भारतीय जूनियर क्रिकेट टीम इस समय मेंस एशिया अंडर-19 टूर्नामेंट में व्यस्त है। इस प्रतियोगिता में क्रिकेट जगत के जाने-माने दिग्गजों के बेटे भी मैदान पर उतर रहे हैं, जिनमें आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ शामिल हैं। ऐसे में खेल प्रेमियों के जेहन में यह सवाल लगातार आ रहा है कि इतनी कम उम्र में अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी इस टीम का हिस्सा क्यों नहीं हैं और इसके पीछे कौन सी वजहें जुड़ी हुई हैं।
सीनियर स्तर पर खेल चुके हैं वैभव
वैभव सूर्यवंशी महज 15 साल की छोटी उम्र में ही सीनियर क्रिकेट सेटअप का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने इसी साल इंग्लैंड के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। इसके बाद वह जिम्बाब्वे के दौरे पर भी गए और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 मुकाबलों में भी टीम के लिए मैदान पर उतरे। इससे पहले वह इसी साल आयोजित हुए अंडर-19 विश्व कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जहां उन्होंने टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में एक शानदार और रिकॉर्डतोड़ पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
बीसीसीआई का वह नियम जो वैभव को रोकता है
इस सवाल का मुख्य कारण भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई द्वारा साल 2016 में बनाया गया एक सख्त नियम है। इस नियम के अनुसार कोई भी खिलाड़ी उम्र के हिसाब से पात्र होने के बावजूद अपने पूरे करियर में केवल एक ही अंडर-19 विश्व कप में हिस्सा ले सकता है। इस प्रावधान को लागू करने के पीछे बोर्ड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ज्यादा से ज्यादा नए युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले और देश का टैलेंट पूल लगातार मजबूत होता रहे। चूंकि वैभव पहले ही अंडर-19 विश्व कप खेल चुके हैं, इसलिए वह भविष्य के किसी भी अंडर-19 विश्व कप या उससे जुड़े रोडमैप वाले टूर्नामेंट जैसे एशिया कप के लिए दोबारा पात्र नहीं रह गए हैं।
राष्ट्रीय टी20 सेटअप का नियमित हिस्सा
वैभव सूर्यवंशी के एशिया कप में न खेलने की एक और बड़ी वजह उनका सीनियर और नेशनल टी20 सेटअप से जुड़ना है। अब चूंकि वह राष्ट्रीय स्तर पर टी20 क्रिकेट के नियमित सदस्य बन चुके हैं, ऐसे में उन्हें दोबारा आयु-वर्ग या एज-ग्रुप वाले टूर्नामेंट्स में खेलने का अवसर नहीं मिल पाता है। इस प्रतियोगिता में वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ के बेटे जरूर खेल रहे हैं, लेकिन वैभव का करियर अब सीनियर स्तर की प्राथमिकताओं और बोर्ड के नियमों के दायरे में आगे बढ़ रहा है।



















