शुक्रवार का दिन चंडीगढ़ शहर के लिए एक बेहद खौफनाक और हैरान करने वाला साबित हुआ, जब खाकी वर्दी पहनने वाले एक पुलिसकर्मी की उनके ही घर के भीतर हत्या कर दी गई। इस घटना ने एक तरफ कानून के रखवाले की जान ले ली, तो दूसरी तरफ रिश्तों की मर्यादा को भी तार-तार कर दिया। चंडीगढ़ पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल के रूप में सेवाएं दे रहे नितिन सिंह को किसी बाहरी बदमाश या दुर्दांत अपराधी ने नहीं, बल्कि उनके अपने ही 18 वर्षीय बेटे ने मौत के घाट उतार दिया। इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और उच्च अधिकारियों की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। शुरुआती तफ्तीश के दौरान पुलिस के सामने जो तथ्य आए, उन्होंने हर किसी को स्तब्ध कर दिया।
सड़क हादसे में जमानत पर बाहर आया था आरोपी बेटा
पुलिस की शुरुआती जांच-पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि आरोपी अरमान का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इसी वर्ष के शुरुआती महीनों में चंडीगढ़ के भीतर एक भयानक सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसमें एक अनियंत्रित थार वाहन ने मोटरसाइकिल पर सवार दो सगे भाइयों को बुरी तरह कुचल दिया था। इस भीषण टक्कर के कारण दोनों भाइयों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था और उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। उस बहुचर्चित थार दुर्घटना मामले में अरमान ही मुख्य अभियुक्त था। मृतक हेड कांस्टेबल नितिन सिंह ने कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए अपने बेटे को अदालत से जमानत दिलवाई थी और वह कुछ समय पहले ही जेल से रिहा होकर घर आया था। पिता को पूरी उम्मीद थी कि सलाखों के पीछे का वक्त काटने के बाद उनका बेटा अपनी हरकतों से तौबा करेगा और एक बेहतर इंसान बनेगा, लेकिन उसने इसके विपरीत ऐसा खूनी कदम उठा लिया जिसने पूरे परिवार को उजाड़ दिया।
शादी की जिद और कानूनी उम्र को लेकर हुआ था विवाद
कानून अधिकारियों के अनुसार, जेल से बाहर आते ही अरमान अपने माता-पिता पर इस बात का दबाव बनाने लगा कि उसकी शादी उसकी प्रेमिका के साथ तुरंत करवा दी जाए। पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल से यह बात सामने आई है कि वह अपनी इस मांग को लेकर लगातार अड़ा हुआ था और किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था। हेड कांस्टेबल नितिन सिंह और उनकी पत्नी अपने बेटे को लगातार समझा-बुझा रहे थे कि देश के मौजूदा कानूनों के अनुसार लड़कों के विवाह की वैध आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। चूंकि अरमान की उम्र अभी महज 18 साल है और वह पहले से ही एक गंभीर आपराधिक मुकदमे में जमानत पर चल रहा है, इसलिए उसे कानूनी उम्र पूरी होने तक धैर्य रखना चाहिए। लेकिन युवा अरमान अपनी जिद पर इस तरह आमादा था कि उसे परिवार की समझाइश और कानून के दायरे बिल्कुल भी रास नहीं आ रहे थे।
तैश में आकर उठाया हथियार और ले ली पिता की जान
शुक्रवार के दिन इसी पारिवारिक मुद्दे को लेकर घर के अंदर पिता और पुत्र के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जो धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि अरमान अपना मानसिक संतुलन खो बैठा। जिद के अंधकार में डूबे अरमान ने गुस्से में आकर घर पर रखा हथियार उठाया और अपने ही पिता पर गोलियां बरसा दीं। गोली लगने के साथ ही नितिन सिंह लहूलुहान होकर फर्श पर गिर पड़े और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और वारदात को अंजाम देने में प्रयुक्त हथियार को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। जिस औलाद के सुरक्षित भविष्य और कानूनी उलझनों से राहत के लिए पिता दिन-रात फिक्रमंद रहते थे, उसी औलाद के सनकी रवैये ने एक झटके में उनकी सांसें हमेशा के लिए छीन लीं।
एक फिक्रमंद पिता की कोशिश और दुखद अंत
चंडीगढ़ पुलिस की ड्यूटियों से जब नितिन सिंह अपने घर लौटते थे, तो एक पुलिसकर्मी की सख्ती के पीछे एक ऐसा पिता छिपा होता था जो अपने बेटे की बिगड़ती राह को लेकर बेहद चिंतित रहता था। उन्हें शायद इस बात का कभी आभास नहीं हुआ होगा कि जिस बेटे की गलतियों पर पर्दा डालने और उसे सुधारने के लिए वे कचहरी और अदालतों के चक्कर काट रहे थे, वही बेटा एक दिन उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा। हेड कांस्टेबल पिता भली-भांति जानते थे कि कानूनन विवाह की आयु 21 वर्ष है। उन्होंने बेटे को बड़े स्नेह और अनुशासन दोनों का पाठ पढ़ाते हुए कहा था कि अभी तुम्हारी उम्र सिर्फ 18 साल है और तुम एक गंभीर केस में जमानत पर बाहर हो, इसलिए 21 वर्ष के होने और अपने पैरों पर खड़े होने का इंतजार करो, जिसके बाद वे खुद उसकी शादी धूमधाम से करवा देंगे। लेकिन गुस्से और सनक की सभी सीमाएं लांघ चुका अरमान पिता की यह जायज चिंता और कानून का बंधन समझ पाने में पूरी तरह असफल रहा और उसने आवेश में आकर ट्रिगर दबा दिया।



















