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इंग्लैंड में खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम को अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरतक्रिकेट
9 जुल॰ 2026, 11:44 pm (45 दिन पहले)· 2

इंग्लैंड में खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम को अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरत

इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन ने कई सवाल खड़े किए हैं। टीम को अब अपनी हाई-रिस्क वाली रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

इंग्लैंड और आयरलैंड के हालिया दौरों पर भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों से कहीं ज्यादा खराब रहा है। जिस भारतीय टीम ने तीन महीने पहले ही वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने नाम की थी, उसका ऐसा गिरता हुआ स्तर वाकई हैरानी पैदा करने वाला है। खेलों में हार और जीत तो चलती रहती है, लेकिन टीम का महज 76 रन के स्कोर पर पूरी तरह ढेर हो जाना और मैदान पर मुकाबला करने में लाचार दिखना चिंता का एक बड़ा विषय है। प्रशंसकों का गुस्सा जायज है, और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों को टीम से बाहर रखने के फैसलों ने इस नाराजगी को और गहरा कर दिया है। इस नाजुक मोड़ पर टीम को सही संतुलन तलाशने की सख्त जरूरत है।

रणनीति और परिस्थितियों का तालमेल

गौतम गंभीर का यह कहना अपनी जगह सही है कि कुछ मैचों में मिली हार से पूरी टीम का स्तर नहीं गिर जाता, लेकिन इन लगातार विफलताओं को नजरअंदाज करना भी आत्मघाती हो सकता है। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मंच है, जहाँ केवल उम्मीद के सहारे बैठकर चीजें खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतजार नहीं किया जा सकता। भारतीय टीम टी20 प्रारूप में अक्सर 'हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड' वाली नीति पर चलती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आक्रामक दृष्टिकोण हर तरह की पिच और हालात के लिए उपयुक्त है? भारत में जो रणनीति काम कर जाती है, वही रणनीति इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में, जहाँ गेंदबाजों को अधिक मदद मिलती है, उतनी ही कारगर नहीं होती। खेल की असल खूबसूरती तो बदलती परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने में है।

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अभिषेक शर्मा का उदाहरण हमारे सामने है। जोफ्रा आर्चर की पहली ही गेंद पर वह आगे बढ़कर आक्रामक शॉट खेलने के लिए उतरे। मैनचेस्टर में किस्मत ने उनका साथ दिया, लेकिन नॉटिंघम में वही गलती उन्हें भारी पड़ी और वह अपना विकेट गंवा बैठे। आंकड़ों को देखें तो आर्चर जैसे गेंदबाजों के खिलाफ इतनी जल्दी जोखिम लेना क्या तार्किक है? 'हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड' का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि जोखिम का स्तर इतना अधिक हो जाए कि सफलता की गुंजाइश ही नगण्य हो जाए। समस्या टीम के दृष्टिकोण में है, जहाँ खिलाड़ी परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में असफल साबित हो रहे हैं।

इंग्लिश बल्लेबाजों से सीखने की सीख

मैनचेस्टर में जैकब बेथेल ने जिस तरह की बल्लेबाजी की, वह एक आदर्श उदाहरण है। उन्होंने पहले समय लेकर खुद को क्रीज पर सेट किया और जब पिच को समझ लिया, तब जाकर अंत में आक्रामक शॉट्स खेले। भारतीय बल्लेबाजों में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन फिलहाल उनमें परिस्थितियों को समझने और उसी के अनुसार खेलने का लचीलापन कम दिखाई दे रहा है। यह किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरी टीम की सामूहिक विफलता है। क्रिकेट हमेशा से परिस्थितियों को भांपकर खेलने का खेल रहा है। ऐसा लगता है कि भारतीय बल्लेबाज क्रीज पर उतरते ही सिर्फ एक ही तरीका जानते हैं—पहली गेंद से ही हमला करना, चाहे इससे विपक्ष को वापसी का मौका ही क्यों न मिल जाए। खेल की बारीकियां और पारंपरिक शॉट्स के साथ तालमेल बिठाने में टीम को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।

हालांकि अभी घबराने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि द्विपक्षीय टी20 सीरीज टीम की मुख्य प्राथमिकताओं की सूची में शीर्ष पर नहीं होतीं, लेकिन यह समय टीम मैनेजमेंट के लिए आत्ममंथन का है। अपनी गलतियों को स्वीकार करना ही सुधार की पहली सीढ़ी है। अब टीम में बदलाव और नए कप्तान पर भरोसा जताने का दौर बीत चुका है। मैनेजमेंट को अब आँखें मूंदकर बैठने के बजाय उन खामियों को पहचानना होगा जो बार-बार टीम को संकट में डाल रही हैं। यदि प्रदर्शन में जल्द सुधार नहीं आया, तो श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर पर बाहरी और आंतरिक दबाव का बढ़ना तय है।

सवाल-जवाब

भारतीय टीम का प्रदर्शन इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर कैसा रहा?
भारतीय टीम का प्रदर्शन औसत से काफी नीचे रहा और टीम एक मैच में मात्र 76 रन पर ऑलआउट हो गई।
क्या भारत को अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरत है?
हां, जानकारों का मानना है कि 'हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड' वाली रणनीति हर स्थिति में काम नहीं करती और टीम को परिस्थितियों के हिसाब से ढलने की जरूरत है।
अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी में क्या कमी दिखी?
अभिषेक शर्मा लगातार आर्चर जैसे गेंदबाजों के खिलाफ पहली ही गेंद से आक्रामक शॉट खेलने का जोखिम ले रहे थे, जो कि कारगर साबित नहीं हुआ।
टीम मैनेजमेंट को अब क्या करने की आवश्यकता है?
मैनेजमेंट को अपनी गलतियों को स्वीकार कर आत्ममंथन करने और खेल में लचीलापन लाने की जरूरत है ताकि आगे के मैचों में बेहतर नतीजे मिल सकें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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