भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी हैदराबाद के चार होनहार बीटेक छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट शोध क्षमता का प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। इन प्रथम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्रों ने ताइवान के नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी में आयोजित टेको इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट 2026 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। दुनिया भर के शीर्ष शोध मॉडलों के बीच मुकाबला करते हुए इस भारतीय दल ने अपने अनूठे सोलर सेल इनोवेशन के दम पर प्रतिष्ठित 'एक्सीलेंस अवॉर्ड' अपने नाम करने में सफलता पाई।
कॉलेज के पहले ही साल में दिखाई अनोखी शोध प्रतिभा
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने वाले दल में आईआईटी हैदराबाद के चार छात्र महक गाडिया, राकी मोहम्मद, उदित मैनी और युग निकेश गांधी शामिल हैं। आमतौर पर स्नातक स्तर के शुरुआती चरण में छात्र बुनियादी पाठ्यक्रम की पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, लेकिन इन प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने डिग्री के पहले ही सत्र में जटिल वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान पर काम करना शुरू कर दिया। उम्र और कॉलेज के शुरुआती पड़ाव की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए इन छात्रों ने यह साबित कर दिया कि ठोस वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समर्पण से शुरुआती दौर में भी वैश्विक स्तर का काम किया जा सकता है।
वैश्विक मंच पर फाइनल तक पहुंचने वाली एकमात्र भारतीय टीम
ताइवान के प्रतिष्ठित नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी परिसर में टेको इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट 2026 का आयोजन किया गया था। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दुनिया के कई देशों से आए अत्याधुनिक और चुनौतीपूर्ण तकनीकी मॉडलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इस वैश्विक स्पर्धा में आईआईटी हैदराबाद की यह टीम अंतिम दौर में पहुंचने वाली भारत की इकलौती फाइनलिस्ट टीम थी। अंतरराष्ट्रीय जूरी के सामने अपने शोध का प्रभावी प्रदर्शन करते हुए छात्रों ने पर्यावरण अनुकूल तकनीक की श्रेणी में यह बड़ा सम्मान हासिल किया।
नमी प्रतिरोधी पेरोव्स्काइट सोलर सेल तकनीक की खासियत
छात्रों के शोध का मुख्य विषय 'ह्यूमिडिटी-टॉलरेटेंट पेरोव्स्काइट सोलर सेल फैब्रिकेशन' रहा। पारंपरिक रूप से सोलर ऊर्जा उत्पादन में नमी या सीलन एक बहुत बड़ी बाधा मानी जाती है, क्योंकि वायुमंडलीय आद्रता पेरोव्स्काइट आधारित सोलर सेल की कार्यक्षमता और जीवन चक्र को तेजी से घटा देती है। इन विद्यार्थियों ने एक ऐसा तकनीकी समाधान विकसित किया जो सोलर सेल को नमी के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षित रखता है और चुनौतीपूर्ण मौसमी परिस्थितियों में भी इसकी बिजली पैदा करने की दक्षता को बरकरार रखता है। स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यह शोध सोलर पैनल्स की उपयोगिता को काफी व्यापक और टिकाऊ बना सकता है।
संस्थान का मार्गदर्शन और इनक्यूबेटर संसाधनों की भूमिका
इस बड़े आविष्कार को प्रयोगशाला से वास्तविकता में तब्दील करने के पीछे सुनियोजित मार्गदर्शन की बड़ी भूमिका रही। शोध कार्य के दौरान छात्रों को संस्थान के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के फैकल्टी डॉ. आशीष कुलकर्णी से तकनीकी दिशा-निर्देश प्राप्त हुए। इसके साथ ही, पावाक एनर्जी के इनक्यूबेटर लैब के उन्नत संसाधनों, उपकरणों और प्रायोगिक सुविधाओं ने इस परियोजना को सफलतापूर्वक विकसित करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। इन आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता की बदौलत ही छात्र अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने वाला प्रोटोटाइप तैयार करने में सक्षम हुए।



















