भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बेंगलुरु स्थित अपने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में खिलाड़ियों के शारीरिक फिटनेस मूल्यांकन की संपूर्ण व्यवस्था को नए सिरे से डिजाइन करने की व्यापक योजना तैयार की है। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद किसी भी खिलाड़ी को केवल सामान्य रूप से फिट घोषित कर देना टीम इंडिया में चयन का आधार नहीं रहेगा। बोर्ड ने सख्त रुख अपनाते हुए यह अनिवार्य कर दिया है कि राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को तय किए गए कड़े शारीरिक पैमानों पर पूरी तरह खरा उतरना होगा।
यो-यो टेस्ट से ब्रोंको टेस्ट की ओर बदलाव और समय सीमा
भारतीय क्रिकेट टीम में पिछले कई वर्षों से खिलाड़ियों की सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता को मापने के लिए यो-यो टेस्ट को सबसे बड़ा पैमाना माना जाता था। हालांकि, आधुनिक क्रिकेट की बदलती जरूरतों को देखते हुए अब ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिक फिटनेस ड्रिल के रूप में स्थापित किया जा रहा है। लंबे समय से इस टेस्ट को लेकर कोई स्पष्ट और आधिकारिक मानक समय सीमा तय नहीं थी, जिससे अलग-अलग मौकों पर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। अब इस अनिश्चितता को दूर करते हुए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार सभी खिलाड़ियों को ब्रोंको टेस्ट 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड की निर्धारित समय अवधि के भीतर ही पूरा करना अनिवार्य होगा।
मैदानी प्रदर्शन में गिरावट और चयनात्मक रियायतों पर रोक
हालिया मैचों में यह बात प्रमुखता से रेखांकित की गई थी कि भारतीय खिलाड़ियों का मैदानी प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। मैदान पर फील्डिंग का स्तर घटने के साथ-साथ विकेटों के बीच रन बनाने की गति भी प्रभावित हो रही थी। पड़ताल में सामने आया कि अतीत में कई मौकों पर खिलाड़ियों को फिटनेस की कठोर जांच प्रक्रिया से गुजरना ही नहीं पड़ता था। कुछ विशिष्ट मामलों में आगामी सीरीज या मैच के लिए टीम की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए खिलाड़ियों को जल्दबाजी में फिट घोषित कर दिया जाता था। बीसीसीआई अब इस दोहरे मानदंड और ढिलाई को पूरी तरह समाप्त कर सभी वर्ग के क्रिकेटरों के लिए एक समान कठोर नियम लागू करने जा रहा है।
हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज के मामले
फिटनेस प्रबंधन में आ रही विसंगतियों के कारण हाल के दिनों में कई प्रमुख खिलाड़ियों से जुड़े मामले चर्चा में आए हैं। तेज गेंदबाज हर्षित राणा को इंग्लैंड दौरे पर तीसरे टी20आई मुकाबले के बाद अचानक वापस बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भेज दिया गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि उन्हें कोई संरचनात्मक चोट नहीं लगी थी, बल्कि उनका वजन अधिक होने के कारण मैदान पर गंभीर ऐंठन (क्रैम्प्स) की समस्या उत्पन्न हुई थी। दूसरी ओर, स्टार गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस रिकवरी को लेकर भी सवाल उठे थे, जब उन्हें श्रीलंका दौरे से पहले मैदान में उतारने की योजना बनाई जा रही थी। इसके अलावा, श्रीलंका दौरे से ठीक पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुए अचानक फिटनेस टेस्ट से मोहम्मद सिराज जैसे नियमित टेस्ट खिलाड़ी भी हैरान रह गए थे, क्योंकि खिलाड़ियों को इन नई शारीरिक ड्रिल्स के लिए पहले से मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार नहीं किया गया था।
केंद्रीय अनुबंधित और गैर-अनुबंधित खिलाड़ियों के लिए नए मानक
प्रणाली में पारदर्शिता और निरंतरता लाने के उद्देश्य से बीसीसीआई ने अब अनुबंधित खिलाड़ियों को नए फिटनेस टेस्ट के बुनियादी मानक (बेस पैरामीटर) आधिकारिक तौर पर सौंप दिए हैं। टेस्ट टीम के नियमित सदस्य अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा बनाए गए नए वर्कआउट और रिकवरी प्रोग्राम के आधार पर अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं। वहीं, जो खिलाड़ी फिलहाल मुख्य टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें भी इन नए बेस पैरामीटर्स के अनुरूप अपनी तैयारी शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान किसी भी खिलाड़ी को अचानक फिटनेस टेस्ट के कारण कठिनाई का सामना न करना पड़े।



















