क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है और इसका एक दिल थाम देने वाला नजारा हम्बनटोटा के महिंदा राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में देखने को मिला। तीन मैचों की यूथ वनडे सीरीज के निर्णायक मुकाबले में भारतीय अंडर-19 टीम जीत की दहलीज पर खड़ी थी, लेकिन अंतिम क्षणों में श्रीलंका ने बाजी पलट दी। मेजबान श्रीलंका ने कांटे की टक्कर वाले इस रोमांचक मुकाबले में भारत को 1 विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ ही श्रीलंका ने सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया है।
सीरीज का उतार-चढ़ाव
इस सीरीज की शुरुआत भारतीय टीम के लिए बेहतरीन रही थी, जहां उन्होंने पहला मैच 4 विकेट से जीतकर अपनी धमक दिखाई थी। हालांकि, 6 जुलाई को हुए दूसरे वनडे में श्रीलंका ने जबरदस्त वापसी करते हुए भारत को 8 विकेट से एकतरफा मात दी थी। इस कारण तीसरा मुकाबला दोनों टीमों के लिए एक फाइनल बन गया था, जिसमें अंततः मेजबान टीम ने बाजी मारी।
वीके विनीत का दमदार शतक
टॉस जीतकर श्रीलंका के कप्तान विमत दिनसारा ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया, जो शुरुआती दौर में गलत साबित हुआ। भारतीय बल्लेबाजों ने मैदान पर जिम्मेदारी भरी पारी खेली। स्टार बल्लेबाज वीके विनीत ने श्रीलंकाई गेंदबाजों पर करारा प्रहार किया और एक शानदार शतक जड़ दिया। विनीत की इस सूझबूझ भरी पारी की बदौलत भारत ने अपने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 290 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।
भारतीय गेंदबाजों का शुरुआती कहर
जीत के लिए 291 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने लाइन और लेंथ पर गजब का नियंत्रण रखा। महज 11.4 ओवरों में ही श्रीलंका ने अपने 3 प्रमुख विकेट केवल 52 रन पर गंवा दिए थे। दिमंता महाविथाना ने 36 गेंदों में 22 रन बनाए, जबकि कप्तान विमत दिनसारा खाता खोले बिना पवेलियन लौट गए।
संकट की इस घड़ी में सेनूजा वेकुनागोडा और कविजा गमागे ने चौथी विकेट के लिए 79 रनों की साझेदारी कर टीम को संभाला। सेनूजा ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 59 गेंदों में 10 चौकों और 1 छक्के की मदद से 67 रन बनाए। हालांकि, भारतीय स्पिनर अनमोलजीत सिंह ने अपने फिरकी का जादू चलाते हुए श्रीलंका के मध्यक्रम को झकझोर कर रख दिया। 26.4 ओवर तक श्रीलंका के 139 रनों पर 5 विकेट गिर चुके थे। अनमोलजीत सिंह ने 8 ओवर में 42 रन देकर 4 विकेट लिए। शाविन विनोद ने भी बेहतरीन साथ देते हुए 10 ओवर में 41 रन देकर 3 विकेट झटके, जबकि मोहित उल्वा ने 9 ओवर में 66 रन खर्च कर 2 विकेट हासिल किए।
अंतिम ओवरों में चमिका हीनतिगाला का जादू
मैच का पासा तब पलटा जब 40 ओवर के बाद श्रीलंका का स्कोर 8 विकेट पर 215 रन था। अंतिम 10 ओवर में श्रीलंका को जीत के लिए 76 रनों की जरूरत थी। यहाँ से चमिका हीनतिगाला और गिम्हन मेंडिस ने मैच का रुख मोड़ दिया। दोनों ने नौवें विकेट के लिए महज 47 गेंदों में 61 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की। मेंडिस ने 22 गेंदों में 23 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन चमिका हीनतिगाला एक छोर पर चट्टान की तरह डटे रहे। उन्होंने 68 गेंदों में नाबाद 84 रनों की जादुई पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 2 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। अंतिम गेंद तक खिंचे इस मुकाबले में श्रीलंका ने 291 रन बनाकर जीत हासिल की और सीरीज की ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।











