुपये सालाना का ऑफर मिलता है, वहीं इस विशेष तकनीकी भूमिका में नए उम्मीदवारों को 18 से 25 लाख रुपये सालाना के पैकेज से शुरुआत करने का मौका मिल रहा है।
सीनियर पदों पर भारी पैकेज और लगातार इंक्रीमेंट
जॉब मार्केट का विश्लेषण करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म टीमलीज के अनुसार इस विशेषज्ञ क्षेत्र में अनुभव बढ़ने के साथ आय में काफी तेज उछाल देखने को मिलता है। अनुभवी और सीनियर स्तर के फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स को सालाना 50 से 85 लाख रुपये तक का वेतन पैकेज ऑफर किया जा रहा है। इसके साथ ही कंपनियों की तरफ से इन पेशेवरों को आकर्षित करने और अपने साथ बनाए रखने के लिए हर साल 15 से 25 फीसदी का वेतन इंक्रीमेंट भी दिया जा रहा है। भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि इस भूमिका के लिए तकनीकी समझ के साथ-साथ क्लाइंट की समस्याओं को समझकर त्वरित समाधान निकालने की दोहरी क्षमता जरूरी होती है, जिसके चलते कंपनियां इन पदों के लिए भारी रकम खर्च करने को तैयार हैं।
मांग में आठ सौ फीसदी की बढ़ोतरी
टीमलीज डिजिटल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नीति शर्मा के अनुसार इस खास कार्यक्षेत्र में प्रतिभाओं की जरूरत अभूतपूर्व गति से बढ़ी है। वित्तवर्ष 2026 की पहली तिमाही से वित्तवर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान ऐसे टैलेंट की मांग में 800 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग जगत में अब यह बदलाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है कि कंपनियां छोटे स्तर के प्रायोगिक एआई परीक्षणों से आगे निकलकर बड़े पैमाने पर एंटरप्राइज स्तर के सिस्टम लागू कर रही हैं। बीते मई महीने के दौरान देश में ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी शीर्ष कंपनियों के भीतर करीब 230 फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स की मांग मौजूद थी। अब अन्य वैश्विक और भारतीय टेक कंपनियां भी इस दिशा में तेजी से नियुक्तियां कर रही हैं, जबकि वर्तमान में भारत में कुल मिलाकर 2,800 से अधिक सक्रिय एफडीई प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं।
क्लाइंट और एआई सिस्टम के बीच की अहम कड़ी
पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपर्स जहां ज्यादातर समय आंतरिक कोड लिखने और बैकएंड आर्किटेक्चर तक सीमित रहते हैं, वहीं फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स सीधे तौर पर ग्राहक कंपनियों की जरूरतों और प्रोडक्शन स्तर के एआई सिस्टम के बीच एक सेतु का काम करते हैं। इन तकनीकी विशेषज्ञों के पास पायथन (Python), एजेंटिक एआई (agentic AI), रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG), एमएलऑप्स (MLOps), क्लाउड प्लेटफॉर्म्स और एपीआई (APIs) जैसे आधुनिक टूल्स और फ्रेमवर्क में महारत होती है। इनका मुख्य काम बिजनेस प्रोसेस को आधुनिक बनाना और कस्टमर की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से एआई उत्पादों को उनके सिस्टम में सक्रिय रूप से एकीकृत करना होता है। स्टाफिंग फर्म एक्सपफेनो (Xpheno) के मुताबिक, इस कार्य के लिए केवल कई प्रोग्रामिंग भाषाओं की सामान्य जानकारी होने के बजाय व्यावहारिक तकनीकी दक्षता और समाधान निकालने की क्षमता कहीं अधिक मायने रखती है।
प्रमुख आईटी कंपनियां तैयार कर रही हैं अपना टैलेंट पूल
बाजार में तैयार टैलेंट की कमी को देखते हुए भारत की दिग्गज आईटी कंपनियों ने अपने मौजूदा कर्मचारियों को इस नई भूमिका के लिए प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया है। आईटी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी टीसीएस अपने कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का 1 से 1.5 फीसदी हिस्सा एफडीई में तब्दील करने की योजना पर आगे बढ़ रही है, जिसका सीधा मतलब है कि कंपनी अपने लगभग 8,900 मौजूदा कर्मचारियों को इसका सघन प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इसके साथ ही एचसीएल टेक ने भी अपने कॉलेज फ्रेशर्स और वर्तमान सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया है। इसी तरह एलटीएम ने अपने एआई1000 इनिशिएटिव की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से कंपनी अपने भीतर 1,000 ट्रेंड एफडीई प्रोफेशनल्स की टीम तैयार करेगी। वहीं आईटी सेवा प्रदाता कोफोर्ज ने भी इस साल के अंत तक अपने लिए 100 विशेष एफडीई पेशेवर तैयार करने का ठोस लक्ष्य निर्धारित किया है।



















