एजबेस्टन के मैदान पर भारतीय कप्तान शुभमन गिल जब 80 रन बनाकर फिटनेस की दिक्कत के चलते मैदान से बाहर गए, तो फैंस के मन में एक पुराना सवाल फिर से जिंदा हो उठा। क्या मौजूदा कप्तान कभी किसी वनडे मैच में पहली गेंद से लेकर पचासवें ओवर की आखिरी गेंद तक क्रीज पर डटे रहकर सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा की उस दुर्लभ उपलब्धि की बराबरी कर पाएंगे, जिसे आज तक कोई तीसरा बल्लेबाज छू तक नहीं पाया है।
पचास ओवर तक टिके रहना इतना मुश्किल क्यों है
वनडे क्रिकेट के इतिहास में पारी की पहली गेंद से पचासवें ओवर की आखिरी गेंद तक क्रीज पर बने रहना किसी भी बल्लेबाज के लिए असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। इसके लिए सिर्फ शॉट खेलने की तकनीक ही काफी नहीं होती, बल्कि गजब की एकाग्रता, दिमागी मजबूती और शरीर की सहनशक्ति भी उतनी ही जरूरी होती है। लगातार पचास ओवर तक दौड़ते रहना, थकान को नजरअंदाज करते हुए हर गेंद पर ध्यान बनाए रखना और पूरी पारी में रन गति को संतुलित रखना, यह सब मिलाकर ही यह कारनामा मुमकिन हो पाता है। यही वजह है कि भारत के सिर्फ दो बल्लेबाज ही अब तक यह उपलब्धि हासिल कर सके हैं।
सचिन और रोहित ने कैसे रचा यह इतिहास
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर में यह कारनामा सबसे पहले कर दिखाया था। उन्होंने पारी की शुरुआत से लेकर पचासवें ओवर तक बल्लेबाजी की और वनडे क्रिकेट के इतिहास का पहला दोहरा शतक अपने नाम किया। सचिन 200 रन बनाकर नाबाद रहे थे और उनकी यह पारी आज भी वनडे क्रिकेट के सबसे यादगार लम्हों में गिनी जाती है।
सचिन के इस कारनामे के चार साल बाद हिटमैन रोहित शर्मा ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। साल 2014 में श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर रोहित ने पारी की शुरुआत की और 264 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। वे पचासवें ओवर की आखिरी गेंद पर आउट होने से ठीक पहले तक नाबाद बने रहे और टीम को एक ऐसे स्कोर तक पहुंचा दिया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल था। दिलचस्प बात यह है कि रोहित ने अपनी बाकी दोहरी शतकीय पारियों में भी अंत तक क्रीज पर टिके रहने का यही हुनर बार बार दिखाया है, जो उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग खड़ा करता है।
एजबेस्टन में शुभमन गिल एक कदम से चूके
भारतीय क्रिकेट के नए प्रिंस माने जाने वाले शुभमन गिल ने भी हाल ही में एक मैच के दौरान ठीक इसी तरह की पारी की नींव रखी थी। गिल ने पारी की शुरुआत की, बेहतरीन टाइमिंग के साथ रन बटोरे और एक छोर संभाले रखा। जब ऐसा लगने लगा था कि वे सचिन और रोहित के इस खास क्लब में शामिल हो जाएंगे, तभी 49वें ओवर में मैच का रुख बदल गया। थकान हावी होने और तेजी से रन बटोरने की कोशिश में गिल अपना विकेट गंवा बैठे। हालांकि उनकी वह पारी टीम को जीत दिलाने वाली और बेहद शानदार थी, लेकिन इसी एक विकेट ने उन्हें इतिहास के पन्नों में रोहित और सचिन के बराबर खड़े होने से ठीक एक कदम पहले रोक दिया। सचिन और रोहित के अलावा आज तक कोई और बल्लेबाज यह कारनामा नहीं कर पाया है, इसलिए गिल की यह चूक और भी खास मानी जा रही है।
यह रिकॉर्ड बनाने के लिए बल्लेबाज में क्या होना जरूरी है
बतौर ओपनर पहली गेंद से गेंदबाजों का सामना करना और आखिरी गेंद तक विकेट बचाए रखना, इसके लिए एकाग्रता के साथ साथ बेहतरीन शारीरिक फिटनेस सबसे जरूरी शर्त होती है। लगातार पचास ओवर तक दौड़ते रहना और उमस भरे माहौल में भी ध्यान न भटकाना, यह हुनर हर बल्लेबाज के बस की बात नहीं। इसके अलावा शुरुआती ओवरों में संभलकर खेलना और आखिरी ओवरों में आक्रामक अंदाज में रन बटोरने की कला भी उतनी ही अहम है। शुभमन गिल भले ही इस बार मौका चूक गए, लेकिन उनकी क्लास और खेलने का अंदाज साफ बताता है कि आने वाले समय में वे इस रिकॉर्ड को अपने नाम जरूर करेंगे।
रोहित शर्मा और सचिन तेंदुलकर का यह रिकॉर्ड आज भी युवा बल्लेबाजों के लिए एक बेंचमार्क बना हुआ है और यही वजह है कि गिल की यह पारी बार बार चर्चा में बनी रहेगी।











