भारतीय क्रिकेट में इन दिनों युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी चर्चा में हैं, जिन्होंने इस साल इंडियन प्रीमियर लीग की व्यस्तताओं के चलते अपनी 10वीं की बोर्ड परीक्षा में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया। 15 साल के इस खिलाड़ी ने पूरी तरह अपने खेल पर फोकस करने का निर्णय लिया और परीक्षा छोड़ दी। लेकिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा वाकया भी दर्ज है जब महज 17 साल की उम्र में टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले एक युवा खिलाड़ी ने क्रिकेट और पढ़ाई दोनों के बीच गजब का तालमेल बिठाया था। इस खिलाड़ी का नाम पार्थिव पटेल है, जिन्हें साल 2002 में भारतीय टेस्ट टीम में खेलने का मौका मिला था।
साउथ अफ्रीका दौरे और बोर्ड परीक्षाओं का संकट
पार्थिव पटेल के करियर में एक ऐसा दौर भी आया जब उनके सामने क्रिकेट और बोर्ड परीक्षा दोनों को एक साथ संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। टेस्ट डेब्यू के ठीक अगले साल उन्हें साल 2003 के वनडे विश्व कप के लिए बतौर बैकअप विकेटकीपर टीम इंडिया के स्क्वाड में चुन लिया गया। यह टूर्नामेंट साउथ अफ्रीका की धरती पर खेला जाना था। जिस समय यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट शुरू होना था, लगभग उसी समय देश में पार्थिव की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं भी आयोजित होने वाली थीं। एक तरफ देश का प्रतिनिधित्व करने का सुनहरा अवसर था तो दूसरी तरफ भविष्य काAcademic करियर दांव पर था। इस उधेड़बुन और असमंजस की स्थिति से निपटने के लिए पार्थिव ने एक अनोखा रास्ता चुना और अपनी सारी किताबें अपने साथ पैक करके टीम इंडिया के साथ साउथ अफ्रीका रवाना हो गए।
ड्रेसिंग रूम बना था पढ़ाई का ठिकाना
साल 2003 के उस वनडे विश्व कप में भारतीय टीम के मुख्य विकेटकीपर की भूमिका राहुल द्रविड़ निभा रहे थे, जिसके चलते प्लेइंग इलेवन में पार्थिव पटेल के लिए जगह बनना बहुत कठिन था। पूरे टूर्नामेंट के दौरान पार्थिव की मुख्य जिम्मेदारी मैदान पर साथी खिलाड़ियों को पानी पिलाने और ड्रिंक्स पहुंचाने की रही। हालांकि इस बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई से दूरी नहीं बनाई। जब भी उन्हें मैच के दौरान या ट्रेनिंग सत्र से खाली समय मिलता था, वह ड्रेसिंग रूम के कोने में बैठकर अपनी किताबें खोल लेते थे और वहीं अपनी पढ़ाई पूरी किया करते थे। टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद वह वापस स्वदेश लौटे और अपनी 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुए। इस तरह उन्होंने खेल और शिक्षा दोनों मोर्चों पर सामंजस्य बिठाया और क्रिकेट के लिए अपनी पढ़ाई का बलिदान नहीं होने दिया।
कैसा रहा पार्थिव पटेल का अंतरराष्ट्रीय करियर
पार्थिव पटेल ने अपने लंबे करियर के दौरान भारतीय टीम के लिए क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट यानी टेस्ट, वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय में शिरकत की। हालांकि अपनी बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी के चलते वह लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की नहीं रख सके। पार्थिव ने भारत के लिए कुल 25 टेस्ट मैच, 38 एकदिवसीय मुकाबले और 2 टी20 मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट के मैदान पर उन्होंने 31.13 की औसत से कुल 934 रन बनाए, जिसमें उनके बल्ले से 6 अर्धशतक निकले। इसके अलावा वनडे फॉर्मेट में उन्होंने 736 रन अपने नाम किए, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में पार्थिव के नाम 36 रन दर्ज हैं।



















