एक मैच खेला, फिर कभी नहीं दिखे: भारत के वो 4 क्रिकेटर जिनकी चमक पल भर में बुझ गईक्रिकेट
1 घंटे पहले· 2

एक मैच खेला, फिर कभी नहीं दिखे: भारत के वो 4 क्रिकेटर जिनकी चमक पल भर में बुझ गई

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने नीली जर्सी तो पहनी, लेकिन एक या दो मैच के बाद ही गुमनामी में खो गए, यहां हैं श्रीनाथ अरविंद, परवेज रसूल, सुदीप त्यागी और सुब्रमण्यम बद्रीनाथ की कहानियां.

आसमान में चमकने वाला हर तारा हमेशा के लिए नहीं टिकता, कुछ पल भर के लिए दिखते हैं और फिर अंधेरे में गुम हो जाते हैं. भारतीय क्रिकेट की कहानी में भी ऐसे कई सितारे मिल जाएंगे, जिन्होंने नीली जर्सी पहनने का सपना तो पूरा किया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ ज्यादा दिन तक नहीं निभाया. यह उन बल्लेबाजों या गेंदबाजों की गाथा नहीं है जिन्होंने शतकों और विकेटों के ढेर लगाए, बल्कि यह उन चार खिलाड़ियों की कहानी है जो इंटरनेशनल क्रिकेट के मैदान में उतरे, अपनी झलक दिखाई और फिर वक्त की भीड़ में कहीं खो गए.

श्रीनाथ अरविंद: एक स्पेल की आग, फिर खामोशी

कर्नाटक ने भारत को कई बेहतरीन तेज गेंदबाज दिए हैं, और श्रीनाथ अरविंद को भी कभी उसी परंपरा की अगली कड़ी माना जाता था. घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले अरविंद को साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 मैच में भारत के लिए खेलने का मौका मिला. मजबूत दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजी क्रम के सामने नई गेंद संभालते हुए अरविंद ने 1 विकेट तो चटकाया, लेकिन आंकड़े उनके पक्ष में नहीं रहे. उन्होंने 4 ओवर में 12 की महंगी इकॉनमी रेट से 44 रन लुटा दिए. उस दिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यही उनका पहला और आखिरी इंटरनेशनल मैच साबित होगा. इसके बाद अरविंद को दोबारा कभी नीली जर्सी पहनने का मौका नहीं मिला, और उनका करियर उसी एक टी20 मैच में सिमटकर रह गया.

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परवेज रसूल: कश्मीर की वादियों से मिले दो मौके

जब भी जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों से कोई खिलाड़ी निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचता है, तो उससे उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं, और परवेज रसूल के साथ भी यही हुआ. एक कुशल ऑलराउंडर के तौर पर रसूल ने घरेलू क्रिकेट में अपनी फिरकी गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी से खूब पहचान बनाई थी. इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें साल 2014 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला, जहां उन्होंने 2 विकेट लिए. तीन साल बाद, 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ उन्हें अपने करियर का इकलौता टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने को मिला. इस मैच में उन्होंने 1 विकेट लिया और 32 रन बनाकर एक सच्चे ऑलराउंडर की तरह योगदान दिया. लेकिन टीम में कड़ी प्रतिस्पर्धा और आगे मौके न मिलने के चलते उनका इंटरनेशनल करियर उसी एक वनडे और एक टी20 मैच पर थम गया. आज रसूल क्रिकेट की मुख्यधारा से काफी दूर, गुमनामी में जी रहे हैं.

सुदीप त्यागी: रफ्तार जो जल्दी बुझ गई

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जन्मे सुदीप त्यागी को कभी भारतीय तेज गेंदबाजी के भविष्य के तौर पर देखा जाता था. घरेलू क्रिकेट में अपनी रफ्तार और स्विंग गेंदबाजी से बल्लेबाजों को छकाने वाले त्यागी को साल 2009 में भारतीय टीम में जगह मिली. दिसंबर 2009 से 2010 के बीच उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा. उन्होंने भारत के लिए 4 वनडे मैच खेले और इस दौरान 3 विकेट अपने नाम किए. इसी दौर में उन्हें श्रीलंका के खिलाफ एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका भी मिला. लेकिन चोटों और गिरते फॉर्म ने इस युवा गेंदबाज की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया. महज एक साल के भीतर उनका इंटरनेशनल करियर शुरू होकर खत्म भी हो गया. त्यागी ने भारत के लिए सिर्फ 1 टी20 मैच खेला और इसके बाद वे कभी राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर में नहीं आ सके.

सुब्रमण्यम बद्रीनाथ: घरेलू दीवार, टी20 में सिर्फ एक मौका

इन चारों कहानियों में सबसे ज्यादा भावुक करने वाली कहानी सुब्रमण्यम बद्रीनाथ की है. तमिलनाडु के लिए घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले बद्रीनाथ को उनकी शानदार निरंतरता के चलते घरेलू क्रिकेट का ‘द वॉल’ कहा जाने लगा था. आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 95 मैच खेलने वाले और सैकड़ों घरेलू मुकाबलों में हजारों रन बनाने वाले बद्रीनाथ को आखिरकार भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेलने का मौका मिला. उन्होंने भारत के लिए 2 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 63 रन बनाए, और 7 वनडे मैचों में 79 रन जोड़े. लेकिन टी20 अंतरराष्ट्रीय की बात करें तो उन्हें सिर्फ एक ही मैच में खुद को साबित करने का मौका मिला. साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए उस इकलौते टी20 मैच में बद्रीनाथ ने 43 रनों की शानदार पारी खेली और ‘मैन ऑफ द मैच’ भी चुने गए. इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उन्हें दोबारा कभी टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलने का मौका नहीं दिया गया. आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में महान खिलाड़ी होने के बावजूद इंटरनेशनल मंच पर बद्रीनाथ का नाम गुमनामी में खो गया.

चमक के बाद बंद हो गया दरवाजा

इन चारों कहानियों को साथ रखकर देखें तो एक बात साफ नजर आती है, घरेलू क्रिकेट या आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद भी लंबा इंटरनेशनल करियर बनाना कितना मुश्किल है. अरविंद का एक ही स्पेल में महंगा साबित होना, रसूल की ऑलराउंड काबिलियत का पूरा इस्तेमाल न होना, त्यागी का चोटों के चलते बीच में ही करियर थम जाना और बद्रीनाथ का ‘मैन ऑफ द मैच’ पारी खेलने के बावजूद दोबारा मौका न मिलना, ये सभी एक ही सच्चाई की तरफ इशारा करते हैं कि एक खराब दिन, टीम में एक बदलाव या भरी हुई बल्लेबाजी और गेंदबाजी लाइनअप किसी भी करियर को शुरू होते ही खत्म कर सकता है. इन चारों खिलाड़ियों ने नीली जर्सी पहनी, भारत का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन इसके बाद दरवाजा हमेशा के लिए बंद हो गया, और इनकी कहानियां याद दिलाती हैं कि एक बड़ा मौका मिलना और उसे लंबे करियर में बदलना, इन दोनों के बीच की रेखा कितनी पतली होती है.

सवाल-जवाब

श्रीनाथ अरविंद ने भारत के लिए कितने इंटरनेशनल मैच खेले?
उन्होंने सिर्फ 1 टी20 मैच खेला, साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, जिसमें उन्होंने 1 विकेट लिया और 4 ओवर में 44 रन दिए.
परवेज रसूल का इंटरनेशनल करियर कितने मैचों तक सीमित रहा?
वे भारत के लिए सिर्फ 1 वनडे (2014, बांग्लादेश के खिलाफ, 2 विकेट) और 1 टी20 मैच (2017, इंग्लैंड के खिलाफ, 1 विकेट और 32 रन) ही खेल सके.
सुदीप त्यागी ने भारत के लिए कितने वनडे और टी20 मैच खेले?
उन्होंने 4 वनडे मैच खेले जिसमें 3 विकेट लिए, और सिर्फ 1 टी20 मैच श्रीलंका के खिलाफ खेला.
सुब्रमण्यम बद्रीनाथ के इकलौते टी20 मैच में क्या हुआ था?
साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने 43 रनों की पारी खेली और मैन ऑफ द मैच रहे, फिर भी उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला.
इन चारों खिलाड़ियों में घरेलू क्रिकेट में सबसे ज्यादा सफल कौन रहा?
सुब्रमण्यम बद्रीनाथ को घरेलू क्रिकेट में सबसे सफल माना जाता है, उन्हें ‘द वॉल’ कहा जाता था और उन्होंने आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 95 मैच खेले.
परवेज रसूल किस राज्य से आते हैं?
वे जम्मू-कश्मीर से आते हैं.

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