देशभर में रविवार को रोशनी का पर्व दिवाली अत्यंत उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। आवासीय क्षेत्रों से लेकर व्यावसायिक बाजारों और प्राचीन मंदिरों तक हर तरफ दीयों, मोमबत्तियों और आकर्षक विद्युत झालरों की चकाचौंध नजर आई। लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर बधाइयां दीं, मिठाइयां बांटी और उपहारों का आदान-प्रदान कर उत्सव की खुशियां साझा कीं। पंजाब और हरियाणा से लेकर पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक देश के हर कोने में दिवाली का भव्य और अद्भुत नजारा देखने को मिला। कहीं आसमान आतिशबाजी की रंग-बिरंगी रोशनी से सराबोर था, तो कहीं हजारों मिट्टी के दीयों से ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल जगमगा उठे। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस उल्लास के बीच प्रदूषण का गंभीर संकट भी गहरा गया, जिससे वायु गुणवत्ता काफी प्रभावित हुई।
श्रीनगर के लाल चौक पर अनूठा जश्न
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक लाल चौक इस वर्ष दिवाली के अवसर पर मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहां का प्रसिद्ध घंटाघर हजारों जगमगाते दीयों की रोशनी से आलोकित हो उठा। जैसे ही शाम ढली, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों का भारी हुजूम वहां जुटने लगा। लोगों ने घंटाघर के आसपास दीये प्रज्वलित किए और आतिशबाजी तथा पटाखे फोड़कर त्योहार का भरपूर आनंद लिया। कश्मीर घाटी के अन्य इलाकों में भी तैनात सुरक्षा बलों ने अपने शिविरों के भीतर दीये जलाकर और आपस में मिठाइयां बांटकर इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाया। इस आयोजन ने क्षेत्र में आपसी सौहार्द और उल्लास का एक अनूठा संदेश दिया, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
पंजाब, हरियाणा और स्वर्ण मंदिर में उत्सव
पंजाब और हरियाणा राज्यों में भी दिवाली का पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। चंडीगढ़ सहित दोनों राज्यों के तमाम प्रमुख शहरों के बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। प्राचीन मंदिरों और गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। लोगों ने अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को दीयों, मोमबत्तियों और चमचमाती बिजली की रोशनी से सजाया। अमृतसर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर में दिवाली के पावन अवसर पर सिखों का पवित्र पर्व बंदी छोड़ दिवस भी पूरी आस्था के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर स्वर्ण मंदिर को बेहद भव्य तरीके से रोशनी से सजाया गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु तड़के सुबह से ही मत्था टेकने के लिए परिसर में पहुंचने लगे थे। शाम ढलते ही पवित्र सरोवर के चारों किनारों पर कतारबद्ध दीये जलाए गए और आकाश में शानदार आतिशबाजी का नजारा दिखाई दिया।
बंदी छोड़ दिवस का ऐतिहासिक महत्व
बंदी छोड़ दिवस मूल रूप से सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब की वर्ष 1620 में मुगल कैद से ऐतिहासिक रिहाई की याद में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, गुरु हरगोबिंद साहिब के साथ उस दौरान 52 अन्य राजाओं को भी ग्वालियर के किले से रिहाई मिली थी। जब वे रिहा होकर अमृतसर पहुंचे, तो नगरवासियों ने उनके स्वागत में अपने घरों और गलियों में दीये जलाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी। तब से लेकर आज तक इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, जो अंधकार पर प्रकाश और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक माना जाता है।
देशभर के विभिन्न राज्यों में उल्लास
उत्तर प्रदेश के प्राचीन शहर वाराणसी में छोटे-छोटे बच्चों ने आकाश में स्काई लैंटर्न यानी आकाशीय लालटेन उड़ाकर दिवाली का अनूठा जश्न मनाया। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर को पारंपरिक मिट्टी के दीयों की रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा प्रांगण अलौकिक लग रहा था। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में युवा युवतियों ने फुलझड़ियां जलाकर त्योहार की खुशियां मनाईं, जबकि नदिया जिले में महिलाओं ने आंगन में सुंदर रंगोली बनाई और उसके आसपास दीये सजाए। राजस्थान के जयपुर स्थित BAPS श्री स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में पुजारियों द्वारा विशेष आरती का आयोजन किया गया। इस प्रकार देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित मंदिरों, आवासों और सार्वजनिक स्थलों पर रोशनी और उत्सव का मनमोहक माहौल बना रहा।
दिल्ली में दिवाली के साथ गहराया प्रदूषण का संकट
देशभर में जहां दीयों की रोशनी से दिवाली का जश्न मनाया जा रहा था, वहीं राजधानी दिल्ली में इस उल्लास के साथ प्रदूषण की गंभीर चिंता भी लगातार बढ़ती गई। रविवार की शाम को पटाखों की गूंज और आवाज के बीच शहर के कई इलाकों में भारी धुंध की चादर छा गई और हवा में पटाखों के धुएं की तेज गंध महसूस की जाने लगी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रविवार की शाम सात बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 371 दर्ज किया गया, जो बेहद खतरनाक रूप से ‘बहुत खराब’ श्रेणी के अंतर्गत आता है। पूरे दिन का औसत AQI भी 376 के उच्च स्तर पर बना रहा, जबकि इसके पिछले दिन यानी शनिवार को यह आंकड़ा 369 दर्ज किया गया था। दिल्ली के कुल 59 निगरानी केंद्रों में से 19 स्थानों पर हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा, सात केंद्रों पर AQI ‘खराब’ और शेष 33 केंद्रों पर यह ‘बहुत खराब’ स्तर पर पाया गया। राजधानी के जहांगीरपुरी इलाके में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही, जहां सबसे अधिक 460 AQI रिकॉर्ड किया गया, जो जनस्वास्थ्य के लिए एक चेतावनी है।
रोशनी और उत्सव के बीच खड़े होते गंभीर सवाल
इस प्रकार संपूर्ण भारतवर्ष में दिवाली का यह पर्व रोशनी, अटूट आस्था और आपसी भाईचारे का सुंदर संदेश लेकर आया। श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक से लेकर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर तक प्रज्वलित दीयों की चमक ने इस उत्सव को ऐतिहासिक और विशेष बना दिया। हालांकि, दूसरी ओर दिल्ली की लगातार बिगड़ती जहरीली हवा ने एक बार फिर से इस प्रकार के पारंपरिक त्योहारों और उत्सवों के दौरान होने वाले प्रदूषण पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए यह एक ऐसा विषय बन गया है जिस पर भविष्य में संजीदगी से विचार करने की आवश्यकता है ताकि आस्था और पर्यावरण दोनों का संतुलन सुरक्षित रखा जा सके।
















